मेरी बहू अशुभ नहीं है

हलवाई अच्छे-अच्छे पकवान बना रहे हैं।ढोल के थाप पर शगुन के गीत बज रहे हैं।डेढ़ साल का चीन्टू भी अपनी बुआ राशि के मेहंदी में मस्त हो कर नाच रहा है

मेरी बहू अशुभ नहीं है

सब तरफ खुशी का माहौल है,पूरा घर गेंदे के फूलों से सजा हुआ है।हलवाई अच्छे-अच्छे पकवान बना रहे हैं।ढोल के थाप पर शगुन के गीत बज रहे हैं।डेढ़ साल का चीन्टू भी अपनी बुआ राशि के मेहंदी में मस्त हो कर नाच रहा है।

रीमा और मोहन जी की बेटी की शादी में सभी मेहमान आ चुके थे।आज मेहंदी की रस्म है।उनकी बहू काजल सभी रिश्तेदारों के साथ शादी के इन्तजाम की भी जिम्मेदारी बहुत अच्छे से निभा रही थी।लेकिन वहाँ कोई था,जिसे काजल का इस तरह सभी रस्मों में हाथ लगाना रास नहीं आ रहा था।वह थी रीमा की बड़ी बहन सीमा,  राशि की बड़ी मौसी।

तभी कही से आवाज आयी कि मेहंदी की रस्म शुरु करनी है,पहले भाभी आकर शगुन की मेहंदी लगाये।रीमा ने काजल को शगुन करने के लिए बुलाया।जैसे ही काजल ने मेहंदी लगाने के लिए राशि का हाथ लिया।बड़ी मौसी जोर से रीमा पर चिल्लायी,"दिमाग खराब हो गया है छोटी,अपनी बेटी की शगुन की मेहंदी एक विधवा से लगवायेगी।जब से आयी देख रही हूँ,सभी शुभ काम में अपने हाथ लगा रही है"।

रीमा तुरंत सीमा से बोली-"दीदी आप सोच समझ कर काजल बहू के बारें में बोलियेगा"

"देख छोटी,तू मुझे गलत समझ रही है।शादी का घर है,इसलिए ही बोल रही हूँ तूझे अपनी अपशगुनी बहू को शादी के रस्मों से दूर रखना चाहिए।खैर,अब कोशिश करना कि शुभ काम में बहू की अशुभ परछाई भी न पड़े"-सीमा बोली

"बस दीदी,कम से कम उसको अपशगुनी और अशुभ मत बोलो,वो हमारी वजह से ही अपने माँ-पापा के पास भी नही गयी,चीन्टू हम सब से दूर न हो जाये उसने हमारे साथ रहना स्वीकार किया और आप उसको अपशगुनी बोल रही है"-रीमा ने दर्द से कहा

"अपशगुनी न कहूँ,तो क्या कहूँ।शादी के तीन साल के बाद ही अपने पति को खा गयी,ऐसी औरतें ....."सीमा कहते-कहते रुक गयी

"बस दीदी,बहुत बोल लिया।सिर्फ बहू क्यों??तब तो
मेरा पूरा परिवार ही अशुभ है।मैनें और मोहन ने अपना जवान बेटा खोया,क्या हम दोनों अशुभ नही है।काजल का अपने पति से मात्र तीन साल का बन्धन था।सिर्फ इसलिये वह उम्र भर अशुभ और अपशगुनी के कलंक का बोझ सहेगी।फिर मेरा अपने बेटे से 26 साल का साथ था।राशि का अपने भाई से 20 साल का रिश्ता था।हम सब के अशुभ की पराकाष्ठा कैसे गिनोगी।अगर हमारी बहू अशुभ है तो उसका पूरा ससुराल अशुभ है" रीमा अपने आँसू पोछते हुए बोली।

आज भी रीमा को अच्छे से याद है कि काजल के मम्मी और पापा उसको और चीन्टू को अपने साथ ले जाना चाहते थे,लेकिन काजल नही गयी।उसने यही कहा कि अगर मैनें अपना पति खोया है,तो सासूमाँ और पिताजी ने अपना जवान बेटा खोया है।अब उनके पोते को उनसे दूर ले जाकर और दुखी नही कर सकती।

काजल अपना दर्द समेट कर वहाँ से जाने लगती हैं,तभी  राशि हाथ पकड़ लेती है,"कहाँ जा रही हो भाभी,अगर आप शगुन की मेहंदी मेरे हाथों में नहीं लगायेंगी। तो मैं मेहंदी ही नहीं लगवाऊँगी"

रीमा हाथ जोड़ कर सभी मेहमानों से कहती है," अगर किसी को मेरी काजल बहू की शादी में उपस्थिति खल रही है,वह जा सकता है।आप पढ़े-लिखे संकीर्ण विचारों की वजह से मैं अपनी बहू के मान-सम्मान को कलंकीत नहीं होने दूँगी"।

काजल अपनी सास का यह रूप देखकर दंग हो गयी और दौड़ कर अपनी सासूमाँ नहीं..नहीं अपनी माँ के गले लग गयी।

ये कैसी बिडंबना है,औरत ही औरत की दुश्मन बन जाती हैं।अशुभ,अपशगुनी न जाने कैसें गलत विचारों से हम घिर जाते हैं।रीमा जैसी सोच से ही समाज में बदलाव आयेगा ।आपके क्या विचार हैं,जरुर बताईयेगा।

अर्पणा जायसवाल 

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