मैं फिर से अपना बचपन जीना चाहती हूं..!

मैं फिर से अपना बचपन जीना चाहती हूं..!

नन्ही सी कली अपने आंगन में खिलाना चाहती हूं ..
मैं फिर से अपना बचपन जीना चाहती हूं..!

मेरी मां ने दिया मुझे जो अपार प्यार वह संस्कार वही प्यार संस्कार अपनी लाडो को देना चाहती  हूं ...
मैं फिर से अपना बचपन जीना चाहती हूं..!

मेरी "मां" है ममता की मूरत..
मां ही मेरी पूजा मां ही मेरी भगवान..
दुनिया में सबसे अनमोल है मेरे लिए मेरी "मां"...
मैं भी "मां" की तरह एक अच्छी मां बनना चाहती हूं...
मै फिर से अपना बचपन जीना चाहती हूं...!

हर किसी की किस्मत में नहीं होती है बेटियां...
क्योंकि भगवान भी बड़े दिल वालों को देता है बेटियां..
बेटियों से लगता है "आंगन हरा भरा"..
"तीज त्योहार लगे सबसे न्यारा"..
मैं भी मेरी लाडो के साथ "तीज त्योहार में सज धज कर घर आंगन में रौनक लाना चाहती हूं"..
मैं फिर से अपना बचपन जीना चाहती हूं...!

छोटी सी नन्ही सी परी जल्द ही हो जाती है बड़ी...
उसकी नटखट अदाओं से घर का आंगन लगे खिला-खिला...
चले जब वह ठुमक -ठुमक ... पायलों की आवाज आए छन छन मेरा दिल हर पल उसके लिए धड़के धक-धक....
मैं फिर से अपना बचपन जीना चाहती हूं न..!

नो महीनों का वो खूबसूरत एहसास ...
"नो देवियों के आशीर्वाद स्वरुप मैं अपने कोख में नन्ही सी जान को पालना चाहती हूं..
मैं फिर से अपना बचपन जीना चाहती हूं...!

अगले बरस मेरी गोद में भी आए नन्ही सी कली ...
इतना सबसे आशीर्वाद चाहती हूं...
में भी मेरी परछाई इस दुनिया में लाना चाहती हूं..
उसके साथ रंग बिरंगी जीवन का हर क्षण जीना चाहती हूं..
मैं फिर से अपना बचपन जीना चाहती हूं....!!

#डियरबेटी

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