नवविवाहिता की पहली होली मायके में क्यों ?

नवविवाहिता की पहली होली मायके में क्यों ?

नवविवाहिता की पहली होली मायके में क्यों?

होली का त्यौहार बस आ ही गया है उमंगों और रंगों से भरपूर यह त्यौहार एक ओर जहाँ बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप मनाया जाता है वहीं इससे जुड़ी कुछ प्रचलित मान्यताएँ भी हैं। इन्हीं में से एक है नवविवाहिता का पहली होली अपनी ससुराल में न मनाना। अधिकांश घरों में विवाह पश्चात पहली होली मायके में मनाने का रिवाज है।

ऐसी धारणा है कि सास बहू को पहली होली एकसाथ नहीं मनाना चाहिए। खासतौर पर जलती हुयी होली को उन दोनों का एकसाथ देखना अशुभ माना जाता है। पुराने जमाने के विद्वानो के अनुसार ऐसा करने से पारिवारिक कलह तो होती ही है यहाँ तक कि सास बहू दोनो में से एक की मृत्यु तक हो सकती है।  यद्यपि मैं इसे एक तरह का  अंधविश्वास ही कहूँगी पर फिर भी हमारे समाज में प्रचलित इस धारणा की वजह से अधिकांश परिवारों में पहली होली मायके में ही मनाने का रिवाज है।
    इसका एक अच्छा पहलू यह है कि पूर्णिमा के अगले दिन रंग खेलने वाले दिन नवविवाहिता का पति अपनी ससुराल जाकर साले सालियों के साथ होली खेलता है, जिससे आपस का प्यार बढ़ता है।
अलग अलग परिवारों के अलग अलग रिवाज हमारे समाज में हैं। जरूरी नहीं कि ऐसा सभी जगह होता है फिर भी यह परम्परा तो है।

   

अर्चना सक्सेना

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