मां की धड़कन

मां बोलने में एक अक्षर का शब्द है लेकिन जब बोलते हैं तो लगता है इस एक अक्षर वाले शब्द से अनमोल भावनाएं जुड़ी हुई है।  बच्चे के मुंह से मां ,मम्मी ,मम्मा, अम्मा शब्द सुनकर दिल की धड़कनें भी तेज़ होने लगती है। कोई भी औरत जब पहली बार मां बनती है , अपने बच्चे का स्पर्श पाकर वो अपने दिल और दिमाग दोनों में एक सुखद एहसास को अनुभव करती है।कभी कभी ऐसा लगता है मां के दिल में अपने बच्चों के लिए अलग ही धड़कन है जो अपने बच्चों के एहसास से धड़कता है।

अपने बच्चे के जन्म के साथ ही मां भावनाओं से ओत-प्रोत हो जाती है। बच्चे के जन्म से , रोने , हंसने , चलने , दांत निकलना जैसी शारीरिक विकास मां के लिए यादगार बन जाती है। 

पर कुछ एहसास ऐसे होते हैं जिसे याद कर मन में पीड़ा होती है और दिल की धड़कन और भी तेज हो जाती है।एक ऐसी ही घटना का जिक्र मैं कर रही हूं।

मेरी दो प्यारी प्यारी बेटियां हैं। ये बात तब की है जब मेरी छोटी बेटी ग्यारह महीने की थी।शाम का समय था मेरे पति बड़ी बेटी को लेकर पार्क गए थे और मैं रात का खाना बनाने की तैयारी में लगी थी। छोटी बेटी को रसोई के पास बैठाकर मैंने उसके सारे खिलौने वहीं रख दिए। उन खिलौनों में मैगनेटिक डार्ट था (डार्ट बोर्ड जो बड़ी बेटी का था) डार्ट का पिछला हिस्सा निकल गया था और आगे के हिस्से में मैग्नेट लगा था और मेरी नज़र उस पर नहीं गई थी।बेटी सारे खिलौनों को छोड़ उस डार्ट से खेलते हुए उसे मुंह में ले लिया था। मेरा दिल धक सा हो गया था मैं दौडती हुई गई और उसके मुंह से डार्ट निकालने की कोशिश करने लगी । डार्ट निकलने के बजाय उसके मुंह के अंदर चला गया ।मै चिल्ला चिल्ला कर रोने लगी और रोते हुए फटाफट नीचे उतरी और रिक्शा पकड़ डॉक्टर अशोक के क्लीनिक पहुंची जो उस समय दिल्ली के पटपड़गंज मैक्स हॉस्पिटल में बच्चों के डॉक्टर थे। मैंने वहीं से अपने पति को भी फोन कर दिया था। डॉक्टर अशोक के सलाह पर हम उसी समय मैक्स हॉस्पिटल गए , जहां डॉक्टर ने उसे इमरजेंसी में भर्ती कर लिया था। डॉक्टर ने कहा कि डार्ट सिने के पास है इससे पहले की वो नीचे की तरफ चला जाए इसको इंडोस्कोपी द्वारा निकाल देंगे। चूंकि डार्ट में मैग्नेट था और मेटल की वज़ह से अंदरूनी कोई और समस्या ना हो इसलिए डॉक्टर भी कोई रिस्क नहीं लेना चाहते थे। बेटी के भर्ती होने के बाद मैं अपने आप को कोस रही थी , मुझे अपने ऊपर गुस्सा आ रहा था। ऐसा लग रहा था मैंने ध्यान नहीं दिया इसलिए ये सब मेरी नन्ही सी जान के साथ हुआ। दिल में डर भी की कहीं....मै बात को पूरी नहीं कर पाऊंगी...आधे घंटे बाद डॉकटर आए और उन्होंने हमें डार्ट दिखाते हुए कहा... हमने डार्ट निकाल दिया है अब आपकी बेटी बिल्कुल ठीक है। फिर भी हम उसे 24 घंटे के लिए अपनी निगरानी में रखेंगे। डॉक्टर की बात सुनकर मैं पति के गले लग रोने लगी ,उनकी आंखो में भी आंसू थे पर खुशी के। मै अपनी बेटी के पास गई और उसको एक टक देखती रही,उस दिन खोने और पाने के एहसास से एक मां पर क्या बीती थी वो मैं आपको शायद नहीं बता पाऊंगी। उन एहसासों में मैं बस पाने के एहसास को अनुभव करना चाहती थी। मां बन कर बच्चों के प्रति मां की जिम्मेदारियां कभी खत्म नही होती, बच्चे बड़े हो या छोटे बच्चे हर वक्त मां के दिल में रहकर उसकी धड़कन बनकर धड़कते हैं।

#मातृत्व

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