मेहरानगढ़ जोधपुर का किला

मेहरानगढ़ जोधपुर का किला

जोधपुर राजस्थान का दूसरा सबसे बड़ा नगर है. जोधपुर अपने नीले घरों के लिए जाना जाता है इसीलिए इसे ब्लू सिटी भी कहा जाता है.
 ऐसे तो जोधपुर में आपको बहुत से घूमने की स्थान मिलेंगे,पर  मैं आपको  हमारे जोधपुर का किला मेहरानगढ़ के बारे में बताना चाहूंगी.
राजस्थान के प्रसिद्ध किलो में से मेहरानगढ़ का महत्वपूर्ण स्थान है. यह किला देश के सबसे बड़े किलो में से एक है और 410 फीट ऊंची पहाड़ी की चोटी पर स्थित है.
यह शानदार किला राव जोधा द्वारा 1459 ई0 में बनाया गया था।
चिड़ियाटुंक नामक पहाड़ी जो योगी चिड़ियानाथ के नाम पर, जिसका स्थान आज भी किले के पीछे विद्यमान हैं, पर किले की नीव रखी गई.
ऐसी मान्यता है कि किले की नींव में राजिया नामक व्यक्ति को जिन्दा दफन किया था.
यह भारत के समृद्धिशाली अतीत का प्रतीक है. यह किला प्राचीन कला, वैभव, शक्ति, साहस, त्याग और स्थापत्य का अनूठा नमूना है.

"यह दुर्ग मयूर की आकृति में बना होने के कारण इससे मेहरानगढ़ के नाम से जाना जाता है".

मेहरानगढ़ किला विशाल दीवारों द्वारा संरक्षित है जहां पर कई तरह की हॉलीवुड और बॉलीवुड की शूटिंग हुई है जिनमें से-- हम साथ साथ हैं, द लॉयन किंग, ठग्स ऑफ हिंदुस्तान फिल्मों के नाम शामिल है.
इस किले में सात द्वार हैं.
 प्रत्येक गेट राजा के किसी युद्ध में जीत पर स्मारक के रूप में बनवाया गया था. किले के अंदर मोती महल, शीश महल चामुंडा देवी का मंदिर और म्यूजियम इस किले के अंदर ही है यहां का जो म्यूजियम है वो राजस्थान के सबसे अच्छे म्यूजियम में से माना जाता है.
राव जोधा जी ने 1460 ई.में इस किले के नजदीक एक चामुंडा माता के मंदिर का निर्माण करवाया था वहां मूर्ति की स्थापना की चामुंडा माता को जोधपुर के शासकों की कुलदेवी माना जाता है.
हर नवरात्रि में कूल देवी की पूजा अर्चना की जाती है हजारों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं.
इस किले के लिए कहा जाता है कि "1965 में भारत पाक के युद्ध में सबसे पहले मेहरानगढ़ के किले को टारगेट किया गया था लेकिन माना जाता है कि माता की कृपा से यहां किसी का बाल भी बांका नहीं हुआ".
मैं आशा करती हूं  कि यह लेख देखकर आपको जोधपुर का मेहरानगढ़ किला घूमने की इच्छा जरूर होगी... पधारो म्हारे देश खम्मा घणी सा

#मेरे शहर की पहचान 

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