मुंशी प्रेमचंद जी के 11 बेहतरीन कोट्स

मुंशी प्रेमचंद जी के 11 बेहतरीन कोट्स

मुंशी प्रेमचन्द्र जी का जन्म 31 जुलाई 1880  को वाराणसी के लमही गाँव मे हुआ था ।उनका लेखन हिन्दी साहित्य की एक ऐसी विरासत है जिसके बिना हिन्दी के विकास का अध्ययन अधूरा होगा। वे एक संवेदनशील लेखक, सचेत नागरिक, कुशल वक्ता तथा सुधी (विद्वान) संपादक थे। 
वो कहानियों के साथ-  साथ अनमोल विचार या कोट्स भी लिखते थे उनके कोट्स आज भी प्रचलित हैं आइये जानते हैं उनके 11  बेहतरीन कोट्स के बारे में ।

प्रेमचंद जी के 11 बेहतरीन कोट्स

1. खाने और सोने का नाम जीवन नहीं है, जीवन नाम है, आगे बढ़ते रहने की लगन का।

2 . दौलतमंद आदमी को जो सम्मान मिलता है, वह उसका नहीं, उसकी दौलत का सम्मान है।

3. कार्यकुशलता की व्यक्ति को हर जगह जरूरत पड़ती है।

4. चोर केवल दंड से नहीं बचना चाहता, वह अपमान से भी बचना चाहता है। वह दंड से उतना नही डरता है ,जितना कि अपमान से।

5.चापलूसी का जहरीला प्याला आपको तब तक नहीं नुकसान पहुंचा सकता जब तक कि आपके कान उसे अमृत समझ कर पी ना जाए।

6. आकाश में उड़ने वाले पंछी को भी अपना घर याद आता है।

7 . नमस्कार करने वाला व्यक्ति विनम्रता को ग्रहण करता है और समाज में सभी के प्रेम का पात्र बन जाता है।

8. लिखते तो वह लोग हैं, जिनके अंदर कुछ दर्द है, अनुराग है, लगन है, विचार है। जिन्होंने धन और भोग विलास को जीवन का लक्ष्य बना लिया, वो क्या लिखेंगे?

9. जीवन का वास्तविक सुख, दूसरों को सुख देने में है; उनका सुख लूटने में नहीं।

10. आत्मसम्मान की रक्षा हमारा सबसे पहला धर्म है।

11. स्त्री गालियां सह लेती है, मार भी सह लेती है, पर मायके की निंदा उससे नहीं सही जाती।

मुंशी प्रेमचंद के ये कोट्स जीवन की वास्तविकताओं से अवगत कराते हैं आज उनकी जयंती पर हम उनको नमन करते हैं ।

अन्तिमा सिंह

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