पत्नी को भी है ना कहने का अधिकार

सोचिये……क्य स्त्री पति की माँग पूरी करने के लिये 24 घन्टे पशु बनी रहे,यह कौन सी संस्कृति है? अपनी हवस मिटाने के लिये पुरुष द्वारा "जबरदस्ती"—ये कैसा विवाह हुआ, और कैसी रीति हुई। रात के 11बजे नहीं कि पति जुट गया ।

पत्नी को भी है ना कहने का अधिकार

सोचिये……क्या स्त्री पति की माँग पूरी करने के लिये 24 घन्टे पशु बनी रहे,यह कौन सी संस्कृति है? अपनी हवस मिटाने के लिये पुरुष द्वारा "जबरदस्ती"—ये कैसा विवाह हुआ, और कैसी रीति हुई। रात के 11बजे नहीं कि पति जुट गया ।

पत्नी की तबियत ठीक है कि नहीं,यह तो जान लो पहले! "पत्नी धर्म"के नाम पर देश में स्त्रियों पर जबरदस्ती की जा रही है! बेचारी भोली भाली लड़की ब्याह कर आने के फौरन बाद 'सुहाग रात' के नाम पर (दबंग) पति के समक्ष समर्पण को मजबूर है!आखिर पहली ही रात में ये "तमाशा"करने की जरूरत ही क्या है?क्या पत्नी कहीं भाग जायेगी?

वैसे भारत में स्त्री के इस कदर उत्पीड़न के लिये खुद पति के घर की स्त्रियाँ (सास,जिठानी वगैरा)ही जिम्मेदार होती हैं,जिनमें सुबह होते ही सुहाग सेज पर "दाग" देखने की होड़ लगी होती है !!पत्नी कोई खिलौना तो है नहीं कि जब चाहे उससे खेलने लगे।वह दिन भर घरेलू कामों में व्यस्त रहती है,तो थोड़ा थक भी जाती है।जॉब में हो,तो दफ्तर से भी थकी-मांदी घर लौटती है। तो भई ,बेसुध होकर,संयम खोकर जुट जाने से पहले पत्नी से कम से कम ये तो पूछ लो कि आज "मूड" भी है या नहीं……..?

हो सकता है ऑफिस में कोई विवाद बॉस से या किसी साथी कर्मचारी से हो गया हो,और पत्नी अभी गुस्से में हो।ऐसे में उनकी "झिड़की" सुनने से बेहतर है उनको शान्त हो जाने दें।……वह आपकी "रखैल" या नौकर तो हैं नहीं?मतलब साफ है ,पत्नी को सैक्स के लिये मजबूर बिलकुल मत करिये।भारत में समाज इसीलिये "पुरुष प्रधान"समाज के नाम से बदनाम हो चुका है कि यहाँ पुरुष हर बात में अपनी "प्रधानी" चलाने से बाज नहीं आता……..!!

इसके साथ ही महिलायें न सिर्फ उन्हें खुश करने के लिए नहीं बल्कि डर से भी पत्नियां अपने मान सम्मान को किनारे रख पति की हर जायज और नाजायज मांग पूरी करती हैं।

भारतीय पत्नियों में यह डर हमेशा बना रहता है कि उनके पति से किसी तरह विवाद न हो,पति नाराज न हो जाए, साथ ही संबंध ठीक रहे।

जबकि भारतीय महिलायें नहीं जानतीं कि मन न होने पर भी हर बार ‘हां’ कह देने से वो असल में अपने संबंधों को खोखला कर रही हैं, और जो कभी ‘न’ कह भी दे तो वो अपने साथ अपराध बोध भी लेकर चलती हैं।

नियम यह है कि सेक्स के लिए सहमति जरूरी है, और बिना सहमति से किया गया सेक्स बलात्कार होता है।मैरिटल रेप को अपराध घोषित करने की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा था  कि शादी जैसे रिश्ते में पुरुष और महिला दोनों को ही शारीरिक संबंध के लिए न कहने का अधिकार है।

महिलाओं को अब यह बात समझनी  होगी  कि अगर उनके लिए पति देवता है, तो वो उसकी दासी नहीं, देवी है। इसलिए ऐसी कोई परिस्थिति सामने आती हैं तो  उन्हें बिना झिझक के पति को ‘ना’ बोल देना चाहिए।

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