नई माँ के लिए 5 आवश्यक सुझाव

नई माँ के लिए 5 आवश्यक सुझाव

सारे घर में चहलकदमी हो रही थी । सभी खुश हो काम निपटाने में लगे हुए थे । माँ रसोई में पकवान बनाने में लगी थी । पिताजी भी बरामदे से गेट तक न जाने कितने ही चक्कर लगा चुके थे । दरअसल आज काम्या बुआ जी आ रही थी स्विट्जरलैंड से । 

काम्या बुआ कमल की इकलौती बुआ थी । पिछले दस सालों से वह स्विटजरलैंड में ही रह रही थी । कमल के पिताजी और माँ भी काम्या बुआ को खूब मान देते थे । बुआ जी थी ही बहुत समझदार । कमल और उसकी बहन सुधा की परवरिश में भी बुआ का काफी योगदान था। उस समय बुआ भारत में ही थी और दोनों बच्चों के बड़ा होने में उन्होंने भाई-भाभी को पूरा सहयोग दिया था। 

कमल का लड़का होने की खबर लगते ही बुआ ने भारत आने की टिकटें बुक करा ली थी । कमल के माता-पिता भी यह सोच-सोच कर खुश हो रहे थे कि चलो कमल के बच्चे को भी काम्या बुआ के कुछ संस्कार तो मिलेंगे । 

गाड़ी का हॉर्न बजता है । 

पिताजी - कमल की माँ देखो,देखो …… दीदी आ गई ।

माँ भी रसोई छोड़ तेज कदमों से बाहर आ जाती हैं। बुआ गेट से अंदर आते ही पिताजी को देखती हैं औरकहती हैं-  बिट्टू कैसा है ?अरे !कमजोर लग रहा है ।खाता नहीं क्या ठीक से ? आ गई हूँ मैं , खाने के लिए तो शुरु से ही तेरे कान खींचने पड़ते हैं । 

पिताजी भी बुआ को देखकर ऐसे खुश हो रहे थे मानो जिंदगी मिल गई हो ।

माँ से मिलते ही बुआ ने मीनू (कमल की पत्नी)और मुन्ने को देखने की इच्छा जताते हुए कहा - कमल , जल्दी से मुन्ने को मेरी गोद में दे दे । उसे खिलाने के लिए तो मैं उतावली हुए जा रही हूँ ।

मुन्ने को गोद में लेते ही बुआ बोली - मीनू , बिटिया कैसा लग रहा है , माँ बनकर ? अब तुम बेटी और बहू से भी ऊँचे दर्जे पर आ गई हो और वह है माँ का दर्जा । संसार का सबसे बड़ा दर्जा और सबसे बड़ा सुख ।

बुआ जी पता नहीं क्यों मुझे बहुत डर लगा रहता है कि क्या मैं यह दायित्व बखूबी निभा पाऊँगी । कहीं मुझसे कुछ गलती ना हो जाए - मीनू ने कहा।

काम्या बुआ- बिटिया , जैसा तुम सोच रही हो , ऐसा सोचना - घबराहट होना - विचारों का बार बार बदलना , यह सब स्वाभाविक ही होता है ।

बुआ जी क्या सच में ऐसा होना स्वाभाविक होता है - मीनू ने पूछा।

काम्या बुआ - हाँ बिटिया, डिलीवरी के बाद एक माँ बार-बार बच्चे की परवरिश को लेकर इनसिक्योर होती रहती है । दरअसल हार्मोनेल बदलाव और साथ ही एक नई जिम्मेदारी आने से हुए बदलाव के कारण ऐसा होता है । इसे पोस्टपार्टम डिप्रेशन भी कहते हैं ।

बिटिया इस स्थिति से तुम्हें स्वयं को खुद ही बाहर निकालना होगा। 

मीनू - बुआ जी , पहले आप चाय नाश्ता ले लीजिए ।

नहीं बिटिया , अब तो मैं तुम्हें कुछ जरूरी बातें समझा कर ही चाय पीऊँगी । अब तुम मेरी बातों को ध्यान से सुनो- बुआ आराम से बैठते हुए बोली। 

देखो मीनू , जैसा कि तुम अभी नई - नई माँ बनी हो तो तुम्हें अपने इस मातृत्व सफ़र में कुछ बातों का ध्यान रखना है और यह बातें मैं एक-एक करके तुम्हें बता रही हूँ- 

*कभी भी अपने बच्चे की तुलना किसी दूसरे के बच्चे से नहीं करनी जैसे उसके रंग-रूप , व्यवहार आदि को लेकर। .तुम्हें अपने शरीर की तुलना भी किसी और महिला से नहीं करनी है जैसे -ओहो ….डिलीवरी के बाद मैं तो बहुत मोटी हो गई हूँ और दूसरी मदर्स इतनी मोटी नहीं होती ….आदि। .साथ ही तुम्हें यह भी तुलना नहीं करनी है कि दूसरी मदर्स अपने बच्चों का ज्यादा ख्याल रखती है जबकि मैं इतना ख्याल नहीं रख पाती । 

हर माता-पिता अच्छे होते हैं और सब अपने बच्चे की बेहतर परवरिश करते हैं ।

*परिवार की मदद लें व अपने लिए समय निकालें । हर नई माँ को यह लगता है कि बच्चे का ध्यान रखने में उससे कोई कमी ना हो जाए । इस कारण वह अपना अधिकतर समय बच्चे की देखभाल में ही बिताती है । वह अपने बारे में लापरवाह हो जाती है । तुम्हें अपने लिए भी भरपूर समय निकालना है । इसके लिए तुम बच्चे के कामों में सबकी यानि परिवार की मदद ले सकती हो ।

*दूसरों का विश्वास करने की आदत बनाएँ । हर नई माँ को लगता है कि जैसी परवरिश मैं अपने बच्चे की करूँगी,उस  तरह की परवरिश दूसरा कोई और नहीं करेगा। परिवार का विश्वास करने की आदत भी बनानी होगी, जिससे कि बच्चे को भी परिवार से प्यार हो सके और परिवार की देखभाल में बच्चा भी खुश मिज़ाज़ज बन सके ।

*अपने लिए स्पोर्ट ग्रुप तैयार करें । पहली बार माँ बनने के कारण तुम्हें बच्चे की देखभाल संबंधी सभी बातों की जानकारी नहीं होगी , इसलिए अपने कुछ ऐसे दोस्तों का ग्रुप बनाएँ जो कि पहले माँ बन चुकी हैं या जिनके साथ तुम खुलकर बात कर सकती हो, जिससे कि तुम्हें बच्चे की देखभाल संबंधी पूरी जानकारी मिलती रहे। 

*अपने शारीरिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। नई माँ अपने शरीर का ध्यान रखना बंद कर देती है क्योंकि उसे केवल बच्चे की जरुरतों का ही ध्यान रहता है। जरूरी है कि माँ अपने खाने-पीने का पूरा ध्यान रखें । समय पर खाए। अपनी नींद पूरी करें ।अपनी सेहत का पूरा ख्याल रखें । 

देखो मुझे पूरा विश्वास है कि तुम इन बातों का पूरा ध्यान रखोगी जिससे तुम्हारा मातृत्व सफ़र संघर्षमय ना होकर सुखमय हो जाए - बुआ जी बोली।

मीनू - सच! बुआ जी... जैसा मैंने आपके बारे में सुना था, आप बिल्कुल वैसी हैं - यह कहकर वह मुस्कुरा दी और बुआ जी के लिए चाय नाश्ता लेने चली गई।

Madhu Dhiman

Pink Columnist-Haryana

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