मातृत्व

मातृत्व

"11अप्रैल world motherhood day पर सभी माताओं को शुभकामनाएँ" 
माँ शब्द का मायना एक बच्चे की आँखों में बखूबी परिभाषित होता है। और मातृत्व की चरम एक माँ के रोम-रोम में नखशिख उजागर होती है। माँ संसार रथ की धुरी है। जिस महिला की गोद सूनी होती है उससे बेहतर मातृत्व को कोई समझ नहीं पाएगा, और जिस बच्चे की माँ नहीं होती उसकी ज़िंदगी माँ की अहमियत को समझाएगी। माँ बनना एक औरत को पूर्ण बनाता है। शादी के बाद जब तक मातृत्व का सुख प्राप्त नहीं होता हर स्त्री खुद को अधूरी महसूस करती है।
जैसे ही पता चलता है की कोख में एक जीव पल रहा है तब से स्त्री की ज़िंदगी में एक बदलाव आ जाता है। गर्भावस्था की शुरुआत के साथ ही स्त्री अपनी आंतरिक शक्ति को जागृत करती हैं। इस दौरान आपको अपना पूरा खयाल रखना होता है खान-पान, रहन-सहन और सुविचारित सोच से खुद को सक्षम बनाना है ताकि आपके गर्भ में पल रहा शिशु जन्म लेने के बाद स्वस्थ रहे, और बाहरी दुनिया की सभी परिस्थितियों से लड़ने में सक्षम हो सके। इस अवस्था के लिए एक आयुर्वेदिक प्रक्रिया है ‘गर्भधान संस्कार’ 
हर माता-पिता अपने बच्चे के लिए सर्वोत्तम ही चाहते हैं। एक स्वस्थ गर्भावस्था जन्म के बाद भी बच्चे के अच्छे स्वास्थ्य को सुनिश्चित करती है। बच्चे के मानसिक व शारीरिक विकास के लिए गर्भ संस्कार जरूरी है।
गर्भ संस्कार का उल्लेख प्राचीन काल से होता आया है और यह आयुर्वेद का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। गर्भ संस्कृत का एक शब्द है जिसका तात्पर्य गर्भ में पल रहे शिशु से है और संस्कार का मतलब है मानसिक विद्या। इसलिए गर्भ संस्कार अजन्मे बच्चे की मानसिक विद्या की प्रक्रिया को अनुवादित करता है। पारंपरिक रूप से यह माना जाता है कि बच्चे का मानसिक व शारीरिक विकास गर्भ में शुरू हो जाता है क्योंकि एक माँ के गर्भ में पल रहा बच्चा उसकी भावनात्मक स्थिति से प्रभावित होता है। यह प्रक्रिया हिन्दू संस्कृति का एक भाग है जैसा कि पौराणिक समय की कुछ कथाएं यह बताती हैं। अभिमन्यु, अष्टावक्र और प्रह्लाद के उदाहरण हैं, जिन्होंने अपनी माँ के गर्भ में ही शिक्षा प्राप्त कर ली थी।
आधुनिक शिक्षा ने यह सिद्ध किया है कि गर्भ में पल रहा शिशु बाहरी उत्तेजना पर प्रतिक्रिया करता है। यहाँ तक कि एक माँ के विचारों से उत्तेजित हॉर्मोनल स्राव भी गर्भ में पल रहे शिशु पर प्रभाव डालता है।
गर्भ संस्कार कब शुरू किया जाता है: 
गर्भ संस्कार सिर्फ गर्भावस्था के दौरान देखभाल के लिए नहीं है किन्तु इसकी तैयारी गर्भधारण करने से लगभग 1 वर्ष पहले ही शुरू हो जाती है। गर्भ संस्कार में गर्भावस्था से पहले, गर्भावस्था के दौरान और यहाँ तक कि स्तनपान की अवधि भी शामिल होती है। 
गर्भावस्था के समय गर्भवती महिलाओं को कुछ खास बातों पर ध्यान रखना चाहिए जैसै स्वस्थ आहार का सेवन अपने खानपान से जच्चा-बच्चा दोनों की सेहत को ध्यान में रखते हुए डाॅक्टर की सलाह अनुसार लेना चाहिए। साथ में 
सकारात्मक सोच हिम्मत और हौसला रखते नौ महीने खुद का खयाल रखना है। योगाभ्यास या कुछ हल्के व्यायाम करके शरीर को तैयार करना चाहिए और
ध्यान प्रार्थना से मन को शांत रखते मातृत्व के एक-एक पल का अनुभव करना एक माँ के लिए दुनिया की हर खुशी से कई ज़्यादा मायने रखता है।
शांतिदायक संगीत सुनें गर्भस्थ बच्चा माँ की हर क्रिया को महसूस करता है। स्वाद, सुगंध, रस, संगीत और यहाँ तक की माँ के मनोभाव भी, तो पेट से ही माँ और शिशु के बीच एक सामंजस्य का सेतु रच सकता है।
भले बच्चा पेट में हो उससे बातें करें, यहाँ तक कि पिता भी शिशु से बातें करके उसे अपनी आवाज से परिचित करवाएं, उसे बताएं कि आप उसे अपने जीवन में पाकर कितनी खुश हैं। और उसे बताएं कि आप कितनी व्याकुल हैं उसे देखने व उसे छूने के लिए।
सकारात्मक रहना आवश्यक है, इस दौरान अपने तनाव और बुरे विचारों को त्याग दें। माँ के मनोभावों का सीधा असर पड़ता है बच्चे के विकास पर। अगर माँ अवसाद ग्रस्त रहेगी तो उसकी असर सीधी बच्चे पर पड़ेगी। ये तबक्का बहुत ही संवेदनशील होता है गर्भावस्था में महिला का तनाव में रहना गर्भपात का खतरा बढ़ा देता है।
घर का ज्यादा काम ना करें, कोशिश करें कि अपने लिए कुछ खास वक्त निकालें। खाली वक्त में आप किताबें पढ़ सकती हैं या आराम कर सकती हैं।
अगर आप कामकाजी महिला हैं तो औफिस से छुट्टी लें और घर पर आराम कर अपना वक्त बिताएं।

सुबह शाम सैर पर नियमित जाएं, रात में जल्दी सोने की आदत डाल लें, आपके बच्चे के लिए ये बेहद जरूरी है। इस दौरान अगर लोग आपको कुछ कहते भी हैं तो उन्हें अनसुना कर दिया करें।
लाख कोशिशों के बाद भी आप तनाव से दूर नहीं हो पा रही हैं तो बेहतर है कि आप किसी डाक्टर या थेरेपिस्ट से संपर्क करें।
डाॅक्टर से सलाह मशवरा करके छुट्टियां लेकर किसी बेहतर जगह पर घूमने जाना भी आपके लिए एक बेहतर विकल्प है।

यदि आप मानसिक रूप से शांत महसूस नहीं कर पा रही हैं तो छुट्टियों में कहीं घूमने जाएं। आज कल बेबीमून बहुत लोकप्रिय हो रहा है। जैसे शादी के बाद कपल्स हनीमून पर जाते है, वैसे ही बच्चे के जन्म से पहले कपल्स क्वालिटी टाइम बिताने के लिए बेबीमून प्लान करते है। इस दौरान गर्भवती मां को थोड़ा रेस्ट मिल जाता है और पति को भी पत्नी की देखभाल कर उन्हें स्पेशल फील कराने का मौका मिल जाता है। तो कुल मिलाकर बिना घबराए सारी बातों को समझते मातृत्व का आनंद ऊठाए।

(भावना ठाकर, बेंगुलूरु)#भावु

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