क्या औरतों को खुश रहने का हक नहीं

क्या औरतों को खुश रहने का हक नहीं

"क्या औरत को खुश रहने का हक नहीं"
इस समाज में सदियों से एक परंपरा चली आ रही है, कोई औरत जब भी खुश रहने की कोशिश करती है तब किसी न किसी बहाने उसे नीचा दिखाया जाता है, या तानें उल्हानों से प्रताड़ीत की जाती है। दुनिया को हर परिवर्तन मंज़ूर है सिवाय की औरतों की आज़ादी, किसी भी मामले में औरत ने एक कदम आगे क्या बढ़ना चाहा हर किसीके पेट में चूँक उठती है।

आज-कल एक सेलिब्रिटी चर्चा में है जिसका नाम है मलाइका अरोड़ा, जिसका अपने पति से तलाक हो गया उसके बाद अपनी उम्र से छोटे अर्जुन कपूर के साथ रिलेशनशिप से जुड़ी है। तो क्या गलत है ? आज हर कोई उसे तानें मार रहे है, कितना कुछ सुना रहे है, ट्रोल कर रहे है। आख़िर लोगों की प्रोब्लम क्या है, उसकी अपनी ज़िंदगी है उसे किसके साथ कैसे बितानी है उसे तय करने दो। हर किसीको अपनी खुशियाँ चुनने का हक है। क्या गलत किया मलाइका ने, रिश्ते क्या उम्र के मोहताज होते है जब दो लोग दिल से एक दूसरे से जुड़ते है तो ना उम्र की सीमा देखते है ना जन्मों का बंधन, सिर्फ़ एक दूसरे के प्रति चाहत और प्रेम की चरम देखते है। जहाँ खुशी मिलती है दिल उस तरफ़ झुकता है। पर कितने दोगले विचार है समाज के किसीकी लाइफ़ में लोग इतनी दखल क्यूँ देते है, क्या गलती की है मलाइका ने दो लोग अगर एक दूसरे के साथ अपनी खुशी से जीवन बिताना चाहते है तो लोगों को पेट मैं दर्द क्यूँ होता है। अर्जुन कपूर खुद एक पढ़ा लिखा समझदार लड़का है, वो अपनी ज़िंदगी के निर्णय खुद लेने जितना काबिल है। अगर वो किसीको खुशीयाँ देना चाहता है और वो खुद मलाइका के साथ खुश है तो लोगों को कोई हक नहीं बनता उनकी ज़िंदगी में दखल देने का।
एक औरत जब भी अपनी खुशियाँ चुनती है तो समाज बावला हो जाता है। क्यूँ औरत को खुश रहने का हक नहीं क्या? यही काम जब एक मर्द करता है तो जायज़ होता है। मलाइका के पति अरबाज़ ने भी तलाक के बाद जाॅर्जिया एंड्रियानी के साथ रिश्ता बनाया है, पर वो तो मर्द है ना उसे पूरा हक है क्यूँ उस रिश्ते पर बवाल नहीं होती। 
और कितने मर्द अपनी बेटी की उम्र की लड़की से शादी करके दो बच्चे के बाप बनते है, तब किसीको कोई प्रोब्लम नहीं होती। हर बंदीश सिर्फ़ और सिर्फ़ औरतों के लिए क्यूँ? औरत भी इंसान है ज़िंदगी काटने के लिए उसे भी सहारा चाहिए। कोई विधवा दूसरी शादी करती है उस पर भी लोगों की भौहे तन जाती है, पर अगर कोई मर्द पत्नी की मृत्यु के बाद दूसरी शादी करता है तो वो उसकी जरूरत बन जाती है। आख़िर कब तक ऐसी दोगली मानसिकता का शिकार होते औरतों को अपनी खुशियों से वंचित रहना होगा। धिक्कार है ऐसे दोगले समाज पर, खुद भी जीओ और दूसरों को भी जीने दो औरतों की खुशियों से जलने वालों अब तो हक दो औरतों को अपनी ज़िंदगी अपने तरीके से जीने का।

(भावना ठाकर, बेंगुलूरु)#भावु

What's Your Reaction?

like
1
dislike
0
love
0
funny
0
angry
0
sad
0
wow
0