कौन है वसीम रिजवी ? क्यों सनातन धर्म अपनाकर बने जितेंद्र नारायण त्यागी ?

कौन है वसीम रिजवी ? क्यों  सनातन धर्म अपनाकर बने जितेंद्र नारायण त्यागी ?

माथे पर त्रिपुंड, भगवा बाना और मंदिर में पूजा करते हुए वसीम रिजवी ने इस्लाम धर्म छोड़कर सनातन धर्म अपना लिया है।

 यूपी शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष रहे वसीम रिजवी का नया नाम जितेंद्र नारायण त्यागी हो गया है। उन्होंने गाजियाबाद के डासना मंदिर में महंत यति नरसिंहानंद के समक्ष पूरे विधि-विधान से हिंदू धर्म अपनाया। 

कुछ दिन पहले ही उन्होंने ऐलान किया था कि वह सनातन धर्म अपनाएंगे।

वसीम रिजवी मूल रूप से लखनऊ के निवासी हैं। साल-2000 में वह लखनऊ के मोहल्ला कश्मीरी वार्ड से सपा के नगरसेवक चुने गए। 

2008 में शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के सदस्य और फिर बाद में चेयरमैन बने। वसीम रिजवी ने कुरान से 26 आयतों को हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी जो खारिज हो गई। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को लेकर वसीम रिजवी पर जुर्माना भी लगाया था।
ऑर मुस्लिम आवाम ही नहीं बल्कि वसीम रिजवी के परिवार के लोग भी उनके खिलाफ हो गए थे, उनकी मां और भाई ने भी अपना नाता तोड़ लिया था।

अपने धर्म परिवर्तन पर रिजवी ने कहा कि मैं इस्लाम को आतंकवाद से बचाना चाहता था। यही कारण है कि कुरान में से 26 आयतों को हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दाखिल की थी। पर मुस्लिम समाज का एक तबका मेरे खिलाफ खड़ा हो गया। मुझे जान से मारने की धमकी मिलने लगी। सर कलम करने वाले इनाम को बढ़ा दिया गया। मेरे खिलाफ फतवा जारी किया जा रहा है। इस्लाम से बाहर कर दिया है। यहां तक कि मुझे धमकी दी गई है कि मरने के बाद कब्रिस्तान में दफनाने के लिए जगह नहीं दी जाएगी।


वसीम रिजवी ने यह भी कहा कि मेरी इच्छा है कि मरने के बाद मेरा अंतिम संस्कार हिंदू रीति रिवाज से किया जाए।
इसलिए ही मैंने हिंदू धर्म अपनाया है।

रिजवी ने डासना मंदिर पहुंचकर कहा कि जब मुझे इस्लाम से निकाल ही दिया गया है, तो ये मेरी मर्जी है कि मैं किस धर्म को स्वीकार करूं। मैंने सनातन धर्म चुना, क्योंकि दुनिया का सबसे पुराना धर्म है। वसीम रिजवी के सनातन धर्म ग्रहण करने के बाद उनका शुद्धिकरण किया गया। 

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