केरल की ट्रिप और हाय रे ये अंग्रेजी !

केरल की ट्रिप और हाय रे ये अंग्रेजी !

काव्या आज बहुत खुश थी आखिर इतने सालों बाद उसका केरल घूमने का सपना जो पूरा होने जा रहा था ।उसका मन बार बार इस कल्पना से ही रोमांचित हुए जा रहा था कि वह बाइ एयर केरल जा रही है।हवाई जहाज से ये उसकी पहली यात्रा थी इसलिए उत्साह और उमंगे आसमां छू रही  थीं। बड़ी बेटी  सान्या का इस बार बोर्ड था तो वह नही जा रही थी ।बस, वह उसका छः साल का बेटा और उसके मायके से भाई की फैमिली।पूरे महीने भर से अन्दर ही अन्दर तैयारी कर रही थी काव्या ।बस टिकट की कन्फर्मेशन होनी थी वह भी आज हो गई थी।अपनी फुटवियर से लेकर ट्रेडिंग स्टाइलिस्ट ड्रैसेज की खूब शॉपिंग की उसने और आज वह उड़ान भर रही थी पूरे परिवार के साथ दिल्ली इंदिरागांधीएयर पोर्ट  से कोची एयरपोर्ट तक की।साढ़े तीन घंटे की उड़ान ! बिल्कुल खुली  आँखो से सपना सा लग रहा था उसे !जानबूझ कर खिड़की की तरफ बैठी थी क्योकि देखना चाहती थी खुले आसमां तले बादलों की लुक्का छिप्पी।खिलौनो की तरह शहर और गाडियाँ !

कोची एयर पोर्ट पहुँचते ही एक बुक की हुई गाड़ी उन्हे लेने आई और फिर एक रात कोची रुकने के बाद अगले दिन वह निकल गये, मुन्नार, थेकड़ी एल्लपीबीच,और फिर कोबलम बीच। चाय के बागानों से लेकर पहली बार समुद्र की लहरों का शोर उसके मन तन को प्रफुल्लित किये जा रहा था कि बीच में आ गई अंग्रेजी।जी हाँ अंग्रेजी दो प्रान्तों के बीच बाचीत करने का सशक्त माध्यम  ! यहीं से शुरू हुआ काव्या और उसके परिवार के साथ दक्षिण भारत  घूमने और  वहाँ की खूबसूरती में रोमांस के साथ एक अलग रोमांच।अंग्रेजी भाषा का रोमांच !!

 अंग्रेज चले गये और अपनी अंग्रेजी यहीं छोड़ गये  इतनी  देर से पूछ रहा हूँ बेवकूफों से,,,,,केरल के कोवलमबीच के सामने वाले रिशेप्शन हॉल में खड़ा  साहिल बड़बड़ा रहा था कि काव्या उसके भैया भाभी  बच्चे सब वहीं इन्क्वायरी काउन्टर के पास आकर खड़े हो गये ।साहिल बार बार अपनी टूटी फूटी अंग्रेजी में पूँछने की कोशिश कर रहा था कि यहाँ से 'कन्याकुमारी' कितनी दूर है,,,क्या वह इस समय जाकर शाम तक वापस आ सकते हैं? पर इन्क्वायरी काउन्टर पर साउथइण्डियन ठेठ अंग्रेजी भाषा ज्ञानी बैठा था समीर बार बार पूछे और उसका बस एक ही जबाब,,,साॅरी सर ,आइ कुडन्ट अन्डर स्टैन्ड  ,व्हाट डिड यू आस्क?  अब काव्या की बारी थी अपना हाथ,,,अरे हाथ नही ज़बान आजमाने की।
उसके भैया भाभी  की तो अंग्रेजी यस  नो और थैंक्यू तक सीमित थी पर वह जरूर बच्चों की पैरेन्ट्स टीचर मीटिंग मे जा जाकर अपनी बात तो कम से कम कर ही लेती थी।पर उसके लिये भी तो अपने बड़े बेटे से कन्सल्ट करती थी एक रात पहले ही क्योंकि वह भी हिंदी मीडियम से ही थी।

