क्या बेटियों को माता पिता की संपति में वारिस बनाना चाहिए ?

पिंक कॉमरेड समय समय पर समाज के मुद्दों पर चर्चा करता है । आइये देखें इस विषय पर पिंक कॉमरेड क्या विचार रखती हैं ?

क्या बेटियों को माता पिता की संपति में वारिस बनाना चाहिए ?

पिंक कॉमरेड समय समय पर समाज के मुद्दों पर चर्चा करता है । आइये देखें इस विषय पर पिंक कॉमरेड क्या विचार रखती हैं ?

अनिता सिंह

जरूर बनाना चाहिए मेरे विचार से तो हमें शुरू से ही बेटे और बेटी दोनों को एक ही हिसाब से लालन पालन करना चाहिए बेटे के मन में शुरू से यह बात डालनी चाहिए कि जो कुछ तुम्हारा है उसमें तुम्हारी बहन का भी आधा हिस्सा है जिससे बच्चे के मन में आगे चलकर यह भावना ना आए की प्रॉपर्टी में सिर्फ बेटों का ही हक होता है जब घर से ही हक दिया जाएगा तभी समाज में कुछ पॉजिटिव बदलाव आ सकता है हम आज भी ज्यादातर मामलों में देख रहे हैं कि कानून ने तो बेटियों को हक दे दिया है लेकिन खुद घरवाले बेटियों को उनका हक नहीं देते भाई भी उनके हक को मार लेते हैं यदि कोई बेटी संपत्ति में अपना अधिकार मांगते हैं तो उससे सारे घर वाले चिड़ने लगते हैं क्योंकि समाज का ताना-बाना ही कुछ ऐसा बना गया है। लड़का हो या लड़की पेरेंट्स की संपत्ति पर हक दोनों का होना चाहिए। यदि लड़कियों को भी संपत्ति में हाथ मिलने लगे तो उनकी स्थिति में काफी सुधार आएगा मैं ऐसा सोचती हूं।

मधु कश्यप

बिल्कुल बनाना चाहिए ।जितना घर बेटे का है बेटी का भी है।जब किसी चीज में भेदभाव नहीं फिर अब क्यों?अगर लड़की अकेले पड़ जाए या कोई मुसीबत आई तो एक आर्थिक सहारा रहेगा उसके पास।

पल्लवी आनंद

अगर बेटियों  को माता -पिता की सम्पत्ति में वारिस बनाना है तो‌, बेटा और बेटी में माता -पिता की जिम्मेदारियों का भी बराबरी में हिस्सा होना चाहिए।ये नहीं की माता पिता सिर्फ बेटों की ही जिम्मेदारी हैं।

सुमिता शर्मा

मेरे विचार से तो माता पिता को ही बच्चों को ये समानता से दें,और उनमें ये समझ  विकसित करें कि वो एक दूसरे का साथ वैसे ही दें जैसे पहले देते थे।
बिल्कुल मिलना चाहिए बराबर ,मैं भी इसी पैटर्न पर चलती हूँ कभी नहीं कहती बेटे से कि दीदी की शादी के बात सब तेरा होगा।

अनु गुप्ता

जी हां हिस्सा भी मिलना चाहिए और जिम्मेदारीभी, जैसे माता-पिता के लिए अपने दोनों बच्चे चाहे वह बेटा हो या बेटी बराबर होते हैं ऐसे ही बच्चों के लिए भी माता-पिता की जिम्मेदारी एक समान होनी चाहिए यह नहीं सोचना चाहिए कि मां-बाप की जिम्मेदारी केवल भाई की है।

मंजू सिंह

बेटियों को भी बेटे के बराबर संपत्ति में हिस्सा देना चाहिए किंतु साथ-साथ जिम्मेदारी में भी उनका हिस्सा होना चाहिए। इसके अतिरिक्त फिर उन्हें दहेज के रूप में धन नहीं देना चाहिए तथा हर त्योहार हर रस्म में मायके से धन और उपहार उतने ही देने चाहिए जितने आसानी से दिए जा सकते हो।

