मुंशी प्रेमचंद के यह तीन महिला किरदार

इस महान लेखक का साहित्य जगत हमेशा ऋणी रहेगा

 मुंशी प्रेमचंद के यह तीन महिला किरदार

जब हम हिंदी साहित्य की बात करते हैं, तो मुंशी प्रेमचंद का ज़िक्र न हो ऐसा तो हो ही नहीं सकता। सालों बाद भी उनकी कहानियां और उपन्यास लोगों को प्रेरित करते हैं। मुंशी प्रेमचंद की कहानियों में ग्रामीण जीवन के साथ ही महिलाओं को भी प्रमुख स्थान मिला।

1-निर्मला की निर्मला
महिला-केन्द्रित साहित्य के इतिहास में इस उपन्यास का विशेष स्थान है। इस उपन्यास की कथा का केन्द्र और मुख्य पात्र 'निर्मला' नाम की १५ वर्षीय सुन्दर और सुशील लड़की है। निर्मला का विवाह एक अधेड़ उम्र के व्यक्ति से कर दिया जाता है। जिसके पूर्व पत्नी से तीन बेटे हैं। निर्मला का चरित्र निर्मल है, परन्तु फिर भी समाज में उसे अनादर एवं अवहेलना का शिकार होना पड़ता है। उसकी पति परायणता काम नहीं आती।

उस पर सन्देह किया जाता है, उसे परिस्थितियाँ उसे दोषी बना देती है। इस प्रकार निर्मला विपरीत परिस्थितियों से जूझती हुई मृत्यु को प्राप्त करती है।निर्मला में अनमेल विवाह और दहेज प्रथा की दुखान्त व मार्मिक कहानी है। उपन्यास का लक्ष्य अनमेल-विवाह तथा दहेज़ प्रथा के बुरे प्रभाव को अंकित करता है। 

2-बड़े घर की  बेटी  की आनंदी

बहुत अमीर घर में पली-बढ़ी आनंदी की शादी जब गरीब परिवार में हो जाती है, तो उसे बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। एक बार उसके परिवार में जबर्दस्त लड़ाई हो जाती है और परिवार टूटने की कगार पर पहुंच जाता है, लेकिन आनंदी अपने पति को उसकी गलती समझाती है और परिवार को बिखरने से बचा लेती है।

3- सेवासदन'  की 'सुमन'

को मध्यवर्गीय नारी के रूप में प्रस्तुत किया गया है। ... यह समस्यामूलक उपन्यास है, जिसमें नारी-जीवन से संबंधित समस्याओं को उपस्थित किया गया हैं । 

भारतीय नारी की विवश स्थिति और उसके गुलाम जीवन की नियति को बड़े ही मार्मिक ढंग से रेखा अंकित करने वाली कृति है।

इस महान लेखक का साहित्य जगत हमेशा ऋणी रहेगा। 

अनु गुप्ता

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