मुझे खुद से इश्क़ हुआ नया नया!

मुझे खुद से इश्क़ हुआ नया नया!

बीता खुशगवार लम्हा हर कोई जीना चाहता.. 

मैं तो हर लम्हें को बस जीना चाहती हूँ.. 

डूबते आफ़ताब सी तसल्ली भरी थकान हो.. 

उगते सूरज की रोशनी सा आगाज़ रोज चाहती हूँ.. 

समेट कर सारी व्यथाएँ सारी मन की चिंताएं.. 

बंद कर के सन्दूक में गंगा घाट अर्पण करना चाहती हूँ.. 

रो कर पैदा हुई ज़िन्दगी मुस्कुराते हुए बीत जाए..

छोटे छोटे अरमान पाल के जरा स्वार्थी होना चाहती हूँ..

आखिर मुझे इश्क़ हुआ है खुद से नया नया अभी..

उम्र की गिनतियाँ भूल के ज़िन्दगी का मजा लेना चाहती हूँ..

#ishq

स्वरचित -प्रियंका गहलौत (प्रिया कुमार)©

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