मासूम बचपन

मासूम बचपन

प्यारी गुलाबी सहेलियों मेरी कहानी पढ़ कर

अपनी राय से मेरा मार्गदर्शन करें.

बहुत मुश्किल हो रहा था, मासूम सुरभि के लिए समझना कि माँ उसे क्यों कह रही है चुप रहने को.

तेरह वर्ष की सुरभि बेहद सहमी हुई थी, फिर भी उसने माँ को सब सच बता दिया था.

चाचा की शादी थी, सुरभि के कितनी खुशथी . सारे घर की लाडली सुरभि, बड़े चाव से एक से बढ़कर एक कपड़े लिए थे उसने शादी के लिए. चाचा की बारात मे बहुत मस्ती की, खूब नाचा गाया. फेरों के समय तक बहुत थक गई थी सुरभि, तो माँ नेकहा जा के आराम करो ऊपर कमरे मे जा, कर सो जाओ.

लेकिन उस मासूम को क्या बता था, रात उसके साथ क्या होने वाला है? सुबह जब उसकी आँख खुली तो उसके तनपर कोई
कपड़ा नही था, कांप गई थी वो, साथ मे बील्डिंग".जैसे तैसे हिम्मत कर उसने कपड़े पहने और अपनी माँ से हर बात बताई.
इस पर माँ ने सख्ती से चुप रहने को कहा
उसे.और साथ ही हिदायत दी कि इस बात का किसी से जिक्र भी ना करे.

क्या सुरभि की माँ ने सही किया?ऐसी मानसिकता के चलते ही वहशी औरदरिंदो को शह मिलती है.
ये कैसी चुप्पी
घुट कर रह गई उसकी चीत्कारें
आंसुओं के समन्दर को उसने
थाम लिया,
खो गया उसका बचपन,
धाराशायी हुआ मन,
माँ ही ना सुन सकी
बिटिया की खामोश
सिसकियाँ,
रोम रोम उसका दहशत
मे है,
क्यों मिली ये सजा उसे
कसूर उसका था क्या?
स पर जुल्म ये
चुप्पी रखना, जो
हुआ सो हुआ किसी से ना कहना

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