महादेवी वर्मा की एक मार्मिक कहानी गौरा गाय

महादेवी वर्मा की एक मार्मिक कहानी गौरा गाय

  #पुस्तकें मेरी गुरु

इंसान आदिकाल से लिखता आ रहा है। विभिन्न लेखकों द्वारा विभिन्न विषयों पर कई किताबें लिखी गई हैं। ये पुस्तकें ज्ञान का एक भंडार हैं। वे हमें अतीत से परिचित कराती हैं, हमें भविष्य के प्रति सचेत करती हैं, और वर्तमान समय को जीने में हमारी मदद करती हैं।
       पढ़ने में हर व्यक्ति की अलग सोच होती है। 
गौरा गाय ,महादेवी वर्मा की एक महत्वपूर्ण कहानी है . इसका कथानक एक ऐसी गाय से सम्बद्ध है जो बछिया के रूप में लेखिका को उसकी छोटी बहन श्यामा से प्राप्त हुई है । 
बहिन ने एक दिन कहा, तुम इतने पशु-पक्षी पाला करती हो-एक गाय क्यों नहीं पाल लेती।
गाय जब मेरे घर आयी, तब मेरे परिचितों में श्रद्धा का ज्वार-सा उमड़ आया। उसे गुलाबों की माला पहनायी, केशर-रोली का बड़ा-सा टीका लगाया गया, घी का दिया जलाकर आरती उतारी गई और उसे दही-पेड़ा खिलाया गया। उसका नामकरण हुआ गौरांगिनी या गौरा।
      कुछ ही दिनों में वह सबसे इतनी हिलमिल गई कि  हम सबको वह आवाज से नहीं, पैर की आहट से भी पहचानने लगी। 
एक वर्ष के उपरांत गौरा एक पुष्ट सुंदर वत्स की माता बनीं। वत्स अपने लाल रंग के कारण गेरु का पुतला-जान पड़ता था।  बछड़े का नाम रखा गया लालमणि, परंतु उसे सब लालू के संबोधन से पुकारने लगे।लेखिका लिखती हैं कि हमारे घर में मानो दुग्ध-महोत्सव आरंभ हो गया। गौरा बारह सेर के लगभग दूध देती थी।
गौरा के दूध देने के पूर्व जो ग्वाला हमारे यहां दूध देता था, उसको ही दूध धोने के लिए रख लिया ।
  ग्वाले व्यवसाय में बाधा उत्पन्न हुई उसने महसूस किया कि जब तक गौरा यहां रहेगी उसका दूध इस घर में नहीं बिक पाएगा । ग्वाले के मन में पाप भावना समा गई कि गौरा को वहां से हटाने के लिए कुछ ना कुछ करना होगा ।ऐसा सोचकर उसने गुड़ की बट्टी में सुई डालकर गाय को खिला दिया ।
एक दिन ब्रहामुहूर्त में चार बजे जब मैं गौरा को देखने गई, तब जैसे ही उसने अपना मुख सदा के समान मेरे कंधे पर रखा, वैसे ही एकदम पत्थर-जैसा भारी हो गया और मेरी बांह पर से सरककर धरती पर आ रहा। कदाचित सुई ने हृदय को बेधकर बंद कर दिया।
अत्याधिक प्रयास के बाद भी गोरा को बचाया नहीं जा सका वह अपने बच्चों को छोड़कर सदा के लिए चल बसी 
 यदि दीर्घ नि:श्वास का शब्दों में अनुवाद हो सकता, तो उसकी प्रतिध्वनि कहेगी, 'आह मेरा गोपालक देश।'
     महादेवी वर्मा ने गौरा गाय के ऊपर  बहुत ही मार्मिक  कथानक लिखा ।
भारत के लोग दावा करते हैं कि वे गाय को पालना अपना धर्म समझते हैं ,गाय उनके लिए माता के समान है ,उसी गाय को अपने स्वार्थ के कारण मारने वाले व्यक्ति भी इसी देश में होते हैं।

 #पुस्तकें मेरी गुरु
Seema Praveen Garg 

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