कविता -शिव विवाह

कविता -शिव विवाह

भोले संग ब्याह रचाने को,
कैलाश पर घर बसाने को,
गौरा हो रहीं अति आतुर ,
भोले संग लेने को भांवर।

यही प्रतिज्ञा है उनकी,
हल्दी लगे शंकर के नाम की,
मेहंदी भी नटराज नाम की,
चूड़ी सजे कैलाशपति नाम की।

भोलेभाले ,लट धारी संग,
भूत पिशाच और नंदी ,
आए हैं बन बाराती ,
ब्याहने को मां गौरी।

रूप था शिव का अति विक्राला,
धारण सर्प कुंडल और मुंडो की माला ,
बदन पर विभूति और लपेट बाघंबर,
आ पहुंचे रुद्रप्रयाग त्रियुगी नारायण मंदिर।

पारुल हर्ष बंसल

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