मनोरम सफ़र

मनोरम सफ़र

रोमांचक यात्रा की बात करें तो मेरे जहन में अपनी त्रियोगी नारायण और बद्रीनाथ की यात्रा का स्मरण होता है । मै अपने परिवार के साथ गई थी ।और हमारे इस परिवार में सबसे छोटी सदस्या मेरी दीदी की बेटी थी ।उस समय उस की उम्र चार वर्ष की होगी।हम लोग हरिद्वार तक ट्रेन से गये वहाँ से हमारी टैक्सी बुक थी।हम सुबह हरिद्वार पहुँच गए और वहाँ से हमारी सड़क मार्ग की यात्रा शुरु हुई। त्रियोगी मन्दिर केदारनाथ धाम से पहले आता है और हरिद्धार से वहाँ तक जाने में एक दिन का समय लगता है पर हम दो दिन में पहुंचे क्योंकि पर्वतीय मार्ग में जाम बहुत लगता है और इसी जाम से मेरी इस यात्रा का रोमांच शुरु होता है। मुझे सफर में बहुत वोमिट होती है और पर्वतीय क्षेत्र मे तो इस पर सोने पे सुहागा हो जाता है ।और इस सफर में तो मेरी बहुत तबियत खराब हो गयी थी मैं कुछ खा पी भी नही रही थी ।मैंने अपने हाथ में एक अखबार ले रखा   था हमारी गाड़ी जाम के कारण थोड़ी थोड़ी देर बाद रुक जाती थी और मैं तुरन्त गाड़ी से बाहर निकल कर सड़क पर अखब़ार रख कर बैठ  जाती थी ।मेरी हालत देख कर सब बहुत घबरा गए,भैया कहने लगे कि यहीं से वापस चलो तो मैंने कहा कि मैं ठीक हूँ और सफर कर सकती हूँ इस तरह हम दूसरे दिन त्रियोगी नारायण मन्दिर पहुचें ।त्रियोगी नारायण मन्दिर विष्णु जी का मन्दिर है जिसमे भगवान् शिव और पार्वती माता का विवाह हुआ था और जिस अग्नि कुंड के फेरे लिये गये थे उस में अभी तक अग्नि प्रज्वलित है।एक छोटे से गांव में यह मन्दिर है।वहाँ जाते ही एक असीम शांति का अनुभव हुआ ।प्रकृति का अनुपम सौंदर्य है वहाँ ।आप गूगल पर भी सर्च कर सकते है इस मन्दिर को।थोड़ी देर बाद में वहाँ बारिश शुरू हो गई और उसके बाद घाटी में से ऊपर उठकर आते बादल ,इतना मनोरम दृश्य था कि लग रहा था  यहीं बस जायें।इसके बाद हमलोग बद्रीनाथ धाम के लिये निकल पड़े ।एक चमत्कार और हुआ की पूजा करने के बाद से मेरी तबियत बिल्कुल ठीक हो गई और आगे की चार दिन के दुर्गम पहाड़ी रास्तों में मुझे कोई परेशानी नहीं हुई। हमने बद्रीनाथ जाने के लिये छोटा रास्ता लिया जो एक  सेंचुरी से निकलता था कस्तूरी मृग सेंचुरी ।दिन के उजाले में तो बहुत अच्छा लग रहा था पर जैसे जैसे रात होने लगी वोह बहुत  भयावह लगने लगा जंगली जानवर भी दिखे ।भगवान का नाम लेकर उस को पार किया।उसके बाद हम चोपटा आये ।चोपटा को मिनी स्विट्जरलैंड  कहते हैं ।वहाँ से हम जोशीमठ होते हुए बद्रीनाथ जाते हैं ।बद्रीनाथ की जहाँ से चढ़ाई शुरू  होती है वहाँ पर हनुमानजी का मंदिर है उसका नाम हनुमान चट्टी है ।इस जगह पंडवो के वनवास काल में भीम को यहां हनुमानजी ने दर्शन दिये थे ।बद्रीनाथ की शुरु करने से पहले सब यहां माथा टेकते है।हनुमान चट्टी के दर्शन के बाद हम बद्रीनाथ धाम पहुचें ।अब बारी आई होटल की क्यूंकि जाम के कारण हम एक दिन बाद पहुँच पाये थे और हमारी बुकिंग एक दिन पहले की थी और अब कही रुम नही मिल रहा था।जीजाजी सरकारी अधिवक्ता है तो वहां के पुलिसवालों ने हमारी मदद की होटल दिलाने में और उतनी देर हम पुलिस स्टेशन में बैठे और हम ने पुलिस स्टेशन और जेल के भी दर्शन कर लिये अपने जीवन में ।बद्रीनाथ जी के दर्शन करने के बाद हम माना गांव गये जो बद्रीनाथ से 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है ।ये भारतीय सीमा का आखिरी गांव है ।इस गांव में वेद व्यास और गणेश गुफा है जहाँ से वेद व्यास जी और भगवान् गणेश ने महाभारत की रचना की थी।सरस्वती नदी का उदगम  भी यही पर है श्राप मिलने के कारण सरस्वती नदी बस यही दिखती है ।इसी नदी के उदगम पर भीमपुल है जो भीम जी ने नदी पार करने के लिये बनाया था और इस पुल के एक तरफ ही सरस्वती नदी दिखती है और पुल के दूसरी तरफ वो अदृश्य हो गयी हैं ।इस तरह बहुत सारे खट्टे मीठे अनुभवों के साथ हमारी रोमांचक यात्रा पूरी हुई।

मौलिक- स्मिता चौहान 

#पहलीरोमांचकयात्रा 

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