नेत्र हीन होकर भी देश की सबसे कठिन परीक्षा में पाई सफलता

 नेत्र हीन होकर भी देश की सबसे कठिन परीक्षा में पाई सफलता

सपनो तो हम सभी देखते है लेकिन, उन्हें पूरा करने की चाह हर किसी में नहीं  होती। चाह के साथ ही लगन हो तो आपको अपने सपने पूरे करने से कोई नहीं रोक सकता।
 इसी की मिसाल पेश की है 
तमिलनाडु की 25 वर्षीय नेत्रहीन छात्रा ने  तमिलनाडु के मदुरै की रहने वाली पूर्णा सुंदरी देख नहीं सकतीं, लेकिन बावजूद इसके उन्होंने इस साल अपने सिविल सेवा परीक्षा पास करने के सपने को पूरा कर लिया है।
सुंथरी (Purana Sunthari) ने वो कर दिखाया है, जो अक्सर कई लोग नहीं कर पाते हैं। उन्होंने देश की सबसे मुश्किल परीक्षा में शुमार यूपीएससी (UPSC ) परीक्षा में 286वीं ऑल इंडिया रैंक हासिल करके एक शानदार मिसाल कायम की ।

संघ लोक सेवा आयोग ने हाल ही में परिणाम घोषित किए हैं, इस परीक्षा में एक नेत्रहीन महिला की कामयाबी पर भारतीय टीम के पूर्व क्रिकेटर मोहम्मद कैफ ने प्रेरणादायक ट्वीट किया है।

उन्होंने ट्वीट कर लिखा ऑडियो के रूप में स्टडी मैटेरियल का मिलना मुश्किल था, उनके अभिभावकों और दोस्तों ने पढ़ने और किताबों को ऑडियो शक्ल में बदलने में मदद की। उनकी मदद की बदौलत नेत्रहीन महिला के आईएएस अधिकारी बनने का सपना पूरा हो सका। इसलिए सपनों का पीछा करना कभी मत छोड़ो।
तमिलनाडु के मदुरै की रहनेवाली 25 वर्षीय नेत्रहीन पुरना सुंथरी ने यूपीएससी में 286वां रैंक हासिल किया है। देश की सबसे कठिन परीक्षा में सफलता पर नेत्रहीन महिला की पूर्व क्रिकेटर मोहम्मद कैफ ने तारीफ की है। उन्होंने इस महिला के बुलंद हौसले और कठिन तपस्या की प्रशंसा अपने ट्वीट के जरिए की ।
नेत्रहीन महिला पुरना सुंथरी को यूपीएससी की परीक्षा में कामयाबी चौथी प्रयास में मिली है। परीक्षा में सफलता के बाद उन्होंने कहा कि मेरे माता-पिता ने मेरी बहुत मदद की मेरी कामयाबी उन दोनों के मेहनत का नतीजा है।
पुरना ने बताया कि देश की प्रतिष्ठित परीक्षा यूपीएससी को पास करने के लिए उन्हें 5 साल की कड़ी मेहनत करनी पड़ी। उन्होंने बताया कि उनका यह चौथा प्रयास था और वे 5 सालों तक जी-जान से परीक्षा की तैयारियों में जुटी हुई थी।
 उन्होंने बताया कि वे 11वीं क्लास के वक्त से ही आईएएस अधिकारी बनने का सपना देख रही थी।
साथ ही उन्होंने  नौकरी में आने के बाद अपने पसंदीदा क्षेत्र के बारे में बताया उन्होंने कहा कि मैं शिक्षा स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण सशक्तिकरण के लिए काम करना चाहूंगी।

सिविल सर्विस एग्जाम देश के सबसे मुश्किल एग्जाम में शुमार किया जाता है।
हर साल 10 लाख से अधिक उम्मीदवार इस परीक्षा के लिए आवेदन करते हैं, लेकिन भर्तियां 1000 से कम उम्मीदवारों की ही होती हैं।


अनु गुप्ता 
 

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