नारी शक्ति का स्वरुप है,

नारी शक्ति का स्वरुप है,

नारी जीवन में निभाती कई किरदार,
 तुम ही  करती हो शक्ति का संचार,

नारी से है तेरे घर की शान,
इस के बिना नहीं है तेरे अस्तित्व की पहचान,

 नारी  का हर रूप है निराला,
चाहे हो दुर्गा  चाहे हो ज्वाला,
  
हर युग राक्ष्सों का वध कर देती,
 अपने भत्तो  की हर मुश्किल हर लेती,
 अध्यापिका बनके देती शिक्षा का घ्यान है,
सभी बच्चों  को शिक्षित होने का अधिकार है,
 हर क्षेत्र में नारी ने  कदम है बढ़ाया,
अपनी काबिलियत से  नाम है कमाया,        

 बेटी बनकर  मां बाप के घर को
 रोशन है  करती ,
सबके  जीवन  में खुशियां है बिखेरती,

 बहु ही निस्वार्थ भाव से सबकी सेवा  करती, है,
सबको एक माला के सुत्र में    जोड़े     रखती  है,

पत्नी  पति के हर सु:ख दु:ख में साथ  देकर,
     कहलाती है जीवन संगिनी,
 जैसे पार्वती है शिव की अरिधानगिनी,
नारी का हर रूप है नियारा,
उसी से है जग में उज्यारा,
ग्रहणी  ही मकान को घर बनाती,
हर रिश्ता को दिल से है निभाती,
जब बात उसके सम्मान  पर आ जाए,
  फिर वो    दुर्गा    मां       बन   जाएं,

नारी ही हर जग में हर क्षण मे                                     सुष्टि  के हर कण में 

तू ही विधमान जग कर्ता जगभर्ता

  तु   ही  सुष्टि की पालन कर्ता

, नारी ही शक्ति का स्वरुप है,

नारी ने ही इस जगत में

अपनी अलग पहचान बनाई है,

#स्त्री तेरे रूप अनेक,

                                 

                         किरन वासवानी,

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