स्नेहलता त्रिपाठी बिष्ट

वैसे तो ये हक माता पिता का है कि वो खुद के द्वारा अर्जित सम्पत्ति को किसे देते है,बेटा, बेटी या अन्य कोई बाहर वाला भी।यदि आप बेटा या बेटी किसी भी रूप में संपत्ति पर अपना हक समझते हैं तो आप उसके लायक तभी माने जाएंगे जब विपरीत परिस्थितियों में आप माता -पिता की मदद कर पाएं,उस समय आप कोई बहाना नहीं बना सकते कि मेरे बच्चो के पेपर हैं या मेरे सॉस ससुर बीमार हैं।ये बात बेटा और बेटी दोनों में लागू होती है ऐसा मेरा मानना है।

बीना टोंक

पिता की सम्पत्ति में बेटियों का हिस्सा होना चाहिए।वैसे माता पिता की जिम्मेदारी दोनों की ही होती है।जिम्मेदारी निबाहना भी फिर दोनों की ही होनी चाहिए।
फिर कोई भी बहाना नही चलेगा...।जिम्मेदारी को प्यार से,सम्मान से निभाये...
जैसे माँ बाप अपने बच्चे को पालते हैं...ऐसे ही वो भी माँ बाप को बच्चे की तरह रखे।
जो भी जिम्मेदारी निभाये...उसी को दे दो।

मधु शुक्ला

बेटी बेटा दोनों एक ही कोख से जब जन्मते हैं। तब उनके अधिकारों के बारे में भिन्नता क्यों हो। दोनों के समान अधिकार और कर्तव्य होने चाहिए।

सुमिता शर्मा

बेटी को लेने के साथ भतीजे भतीजी को देना भी सीखना ज़रूरी है।
कहावत है कि भाई से लो पर भतीजे को दो भी।आपसी प्रेम भी तभी निभता है।लेन देन जब बराबर हो तभी दिल बनता है।
नहीं तो एक दिन सब सिमट जाता है,फिर बराबरी से माता पिता की ज़िम्मेदारी भी ,बहन को निभाने से पीछे नहीं हटना चाहिये।।वह भी अकेले भाई भाभी की ही न हो।

प्रीति गुप्ता

मेरा मानना है कि सबसे बड़ी सम्पत्ति तो संस्कार  है।जो लड़का और लड़की में समान देने चाहिए ।जब विषम परिस्थितियों हो तो पुरा परिवार साथ खड़ा हो।

हेमलता श्रीवास्तव

हां हक तो होना चाहिए लेकिन मुझे ऐसा लगता है कि इससे भाई बहनों के संबंधों में बड़ी भारी दरार आ जाती है इसलिए यह माता पिता पर छोड़ देना चाहिए वह जो चाहे वह करें.।

पारुल बंसल

मेरे हिसाब से बेटियों को तभी मायके की संपत्ति में हिस्सा लेना चाहिए यदि वह आर्थिक रूप से कमजोर है ,अन्यथा नहीं लेना चाहिए।
अगर हिस्सा लेने की आकांक्षा रखती है ,तो मां-बाप की जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए।

विनीता शर्मा

मेरा मानना है ना बेटी ना बेटा जो बुढापे मैं सेवा करे चाहे कोई भी हो उसे सब कुछ मिलना चाहिए या यु कहिये उसे ही दे देनी चाहिए।

सुमन जी
जी जरुर होना चाहिए। माँ बाप के लिए दोनों बच्चे समान हैं लड़का हो या लड़की। बेटा जब माँ बाप को घर से निकल दे तब बेटी ही उनकी हर तरह से मदद करती हैं तो वह जायदाद में हिस्सा क्यूँ नही ले सकती। पुरानी मानसिकता बदलने का समय है अब।बेटियाँ बेटो से बेहतर होती हैं। एक सच्ची कहानी सुनाती हूँ आप सबको।
मेरे एक दूर के मासी जी हैं जब उनकी दूसरी बेटी होने वाली थी उनके पति का देहांत हो गया। उनके दे़वर से उनकी दुसरी शादी की गई पर उसने उनका सब रुपया पैसा हडप कर मासी जी को घर से निकाल दिया और उस आदमी ने कही और शादी करली। मायके वाले अच्छे थे तो उन्होनें मासी जी को अपने पास रख लिया। जब उनकी बेटियाँ बडी हुई तब उनको रहने के लिए अलग से एक घर दिया और कुछ जमीन उनके नाम करवा दी। उसी के सहारे उन्होनें अपनी दोनों बेटियों को पढाया लिखाया और एक बेटी की शादी भी करदी।

