परवरिश - एक मां की

परवरिश - एक मां की

निधि काफी देर से देख रही थी कि रोहन उससे कुछ कहना चाहता है |बगल वाली सीट पर ही बैठा है |निधि को रोहन कभी पसन्द नहीं था |बहुत शैतानी करता था और क्लास की हर लड़की को परेशान करता रहता था |स्टडी टूर पर गई थी निधि की पूरी क्लास और रोहन बस में उसी के पास बैठा रहा |बहुत देर से बातें कर रहा था लेकिन अभी कुछ देर से कुछ कहने की कोशिश कर रहा है लेकिन कह नहीं पा रहा |

निधि ने परेशान होकर खुद ही पूछा - " चौबीस घंटे पटर पटर बोलने वाला रोहन इतना शान्त क्यों बैठा है |कोई शैतानी सूझ रही है क्या तुम्हें |मुझे तो डर लग रहा है तूफान जैसे लड़के का यूं शान्त  देखकर |"

रोहन अपना स्वेटर निधि को देते हुये - ये लो तुम्हारा स्टॉपेज आना वाला है अपनी कमर से ये स्वेटर बांधकर तब घर जाना |"

क्यों?  निधि ने पूछा |

"अभी तुम अपना बैग उतारने के लिए  खडी़ हुई थी ना तो मैंने देखा तुम्हारी स्कर्ट गन्दी हो रही है आई मीन ब्लड लगा है |"रोहन ने कहा |

निधि की सहेलियां और बडी़ बहन पीरियड से हो चुकी थी सो उसे सब पता था |निधि समझ गई मां को पीरियड की चिन्ता सता रही थी क्योकिं निधि की उम्र की सभी लड़कियों के पीरियड आ गये थे  सो आज उसका भी पहला पीरियड आ गया |निधि स्थिति समझकर चुपचाप बैठ गई और धीरे से बोली - "रोहन थैंक्यू सो मच |"

रोहन कुछ नहीं बोला बस होले से मुस्करा दिया |

निधि का स्टॉपेज आ चुका था और रोहन का स्वेटर कमर से बांधे वो घर की तरफ चल दी और घर जाकर मां को सब बता दिया |

अगले दिन निधि की मां रोहन के घर आई और रोहन की मां नीलिमा जी को उनके बेटे का स्वेटर थमाते हुये बोली- 

"नीलिमा जी आपने अपने बेटे को बहुत अच्छे संस्कार दिये है |इतनी कम उम्र में आपके बेटे में इतनी समझदारी ये दर्शाती है कि आपने अपने बच्चों की परवरिश कितनी अच्छी की है |"

नीलिमा जी मुस्कराई और बोली - "बहन जी रोहन और रितिका जुड़वा बच्चे हैं उनकी क्लास भी एक ही है |जब मेरी रितिका को पहला पीरियड आया तभी मैंने रोहन को इसके बारे में समझा दिया था और तभी से रोहन इन दिनों स्कूल में भी रितिका का बडा़ ध्यान रखने लगा |ये एक प्राकृतिक प्रक्रिया है और हमें अपने बेटों को इसके बारे में शिक्षित करना चाहिए ताकि वे किसी भी लड़की का मजाक बनाने की बजाय इन दिनों में आने वाली तकलीफों को समझ सकें |"

निधि की मां बोली- सच में नीलिमा जी हर मां को आपसे शिक्षा लेनी चाहिए और अपने बेटों की परवरिश आपकी तरह ही करनी चाहिए ताकि  हमारे समाज के लड़के  महिलाओं को सम्मान की नजर से देख सकें और उनकी परेशानियों को समझ सकें |

धन्यवाद |

सीमा शर्मा पाठक

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