मेरी गर्भावस्था के दिन

मेरी गर्भावस्था के दिन

'माँ'..शब्द स्वयं में ही सम्पूर्ण है।माँ बनने का एहसास भी सिर्फ़ माँ बनकर ही जाना जा सकता है।मेरी शादी तीन वर्ष पूर्व 28 फरवरी सन् 2017 को हुई थी।

शादी के बाद 11 मार्च को होली थी।पहली बार ससुराल की पिया संग होली थी।मेरी शादी मारवाड़ी फैमली में हुई है और मारवाड़ियों का प्रसिद्ध पर्व होता है-गणगौर जो की धुलेड़ी(होली) से होकर नवरात्रि के तीज तक चलता है मतलब सोलह दिन का त्यौहार।मैं पीरियड हमेशा डेट से हफ्ते भर पहले होती हूँ।शादी से पहले 21फरवरी को हुई थी।मैं 15 मार्च को पीरियड का इंतजार था पर जब 21 मार्च भी निकल गई तब मुझे कुछ गड़बड़ लगने लगा कुछ तो है।

28 मार्च को गणगौर की पूजा हो रही थी और मुझे बहुत घबड़ाहट हो रही थी।पूजा में मौसी सास और उनकी बहु भी आई थी।उनको खाना खिलाने के लिए हालांकि सासूमां और नंद बना रही थी।किचन में घुसते ही मुझे और घबड़ाहट बढ़ गई।चक्कर लग रहा था और ऊपर कोलकाता का उमस वाला मौसम,मैैंं तो बस मना रही थी।उनके जातेे ही मैंने सााड़ी बदल कर आरामदायक कपड़े पहन लिए।सासूमाँ बोली-"खाना खा लो।मैंने कह-नहींं मम्मी मुझे कुछ अच्छा नहीं लग रहा।कहीं प्रेग्नेंट तो नहीं हो गई।जी घबड़ा रहा है।डेट दस दिन ऊपर गई ऐसा कभी नहीं हुआ।

सासूमां ने पूछा तुम्हारी डेट क्या है?मैंने उन्हें बताया शादी के पहले इस तारीख को ही हुई थी।बोलींं एक बार डॉक्टर को दिखा देते है।शाम को हम डॉक्टर के पास गये उन्होंने यूरिन टेस्ट को कहा।अगले दिन मेरे यूरिन को पैथोलॉजी में जाँच कराया और रिपोर्ट मेरे ससुर जी ने हाथ में दी और बोले शाम डॉक्टर को यह रिपोर्ट डॉक्टर को दिखानी है क्या बताती है।रिपोर्ट को मैंने खोला तो डॉक्टरी भाषा तो समझ नहीं आई पर इतना समझ आया पॉजिटिव।मतलब मैं कन्फर्म प्रेग्नेंट थी और शाम को डॉक्टर ने इस बात पर मुहर भी लगा दी कि आप वन मंथ प्रेग्नेंट हूँ।

मैं शादी के तुरंत बाद प्रेग्नेंट कुछ हजम नहीं कर पा रही थी।अजीब सी कशमकश थी शादी कोएक महीना हुआ है और मैं प्रेग्नेंट।शुरू के तीन महीने पता ही नहीं पड़ा,कोलकाता घूमने में निकल गया।डॉक्टर ने आउट ऑफ स्टेशन जााने को मना किया था।मेरे पति मेरा ध्यान रखने लगे थे।एक दिन मेरी नंद की ऐनीबर्सरी थी मैं और पति होटल गये थे और वहां से लौटते वक्त बहुत उल्टियां हो रही थीं और उस वक्त पति ने बहुत संभाला।

मेरी गर्भावस्था के सिम्टम्स और महिलाओं से बिल्कुल अलग थे जो जो सुना था कि खट्टा खाने का मन करता है पर मुझे खट्टे से एक एलर्जी हो गई थी।कभी बाजार जाते गोलगप्पे की दुकान दिखती मैं एकदम मना कर देती यहाँ तक की गोलगप्पे देखकर ही उल्टी शुरू हो जाती थी।इसका शायद ये भी कारण हो सकता है।कोलकाता के गोलगप्पे और वृन्दावन के गोलगप्पे के पानी में अंतर।मैं बैलेंस डाइट लेने लगी थी।खाने में फ्रूट्स,भीगे बादाम,दूध की मात्रा बढ़ा दी थी।मैं बच्चों से सम्बंधित किताब, नेट में आर्टिकल पढ़ने लगी।कुुछ अपनी बहन,मम्मी, सास और नंद से सलाह लेने लगी।मेरी नंद नेे गाउन बनबा दिए जिन्हें मैैं पहनकर बाहर जाती थी।

चौथे महीने मेरा बेबी बंप बढ़ने लगा।मैंं अपने बढ़े पेट को शीशे को बार बार शीशे में देखती कि गर्भावस्था भी कितनी अनमोल है।डॉक्टर से सलाह लेकर पांचवे महीने अपने मायके शादी के बाद पहली बार जा रही थी।डबल खुशी थी।छठे महीने में मुझे अचानक से सीने के बीचोंबीच दर्द रहने लगा।दर्द इतना तेज था कि मैं बर्दाश्त नहीं कर पाती थी।इतना दर्द मैं बेबी बंप बढ़ने से नहींं होती थी जितना सीने में उठने वाले दर्द से होती थी।सवा महीने रुकने के बाद में कोलकाता वापिस आ गई।

शादी के बाद पहली बार यहां की दुर्गा पंडाल देखे,मेरे पति संभाल संभाल कर पंडाल दिखाने ले जाते।फिर दिवाली आ गई।भाईदूज से मेरा नवां महीना शुरू हो चुका था।और मेरे सीने के बीचोंबीच का दर्द बढ़ता ही जा रहा था।अगले दिन डॉक्टर को दिखाया ईसीजी कराया पर रिपोर्ट सब सही थी।इस महीने बस यह इंतजार था कब मेरा बच्चा मेरे हाथों में आये।

डॉक्टर ने 21नबम्बर के बाद.की तारीख दी थी।डिलीवरी भी बोला था आप चाहें तो नॉर्मल करवाइये या सी-सेक्शन।आखिरकार घर में सभी का फैसला सी-सेक्शन का था।मैं भी इसी पक्ष में थी।आखिरकार बिहार पंचमी 23नवम्बर को मेरी बेटी ऑपरेशन से हुई।डॉक्टर ने मेरी बेटी को दिखाया।अपनी बेटी को.देखकर मैंने उसके माथे को चूमा।

सभी को यह खबर दी गई।ससुर जी ने अपनी बहनों को शगुन दिया, रुपये दिए।सभी के घर मिठाइयाँ बँटबाई और चालीस दिन बाद घड़ा पूजन ,हवन ,नामकरण संस्कार हुआ।

मैं खुश थी कि जहाँ आज भी लोग लड़की होने पर रोते हैं,मातम मनाते हैं वहीं आज हमारे घर में बेटी होने पर पार्टी रखी गई जिसमें सभी को बुलाया गया और सभी ने खूब आशिर्वाद दिया।माँ होने के नाते मेरा जीवन है मेरी बेटी।घर में सबकी दुलारी है।बस बिहारी जी से यही प्रार्थना है कि मेरी बेटी को बहुत आशीष दें ।वह एक कामयाब इंसान बने।

आपकी अपनी

राधा गुप्ता'वृन्दावनी'

#MyFirstPregnancy

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