मम्मीजी एण्ड डाटरस!!

मम्मीजी एण्ड डाटरस!!

सुनीता जी की शादी हुयी थी तब वो बी.ए . कर रही थी उनको कडाई सिलाई का बहुत शौक था उनके हाथ में जादू था एक से एक सुंदर ड्रेस  तैयार कर देती थी| पर उनके ससुराल में बहु का काम करना किसी को पंसद नहीं था ऐसा नहीं था कि उनके पति को उनके काम करने पर कोई ऐतराज हो पर अपने परिवार के खिलाफ जाने की हिम्मत नहीं थी | उनकी माँ ने तो उन्हें वैसे ही जोरू का गुलाम से नवाजा हुआ था सो बिचारे चुप ही रहते थे| 

सुनीता जी घर का सारा काम करके अपने हुनर को संवारने में लग जाती थी जब उनकी बेटी हुयी तो नयी -नयी फ्राक बनाकर पहनाती अपने लिए ब्लाउज बगैर सीती पूरे मौहल्लै वाले उनकी तारीफ करते कहते बहु सिलाई का काम कर लो हमारे भी कपड़े सी दिया करो तुम्हारा काम भी निखरेगा और दो पैसे भी कमा लोगी|  पर जब उनकी सास को पता चला तो पूरा घर सिर पर उठा लिया| सुनीता जी अपना मन मारके रह गयी| समय अपनी गति से चलता गया उनके सास ससुर नहीं रहे और उनकी भी उम्र हो गयी| 

बेटी की शादी हो गयी और घर में बहू भी आ गयी पर सुनीता जी अपनी बहू से एक दूरी बनाकर रहती है कहीं न कहीं अपनी सास जैसा व्यवहार करने लगी थी | अब खाली समय मिलने लगा था तो अपने पति से बोली "सुनिए जी अब तो घर गृहस्थी से फुरसत मिल गयी तो क्यों न मैं अपना सिलाई का शौक पूरा कर लूँ" उनके पति ने कहा जैसी तुम्हारी इच्छा मैने तुम्हे कब मना किया वो तो अम्मा की इच्छा रखने के लिए तुमसे कभी हां नहीं की|

उनके बेटे को पता चला तो गरम हो गया क्या जरूरत है मम्मी इस उम्र में काम करने की क्या जरूरत है क्या कमी हैं | सुनीता जी कुछ कह पाती उससे पहले ही उनकी बहू बोल पडी़ " न जरुरत है न कमी है पर मम्मी जी का शौक है हुनर है जो वो गृहस्थी के कारण पूरा नहीं कर पायी अब उनके पास समय है तो वो शौक पूरा करेगी और फिर काम करने और सीखने की कोई उम्र नहीं होती | मैनें तो मम्मी जी की बुटीक के लिए जगह भी देख ली और नाम भी सोच लिया " मम्मी जी एण्ड डाटरस " 

अच्छा है न मम्मी जी लेकिन एक शर्त है आपको मुझे सिखाना होगा मैने दीदी की फ्राक्स और सूट देख रखे है एक से एक डिजाइन बनाये है आपने वो तो दीदी ने बताया कि आपको फैशन डिजाइनर बनने का शौक था अब हम मिलकर पूरा करेगें आपका सपना

सुनीता जी अपनी बहू को अंचल से देखती रही आंखों में आंसू आ गये सोचने लगी मै इसके साथ क्या कर रही थी मैं अपने अतीत की कडवाहट इस पर निकाल रही थी और ये मुझे इतना सम्मान दे रही है |उन्होंने अपनी बहु को गले लगा लिया और बोली जरूर सिखाउ़गी मेरी बच्ची.... 

स्वरचित

श्रुति त्रिपाठी

#career planning of females

#My life my choices

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