Category : Poetry

पुरुष स्वीकार नहीं कर पाते

एक ना को वह समझ लेते हैं अपनी तौहीन, जब कभी भी किसी स्त्री ने कहा " ना" तो  उडेल दिया गया उसके चेहरे पर तेजाब, 

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कविता -शिव विवाह

यही प्रतिज्ञा है उनकी, हल्दी लगे शंकर के नाम की, मेहंदी भी नटराज नाम की, चूड़ी सजे कैलाशपति नाम की।

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माँ की चोरियां

कल्पना करिये एक गांव में ब्याही स्त्री जहाँ उसकी खुद की कदर एक काम करने वाली काया से अधिक कुछ नही ।क्या उसकी बच्ची को मिलते होंगे...

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जी चाहता है

कुछ पल अकेले ठहरने को जी चाहता है खुद से करूँ खुद की गुफ्तगूँ वो लम्हे चुराने को  जी चाहता है।

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एक बुरा ख़्वाब

जा रही थी स्कूल से घर को इक दिन अकेली ,  सँग ना थी कोई मेरी सहेली ।

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छाई बदरी आकाश में

चढ़ा आषाढ़ देखो आसमान में.......    उमड़-घमुड़ रही बदरी।    मचलने लगा मन धरती का ,    पपीहे की पीहू -पीहू,    नाचे मन मयूरी का।।

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कविता -थाम लो हाथ

*सुशांत का यूं जाना, देता है दस्तक ,हर सुशांत को है बचाना*

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अंतर्मन का दर्पण

कहां हो,किस हाल में हो कहा गुम हो गईं, बड़े दिनों बाद मिली हो... कही लुप्त तो नही हो गयी हो।

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बेबाक सी लड़कियां

बडी़ चुभती हैं समाज की नजर में  चलती है जब मनचाही डगर में  आसमां को चुनती है, जैसे चिड़िया  हिम्मतवाली वो बेबाक सी लड़कियां |

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मेरा भारत फिर मुस्कुराएगा

मेरा देश, फिर मुस्कुराएगा, उम्मीदों का सूरज, फिर से जगमगाएगा। फैली चारों तरफ निराशा है,

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