मेरी प्रिय लेखिका - महादेवी वर्मा

महादेव जी की प्रारंभिक शिक्षा इंदौर के मिशन स्कूल से प्रारंभ हुई। संस्कृत,अंग्रेजी, संगीत व चित्रकला की शिक्षा उन्हें अध्यापकों द्वारा घर पर ही दी जाती थी। महादेवी वर्मा जी का बाल विवाह हुआ था, पर शिक्षा उनकी अनवरत जारी रही।

मेरी प्रिय लेखिका - महादेवी वर्मा

महादेवी वर्मा मेरी प्रिय लेखिकाओं में से एक है। महादेवी जी का जन्म 26 मार्च 1907 को फर्रुखाबाद उत्तर प्रदेश भारत में हुआ। इनके परिवार में बहुत समय बाद इनके रूप में पुत्री का जन्म हुआ था, तो इनको घर की देवी मानते हुए, इनके दादा जी ने इनका नाम महादेवी रखा।

महादेव जी की प्रारंभिक शिक्षा इंदौर के मिशन स्कूल से प्रारंभ हुई। संस्कृत,अंग्रेजी, संगीत व चित्रकला की शिक्षा उन्हें अध्यापकों द्वारा घर पर ही दी जाती थी। महादेवी वर्मा जी का बाल विवाह हुआ था, पर शिक्षा उनकी अनवरत जारी रही।

कहानियां व कविताओं का उन्हें बहुत शौक था। वे 7 वर्ष की उम्र से ही कविता लिखने लगी थी। जब उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की तब तक ये एक सफल व प्रसिद्ध कवयित्री के रूप में प्रसिद्ध हो चुकी थी।

महादेवी वर्मा जी व सुभद्रा कुमारी चौहान जी दोनों एक ही कॉलेज में थी और दोनों में घनिष्ठ मित्रता थी। सुमित्रानंदन पंत जी एवं निराला जी दोनों ही महादेवी वर्मा जी के मानस बंधुओं में से थे।

महादेवी वर्मा जी हिंदी साहित्य में छायावादी युग के चार स्तंभों में से एक मानी जाती है। आधुनिक हिंदी की सबसे सशक्त कवयित्रियों में से एक होने के कारण उन्हें आधुनिक मीरा के नाम से भी जाना जाता है।

महादेवी जी ने समाज मे काम करते हुए भारत के भीतर विद्यमान हाहाकाररूदन को देखा, परखा और दुखी होकर समाज में व्याप्त अंधकार को करूनता से दूर करने की कोशिश की। उनके काव्य, उनके समाज सुधार के कार्य व महिलाओं के प्रति चेतना की भावना ने समाज को बहुत प्रभावित किया। लोगों के मन की पीड़ा को उन्होंने अपने काव्य में इतने इतने स्नेह और श्रंगार से सजाया कि वह जन-जन की पीड़ा के रूप में स्थापित हुई।

महादेवी जी ने अनेकों कविता संग्रह लिखे,  जिनमें  निहार, रश्मी, नीरजा व सांध्यगीत प्रमुख है। और बहुत से गद्य साहित्य भी लिखे हैं जैसे - अतीत के चलचित्र, स्मृति की रेखाएं, पथ के साथी, मेरा परिवार, श्रृंखला की कड़ियां गिल्लू प्रमुख हैं। 11 सितंबर 1987 को इलाहाबाद उत्तर प्रदेश में उनकी मृत्यु हो गई थी। उनको बहुत से सम्मान प्राप्त थे, पद्मभूषण, ज्ञानपीठ पुरस्कार व पद्म विभूषण आदि

आपकी सखी
© पुष्पा श्रीवास्तव

#इतिहास_के_पन्नों_से_मेरी_मनपसंद _लेखिका

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