फिलहाल उसने अपनी बात रखी-सर, आइ वान्ट टू नो कैन वी कम बैक हियर फ्राम कन्याकुमारी टिल इवनिंग।
ओह ,यस यस यू कैन।
अब फिर काव्या चुप आगे की बात कौन सी भाषा में पूछे ! अभी तो बहुत कुछ पूछना था जैसे कि आपके रिजॉरट में सेम रूम मिल जायेगा क्या। बेचारी बहुत देर तक सेन्टेन्स बनाती रही ,,,पर कुछ समझ नही आ रहा था और साहिल, नयना , विवेक सब उसका मुँह ताक रहे थे कि अब सारी बात क्लियर हो जाएगी और वह आज का दिन यहां स्पैन्ड कर लेंगे क्योंकि बच्चों को वहाँ बहुत अच्छा लग रहा था ।लहराती लहरों की मधुर आवाज,,स्वच्छ सफेद नीला आसमां,रिजॉरट के पास देवी का मंदिर और सामने बीच का सुन्दर नज़ारा।पर हाय रे ये अंग्रेजी का अदभुत ज्ञान और हमारे देशवासियों का इस पर अभिमान! बेचारी काव्या भी बहुत कोशिश कर रही थी कि समस्या सुलझाकर वह साबित कर सके कि देखा आज उसकी सो कॉल्ड अंग्रेजी पर पकड़ की वजह से उनका प्रोग्रैम सैट हो पाया। पर नही,,बाइ चांस उस समय इन्क्वायरी काउन्टर पर कोई ऐसा नही था जो हिन्दी भाषा में भी महारथ हो।
फिलहाल बहुत देर की माथापच्ची के बाद कहीं से हैलो की आवाज आई ।मुड़कर देखा कोई नया नया जोड़ा था जो पंजाब से आया था और बहुत देर से उनकी बातें सुन रहा था ।रिया से बोला -दीदी आप लोगो का क्या प्रोग्राम है आप जाकर वापस आना चाहते हो कन्याकुमारी से इधर या आज एक दिन एक्सट्रा रुकना है?
अरे इसे तो हिन्दी आती है!!बारह दिन के ट्रिप पर पाँचवा दिन था आज और अब तक के इस ट्रिप में पहला कोई हिंदीभाषी मिला था।खुशी से साहिल काव्या मुस्कुरा उठे,,,इतने मे साहिल से बात समझकर उस नौजवां ने खटाखट और बढिया अंग्रेजी में रिशेप्शनिस्ट से बात कर सारा प्रोग्रैम  सैट कराया कि आप लोगों को आज यहाँ रूम मिल जायेगा और चार्जस भी वही लगेगें जितने मे आप दो दिन रुके और आप सब आज यहां स्टे करके आसपास की जगह कवर करके कल सुबह अर्ली मॉर्निंग कन्याकुमारी के लिए निकलना ताकि वहाँ का पूरा एरिया शाम तक कवर हो जायेऔर फिर आप रामेश्वरम के लिए जा सकते हो।
साहिल और वह देवदूत,,,हाँ हाँ देवदूत ही कहूँगी क्योकि उस समय अंग्रेजी न बोल पाने के कम ज्ञान ने  उनके पूरे दो घंटे बरबाद कर दिये थे ।बच्चों का सुबह सुबह बीच के किनारे खडे होकर सनराइज देखने का सपना अधूरा रह गया था और हाँ नवरात्रे चल रहे थे तो उधर के मंदिर में खड़े होकर घंटे घटियाल और वहां के पूजा विधिविधान को देखने की काव्याऔर उसकी भाभी की तमन्ना भी तमन्ना रह गई क्योंकि सुबह की आरती सात बजे की थी और मुई अंग्रेजी की वज़ह से पूरे आठ बज चुके थे और अगर अभी भी वह लड़का न मिलता  तो न जाने कितना समय और बरबाद होता कम से कम  उतना तो जब तक कोई हिंदीज्ञानी इन्क्वायरी काउन्टर पर न आ जाता।
समीर कोची से दिल्ली जाने वाली इंडिको एयरफ्लाइट में उड़ान भरते समय एयर हॉस्टस के  पहले अंग्रेजी  फिर उसके हिंदी मे अनुवाद पर यही सोंच रहा था  हाय रे अंग्रेजी ! वहीं काव्या ने पक्का प्रामिस किया खुद से कि वह अबकी बच्चों की समर वैकेशन मे इंगलिश स्पीकिंग कोर्स जरूर करेगी ताकि अंग्रेजी समझने के साथ साथ वह अंग्रेजी बोल भी सके और हमारे बहुभाषी देश में अंग्रेजी जो कि कॉम्यूनिकेशन की मजबूत कड़ी  है वहाँ उसकी भी पकड़ मजबूत हो जाये ताकि फिर मजबूरी में साहिल न बड़बड़ा पाये कि अंग्रेज चले गये और अंग्रेजी छोड़ गये और उनके घूमने फिरने का रोमांच वैसा ही बना रहे जैसा कि घर से निकलते वक्त था।

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