ओखली में सिर देना

ओखली में सिर देना

"क्या तुम आज मुझे चौपला मोड़ तक लिफ्ट दे दोगी? मेरी स्कूटी का टायर पंक्चर हो गया है और शाम को जल्दी घर पहुँचना है।" स्वरा ने मधु से कहा।

"हां क्यों नही। तुम कहोगी तो तुम्हारे उनके घर तक भी मैं ही छोड़ आऊंगी।" मधु ने चुटकी लेते हुए कहा।

स्वरा और मधु एक ही ऑफिस में काम करती थी और अकसर एक दूसरे की गाड़ी में लिफ्ट लिया करती थी। स्वरा जहां शांत और सरल स्वभाव की थी मधु शरारती और बड़बोले स्वभाव की थी, या यूं कहा जाए बिना सोचे समझे ही ओखली में सिर देने की आदत थी और अपने इसी स्वभाव की वजह से मधु कई बार परेशानी में फंस चुकी थी।

जल्दी जल्दी काम खत्म कर शाम को दोनों ऑफिस से निकल पड़ी। स्वरा ने मधु से पूछा "तुम्हारे पास गाड़ी के सारे पेपर तो है ना साथ में, याद है पिछली बार चालान कटते कटते बचा था।"

मधु ने कहा " वो तो गलती से कागज़ घर पर छूट गए थे, बार बार थोड़े ही ऐसा होगा। तुम्हें आज समय पर घर पहुचाने की जिम्मेदारी मेरी।"

गाड़ी में बैठ दोनों ने अपनी सीटबेल्ट लगाई और चल पड़ी घर की ओर। अभी दो सिग्नल ही पार किए थे कि देखा तीसरे सिग्नल पर तगड़ी चेकिंग चल रही है।

स्वरा ने कहा, "मधु दाहिनी वाली गली से ले ले, ये पेपर चेकिंग के चक्कर में कहीं हमें देर ना हो जाए।"

मधु बोली "मैं हूं ना, सारे पेपर दिखा कर हमें पहले छोड़ने के लिए बोलेंगे। लड़कियों को ना नही करेगी पुलिस।"

जैसे ही गाड़ी सिग्नल के करीब पहुँची, ट्रैफिक पुलिस ने हाथ दिखाया रूकने के लिये और गाड़ी के नजदीक आकर जाँच पड़ताल करने लगा। सारे कागज देख कर वापस करते समय तंज कसते हुए बोला "वाह!! लड़कियों के पास सारे कागज़ भी सही है और सीटबेल्ट भी पहनी है।"

स्वरा के चुप कराते कराते भी मधु पेपर लेते हुए अपने बड़बोलेपन की आदत से मजबूर बोल ही बैठी, " आपको क्या लगता है लड़कियों को गाड़ी चलाना और उससे जुड़े नियमों का पालन करना नही आता। आपने तो बस गाड़ी के पेपर ही मांगे, इन्शुरन्स के पेपर तो आपने देखने ही नही चाहे। वो भी है मेरे पास।"

पुलिस ने कहा, "तो लाओ फिर लगे हाथों इन्शुरन्स के पेपर भी दिखा ही दो।"

मधु पलटी और गाड़ी में आकर पेपर ढूंढने लगी। अचानक उसे याद आया कि इन्शुरन्स पेपर तो रिन्यूअल के लिए जमा किए थे जिन्हें वो लेना भूल गई थी।

उसके चेहरे की उड़ी रंगत देख पुलिस ने अपने सहकर्मी को आवाज़ लगाई और मुस्कुराते हुए कहा, "गाड़ी एक तरफ करवा कर इन लड़कियों का चालान बनाओ, ये लड़कियां बिना इन्शुरन्स पेपर के गाड़ी लिए शहर की सड़कों पर घूम रही है।"

स्वरा ने गुस्से से मधु को देखा और उसका हाथ पकड़ कर लग गई चालान कटवाने वाली लाइन में। आज फिर मधु के बड़बोलेपन की वज़ह से दोनों मुसीबत में फंस चुकी थी

धन्यवाद।

स्वाति रॉय

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