अब अगर उनको हिस्सा नहीं और सहारा नहीं मिलता तो वो कैसे तो बच्चों की देखभाल करते और कैसे अपना गुजारा करते। अब इस उम्र में कहा मजदूरी करते। जब इतने साल पहले उनके पापा ने उनको जायदाद में हिस्सा दिया तो अब क्यूँ नहीं।
अब तो सरकार ने नियम कानून भी बहुत बना रखे हैं।

अगर दोनों पक्ष मायका और ससुराल लड़की को ना रखे तो क्या होगा उसका। वह तो दोनों तरफ ही पराई कही जाती हैं। बेटा उसका कौन सा सगा हैं। अगर बेटी से अपना फर्ज बेटों से बेहतर निभा  रही हैं माँ बाप की सेवा कर लही हैं, उनको सहारा दे रही हैं तो कौन सी बुराई हैं उसे हिस्सा देने में। मैं तो गलत नहीं मानती इसको।

और समाज में बहुत ऐसे सज्जन है जो बराबर हिस्सा देते हैं बेटियों को और दिखावा नहीं करते और ना ही शोर मचाते।

क्या भरोसा हैं कि अगर भाई के नाम सब कर दिया तो भविष्य में वह माता पिता को सही ढंग से रखेगा और बहन का मान सम्मान करेगा और भविष्य के सारे फर्ज अदा करेगा।
अगर बेटा ऐसा नहीं कर पाता तो ऐसे भाई से कोर्ट केस कर के अपना हिस्सा लेना चाहिए ताकि उसे भी अहसास हो कि उसने भी गलत किया हैं।

रुचिता वर्मा नारायण
बेटी हो या बेटा दोनो को ही हिस्सा मिले ये सही है  साथ ही जिम्मेदारी और माँ बाप के प्रति कर्तव्य भी भी बटा हो।

सीमा मोमिन खान

अगर बहनें हिस्सा लेती है तो माँ बाप के प्रति बेटी जमाई का भी उतना ही फर्ज होगा जितना बेटा बहु का होता है। मैं इस हिस्सेदारी को सही नहीं मानती क्योंकि इस से भाई बहन के प्यार में दरार आती है। माता पिता की जायदाद का हकदार अगर बेटा होता है तो वही बेटा ताउम्र अपनी बहन के प्रति सारे रीति रिवाज निभाता है। हर साल आने वाले त्यौहार पर मायके से आने वाले उपहार, छुछुक,भात ये सब रस्में भाई द्वारा ही निभाई जाती हैं। और इन रस्मों में भाई के खूब  पैसे खर्च होते हैं। और यदि बहने  हिस्सा मांगती हैं तो फिर भाई को इन रस्मों से आजाद कर देना चाहिए। एक बहन होने के नाते हिस्से से कहीं ज्यादा अहमियत मैं अपने भाई को दूंगी,,,, हर फंक्शन में उसको अपने साथ खड़े देखना चाहूंगी।
लेकिन अगर बहन गरीबी हालत में हो और भाई अच्छे से रह रहा हो तब मदद के लिए भाई को आगे आना चाहिए।

अंशु  श्रीवास्तव सक्सेना

बिलकुल, जब बेटी और बेटे हर तरह से बराबर हैं तो फिर बेटी को हिस्सा मिलना चाहिए, बेटियों को माता पिता की ज़िम्मेदारी बराबरी से उठानी चाहिए ।

आप भी पिंक कॉमरेड की चर्चा में हमेशा अपने विचार सांझा करें 

अन्तिमा सिंह







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