क्या आपका बच्चा भी बार-बार जिद करता है ?

क्या आपका बच्चा भी बार-बार जिद करता है ?

बच्चों का जिद्दी होना साधारण सी बात होती है पर यदि बच्चा बार-बार हर बात को लेकर जिद करे तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिये |

हमने अक्सर देखा है कि छोटी उम्र से ही बच्चे जिद्दी होते हैं पर उनमें उम्र के साथ जिद्द का बढ़ना सही नहीं है यदि बच्चों की जिद पूरी ना की जाऐ तो चिड़चिड़े स्वभाव के हो जाते हैं | कभी-कभी माता-पिता को भी बच्चे के जिद्दी स्वभाव की वजह से मानसिक व आर्थिक परेशानी उठानी पड़ती है |

जिन बच्चों में जिद्दीपन की आदत होती है वे माता-पिता से अचानक ही कभी भी कहीं भी अपनी बात की डिमांड रख देते हैं व अपनी बात को माता-पिता से मनवाने का बार-बार हर तरह से जतन करते हैं यहां तक कि वे किसी और के सामने भी माता-पिता को शर्मिंदा करने से जरा भी हिचकते नहीं हैं | जिद्दी बच्चे हर नामुमकिन काम को करने की जिद करते हैं | वे हर बात पर बहस करते हैं व सवाल उठाते हैं कई बार उनसे बात करने पर हमें लगने लगता है कि जैसे हमने पत्थर पर अपना सिर मार लिया हो | जिद्दी बच्चे बात - बात पर अपना गुस्सा व्यक्त करते हैं व चिड़चिड़ेे स्वभाव के हो जाते हैं |     

जिद्दी बच्चे अपने मन में पहले से ही गणित लगाने लगते हैं कि यदि मैं अपने माता-पिता से इस विषय पर बात करूंगा तो वे कैसा जवाब देंगे व उनकी मानसिक प्रतिक्रिया क्या होगी ? इतना ही नहीं वे यह सब सोचकर भी कुछ ना कुछ नई हरकत कर ही देते हैं यदि बच्चे की एक जिद पूरी कर दी जाए तो वे दूसरी जिद पकड़ने लग जाते हैं और इस तरह से उनमें जिद करने की प्रवृत्ति बढ़ती चली जाती है जिसका कोई अंत नहीं होता जरूरी नहीं कि आप उनकी हर जिद को पूरा करें क्योंकि यदि जिद्दी बच्चों की हर जिद को पूरी की जाऐ तो बच्चों के अंदर जिद्दीपन का स्वाभाव और भी ज्यादा बढ़ने लगता है

ऐसे में जरूरी है कि बच्चे को यह एहसास हो कि उसका जिद्दीपन काम नहीं करेगा यदि आपका बच्चा किसी दुकान में जाकर खिलौने की मांग करता है और खिलौना ना मिलने की स्थिति में वह चीखने चिल्लाने लगता है तो आप उसकी तरफ ध्यान ही ना दें इससे बच्चे को एहसास होने लगेगा कि उसकी जिद से कुछ हासिल नहीं होने वाला | यह तो थे जिद्दी बच्चों के लक्षण अब हम आगे जानेंगे कि जिद्दी बच्चों को कैसे संभालना चाहिए |   

  1, यदि आप चाहते हैं कि आपके बच्चे आपकी हर बात मानें व उसी के अनुसार काम करें तब आपको भी उनकी बातों को सुनना होगा व उन्हें अहमियत देनी होगी कई बार हम माता-पिता बच्चों के बातों को नजरअंदाज कर देते हैं उन्हें अहमियत ही नहीं देते ऐसे में बच्चे जिद्दी स्वभाव के हो जाते हैं |                       

2, बच्चों पर कभी भी किसी भी बात को लेकर दवाब न डालें कभी-कभी हमारे अनुचित व्यवहार के कारण भी वे जिद्दी बन जाते हैं बच्चों को डांटने की बजाय प्यार से समझाने की कोशिश करें वह शांत रहे उन्हें चिल्लायें नहीं 

3, बच्चों को पारिवारिक परिवेश अच्छा दें उनके सामने अपने बड़े बुजुर्गों से बहस न करें | बड़े बुजुर्गों की बातों का

4, अपने व्यवहार में निरंतरता बनाए रखें यदि आप बच्चों से जुड़े किसी भी प्रकार के नियम बनाए हैं तो उस पर दृढ़ रहें 

 5, बच्चों को हर वक्त डांटना भी ठीक नहीं होता बार बार उन पर गुस्सा होने के उपाय उनके काम की प्रशंसा करें जिससे उनका मनोबल अंदर से बढ़ेगा और वे आपकी हर बात मानेंगे 

   6, यदि बच्चे बार-बार ज़िद या गलती करते हैं तो उन्हें समझाने का प्रयास करें कि यह गलत है इसके परिणाम समझाने चाहिए 7, बच्चों को कभी कभार दोस्तों के साथ घूमने जाने दे क्योंकि कई बार बच्चों में जिद्दीपन का स्वभाव स्ट्रेस के कारण भी बढ़ता है |                                               

 8, बात-बात पर बच्चों पर रोक-टोक ना लगाएं क्योंकि ऐसा करना भी बच्चों में जिद्दीपन को बढ़ावा देता है |                                     

   बच्चों को यह एहसास न कराएं कि आप उन पर बार-बार हुक्म चलाते हैं जिद्दी बच्चों के बहुत सी समस्याएं होती हैं जो पल-पल बदलती है पर उन्हें अनुशासन में रखना जरूरी होता है लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं कि उनसे मार पिटाई ही की जाये उन्हें परिणाम को समझाऐ कि कब कहां क्या गलत हो सकता है ? उन्हेें जब अंदर से सही गलत का एहसास होगा तो वे निश्चय ही अपने जिद्दी स्वभाव को छोड़ देंगे और आपकी हर बात को मानेंगे इसके अलावा बच्चों के लिए उचित आहार व भरपूर नींद का ध्यान रखें क्योंकि कभी-कभी इनके कारण भी बच्चों का स्वाभाव जिद्दी बन जाता है।

धन्यवाद                                                               

रिंकी पांडेय

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