कहीं वह दोस्ती न तोड़ दे

मैंने तुम्हें कितना खोजा ?तुम्हें कितने मैसेज किए पर तुमने कोई रिप्लाई नहीं किया। मुझे लगा तुम मुझसे नाराज हो।"

कहीं वह दोस्ती न तोड़ दे

 "जिया! कैसी हो?"
" पल्लवी तुम !तुम यहाँ कैसे? तुम तो मुंबई में थी ना।"
" हाँ! यार मैं मुंबई में थी ।अब हस्बैंड की पोस्टिंग यहाँ हो गई और तुम कैसी हो ? शादी के बाद तो गायब ही हो गई।" पल्लवी बहुत खुश थी। उसकी बेस्ट फ्रेंड से जो उसकी मुलाकात हुई थी।
 "मैंने तुम्हें कितना खोजा ?तुम्हें कितने मैसेज किए पर तुमने कोई रिप्लाई नहीं किया। मुझे लगा तुम मुझसे नाराज हो।"
" नहीं यार !ऐसी कोई बात नहीं है ।मैं ठीक हूँ। बस जिंदगी कट रही ।" जिया के चेहरे पर उदासी की लकीरें खिंच गई थी। पल्लवी ने देखा पर कुछ कहा नहीं ।उसे लगा एक तो इतने सालों बाद मुलाकात हुई और वह भी रास्ते में शायद जिया को बताने में हिचकिचाहट हो ।
"घर आओ कभी। यह लो मेरा नंबर।" पल्लवी ने उसे अपना नंबर देते हुए कहा। "तेरा नंबर तो है मेरे पास।" जिया मन ही मन बोल पड़ी। "कुछ कहा क्या?"
" नहीं।ठीक है मैं तुझे कॉल करूँगी ।"
"पक्का करना।मुझे इंतजार रहेगा।" पल्लवी खुशी-खुशी घर आई। लेकिन जिया शायद खुश नहीं थी।
" क्या हुआ? मार्केट गई थी ना। कुछ हुआ क्या?" मोहित ने पूछा ।
"कुछ नहीं जो बात मैं सालों से छिपाए आ रही थी। वह अब शायद राज नहीं रह पाएगी।"
" पल्लवी !मिली क्या ?"
"आपको कैसे पता?"
" तुम्हारा पति हूँ। तुम्हें नहीं समझूँगा तो किसे समझूँगा ?शादी से तुम्हें देख रहा तुम उसकी दोस्ती और उसे कितना मिस करती हो। कितना कहा तुम्हें। सब से उसका हालचाल मालूम करती हो फोन भी कर लिया करो पर तुम पता नहीं क्यों डर जाती हो?" जिया की आँखों में आँसू आ गए।
" सॉरी जिया !मुझे तेरे रुलाना नहीं था पर...।"
" मैं समझ रही ।आप खुद को दोष ना दें ।वह इतने बड़े घर की बहु है।  कहीं मुझसे दोस्ती ना थोड़ लें। पता नहीं उसके पति क्या सोचेंगे? हम गरीब नहीं है पर मुझे उसके सामने जाने में हीनता की भावना आ जाती है ।कॉलेज में हमेशा वह शानो शौकत से रहना, घूमना फिरना यही सब बातें करती थी और उसे मिला भी।"
" पर तुम्हें नहीं मिला ।"
"ऐसा नहीं है। मैं बहुत खुश हूँ आपके साथ। पर पल्लवी पता नहीं क्या सोचेगी?"
" कोई बात नहीं ।अब मिल गई ना। जाओ उसके घर।"
" उसने बुलाया है पर मेरी हिम्मत नहीं हो रही ।"
"तो उसे बुला लो।"
" क्या वह आएगी यहाँ? उसके पति उसे आने देंगे?"
" क्यों नहीं आने देंगे। अगर तुम से बात नहीं करना चाहती तो वह तुम्हें मार्केट में टोकती भी नहीं ।"
"ठीक है! जैसा आप कहें ।"जिया ने पल्लवी को आने का न्यौता दिया। जिसे पल्लवी ने एक ही बार में मान लिया ।संडे को जिया ने पूरे घर को चमका डाला। खाने में पल्लवी की पसंदीदा चीजें बनाई। तभी दरवाजे की घंटी बजी ।
"आओ पल्लवी "।जिया लिपटकर उसके गले लग गई ।"बड़ा सुंदर घर सजाया है तुमने और पतिदेव कहाँ है?"
" यहाँ है ।नमस्ते बहुत तारीफ सुनी है आपकी ।"
"कब"?
"शादी के बाद से ही सुन रहा।"
" और मुझे ही नहीं पता।" जिया घबरा गई। "आप लोग बैठिए।  मैं चाय नाश्ता लेकर आती हूँ।" जिया जल्द वहाँ से भाग गई। पल्लवी को लग रहा था कि वह उदासी की लकीरें और मोहित की बातों में कोई तार जरूर है। वह पूछती इससे पहले ही उसके चेहरे को देख मोहित ने उसे सब कुछ बता दिया। तब तक जिया भी आ गई।पल्लवी की आँखों में आँसू थे।
" क्या हुआ? क्यों रो  रही हो?आपने मेरे दोस्त को रुला दिया। क्या  कहा  आपने?"
" और तू जो रोज इतने सालों तक....।" पल्लवी ने जिया को गले लगा लिया। "इतना प्यार करती है मुझसे। मेरी दोस्ती को इतना मानती है और मुझ पर विश्वास ना कर सकी। ना मेरे पति ऐसा सोचते हैं और ना मैं ।तूने कैसे मान लिया कि मैं अमीर ....मुझे तो कहते भी शर्म आ रही है।" पल्लवी रो पड़ी। "बस पल्लवी मुझे माफ कर दे। तेरा हालचाल लेती रही पर कभी हिम्मत ना हुई कि तुझे फोन करूँ। तेरा विश्वास नहीं जीत पाई।"
" मेरी गलती है कि मैं तुझे अपने दोस्ती पर विश्वास नहीं दिला पाई।"
"अरे !अब माफी माँगती रहोगे एक दूसरे से या दोस्ती भी करोगे।" पल्लवी और जिया हँस पड़े।

मेरी कहानी पसंद आई तो मुझे लाइक और मुझे फालो करें ।

#हरएकफ्रेंडजरूरीहोता 

डाॅ मधु कश्यप 

What's Your Reaction?

like
0
dislike
0
love
0
funny
0
angry
0
sad
0
wow
0