जिस्म की बात नहीं थी

जिस्म की बात नहीं थी

कल रात जो भी हुआ उससे वह बहुत आहत और अपमानित महसूस कर रहीं थीं। पर ऐसा पहली बार तो नहीं हुआ था। लेकिन अब सहन करना दूभर हो गया था।  तीन साल का वैवाहिक जीवन था उनका, और हर बीवी की तरह वह भी चाहती थी कि उसका पति उसे प्रेम करे, उसकी सुंदरता और प्रेम के मोहपाश में बंधा रहे। लेकिन क्या प्रेम सिर्फ़ शारीरिक होता है? नहीं। प्रेम तो वही है जो शरीर से, बुद्धि से, बाहरी आकर्षण से परे है। माना पति पत्नी के रिश्ते में शारीरिक संबंध भी अहम होता है लेकिन मान और सम्मान, स्वयं की इच्छा भी तो कोई मायने रखतीं हैं कि नहीं? 
इसी उधेड़बुन से हताश निधि स्वयं को संयत करने की कोशिश कर रहीं थीं। उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वह किसे अपने मन की दुविधा बताए। एक बार उसने अपनी दूर के रिश्ते की बहन जो उसकी अच्छी सहेली भी है को बताने की कोशिश की तो वह उल्टा उसे ही समझाने लगी कि "प्यार जैसा कुछ नहीं होता। शादी के बाद तो पति पत्नी में शारीरिक संबंध जरुरी ही होतें हैं। बाकी सब बातें तो फिल्मी  होतीं हैं।असल जिंदगी में ऐसा कुछ नहीं होता। और मर्द तो ऐसे ही होते हैं।" 

बस तब से चुपचाप सब सह रहीं हैं वह। तीन साल पहले निधि अपनी आँखों में ढ़ेरों सपने संजोए इस घर में बहू बनकर आईं थीं। बचपन से ही वह अपने राजकुमार के सपने देखा करतीं थीं कि उसका जीवनसाथी उसके दिल के करीब होगा और अपने प्यार से वह उनके दिल पर राज करेगी।
शादी से पहले उसकी जिंदगी में कोई राजकुमार नहीं आया। फिर समय रहते निधि के माता-पिता ने एक अच्छा रिश्ता देखकर उसकी शादी कर दी। शादी से पहले अतुल और निधि की कुछ एक मुलाकात हुई भी थी। पर कुछ मुलाकात में हम इंसान को पूरा कहाँ समझ पाते हैं? उन आधी अधूरी, सकुचाई सी मुलाकातों में वह भी कितना जान पाती भला। 
शादी के बाद प्रथम मिलन की रात में उसने कितनी कल्पनाएँ कर ली थी आने वाली भावी जीवन की। पर जब हकीकत से सामना हुआ तो एक हुक सी उठी उसके कलेजे में और खामोश आँसुओं के रूप में बरसती रहीं। अतुल और निधि के बीच ज्यादा बातचीत नहीं हुई और न ही उसने निधि के मन को टटोलने की कोशिश की। उसकी हर कोशिश बस निधि के जिस्म को पाने की रहीं। पहली रात में ही किला फतह करना चाहता था वह। निधि को कुछ अहसास नहीं हुआ। बस महसूस हुआ तो वो था दर्द और अपमान।ससुराल में पहला दिन और वह डरी सहमी सबके सामने सहज बनने की कोशिश में लगी थी। अचानक बड़ी हो गई थी वह। उसे दर्द को छिपाकर मुस्कुराना आ गया था।

अब यह हर रोज की बात थीं। निधि के चेहरे पर नई नवेली दुल्हन की चमक की बजाय खौफ रहने लगा। कई बार मन करता उसका की वह विरोध करें या उससे बात करें। पर वह सारा विरोध और बातें मन के किसी कोने में दफन हो जातीं जब अतुल उससे तेज आवाज में बात करता। अब तो वह इतना क्रूर हो चुका था कि बात बेबात हाथ भी उठा देता था।कल भी तो उसने कितनी जोर से लात मारी गुस्से में आकर और वह रात भर पेट पकड़कर बैठी रहीं। दर्द से कराहती रहीं पर अतुल ने परवाह नहीं की यह जानते हुए भी कि निधि माँ बनने वालीं हैं। दूसरा महीना चल रहा है उसका और तबियत भी नासाज हैं।

यहीं सब सोचते सोचते निधि की आँखों के आगे अंधेरा छाने लगा। वह बेहोश हो गई। और जब होश आया तो खुद को अस्पताल में पाया। सब कुछ धुंधला सा दिख रहा था। पर जब नजर साफ हुई तो सामने उसने अपनी माँ को पाया। माँ को देखते ही निधि फूट फूट कर रोने लगी। बहुत कुछ था उसके मन में जो वह कहना चाह रहीं थीं लेकिन उसकी आवाज़ भीतर ही भीतर घुट कर रह जातीं। वह कुछ कह नहीं पाई पर उसकी माँ बहुत कुछ समझ गई।
एक हफ्ते बाद निधि को अस्पताल से छुट्टी मिली। उसने निश्चय कर लिया था। वह अपनी मां के साथ अपने घर जाने की तैयारी करने लगीं। जब अतुल को पता चला तो उसने पूरा घर सिर पर उठा लिया। और धमकी देने लगा। वह निधि को कहने लगा, "क्या कमी है तुम्हें। ज्यादा सिर पर चढ़ गई हो मेरे। घर की दहलीज नहीं लांघ सकती तुम मेरी इजाजत के बिना । दोबारा इस घर में कदम नहीं रखने दूंगा।"। वह चिल्लाता रहा लेकिन निधि ने मुड़कर नहीं देखा और चल पड़ी आगे की चुनौतियों से लड़ने।
घर पहुंचते ही उसके सामने रिश्तेदारों और अपनों के सवालों की झड़ी लग गई। जो भी सुनता बस यहीं कहता कि " निधि तुम्हें ही सब्र रखना चाहिए था। पति पत्नि के रिश्ते में तो यह सब होता ही हैं।" निधि किसी की बात पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देतीं क्योंकि वह जानतीं थीं कि समाज के लोग यह बात नहीं समझेंगे। पर जब एक दिन उसके ही माता-पिता ने उसके सामने अतुल से समझौते की बात रखीं तो वह टूट गई। पर उसने साफ मना कर दिया। उसकी बहन समझाने भी आई कि बात तो सिर्फ तन के रिश्ते की है और यह तो होता ही है इसमें "

तब तक निधि ने फैसला कर लिया था। माता-पिता से कुछ वक्त मांगा ताकि वह अपने लिए एक नौकरी तलाश सके और स्वाभिमान के साथ जी सके और अपनी बहन को एक ही जवाब दिया कि" जिस्म की बात नहीं थी लेकिन उनके दिल तक जाना था...."

धन्यवाद 
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अनामिका शर्मा। 
  

#ससुराल मे पहला दिन

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