पिंक कॉमरेड्स के अपने दोस्तों के साथ बिताए खुशनुमा, यादगार पल - गुलाबी चर्चा  

पिंक कॉमरेड्स के अपने दोस्तों के साथ बिताए खुशनुमा, यादगार पल - गुलाबी चर्चा  

स्कूल कॉलेज के वो दिन वो दोस्त हर किसी के लिए खास होते हैं पिंक कॉमरेड्स से जाने उनके स्कूल कॉलेज के दोस्तों के साथ बिताए कुछ मजेदार किस्से-


Kirti Mehrotra-

एकबार मैंने अपनी सबसे अच्छी दोस्त( या फिर जिसे लंगोटिया यार कहते हैं )प्रीती को हिंदी निबंध " ट्यूशन पढ़ना क्यों जरूरी है"के लिए कोटेशन लिखवाया " ट्यूशन पढ़ने वाला छात्र अर्जुन और ना पढ़ने वाला एकलव्य हो जाता है" उसने अपनी अंग्रेजी की नोटबुक के पीछे नोट कर लिया , अंग्रेजी वाले सर ने देख लिया फिर उसकी खूब डांट लगाई क्योंकि वो खुद ऐसा करते थे बाद में मेरी दोस्त ने मेरी खूब क्लास लगाई " कीर्ति की बच्ची!!!!! तूने लिखवाया ये कोटेशन और डांट मेरी पड़ी ,सर के सामने तो ऐसी भोली बन रही थी कि तूने कुछ किया ही नहीं ,सारी गलती मेरी है जबकि सारा किया धरा तेरा है अब बता मैं तेरी चटनी बनाऊं " बड़ी मुश्किल से उसे मनाया लेकिन उस कोटेशन को हिंदी वाले सर ने बैस्ट कोटेशन से नवाजा ,ये घटना आज भी याद करती हूं तो बहुत हंसी आती है ।

Priyanka Daksh-

"मैं और मेरी फ्रेंड की बहुत अच्छी अच्छी यादें हैं हमारी तो, हर मस्ती में साथ रहते थे।मैं और वो साथ कॉलेज जाते थे एक दिन बारिश के समय हमें कॉलेज जाना था, हमारी मम्मी ने मना किया था  कि "बारिश बहुत हैं कॉलेज मत जाओ परेशानी होगी". लेकिन हम कहां मानने वाले दोनों गए और बाढ़ के पानी में गिरे और पूरा भीग गए और कॉलेज की बुक्स भी. घर आकर जो पीटे आज भी याद आता हैं तो हसीं आ जाती हैं, सच्ची मैं एक दोस्त बहुत जरूरी होता हैं हर किसी की जिंदगी में।

Rinki Pandey-

मैं और मेरी पक्की सहेली जो जिसका साथ आज भी है मेरे साथ , बिल्कुल वैसा ही जैसा पहले स्कूल कॉलेज में था | स्कूल के समय का एक वाकिया आज भी याद आता है हम दोनो की दोस्ती तोड़ने की बहुत कोशिश की जाती थी हम दोनो पक्की सहेलियां इस बात को समझ चुकी थी और हम दोनो की दोस्ती और भी पक्की हो गई हम साथ ही स्कूल पढ़े साथ ही कॉलेज भी | आज हम भले ही एक दूसरे से नहीं मिल पाते तो क्या हुआ पर दिल से दिल की यादें आज भी जुड़ी हुई हैं | जब भी हम दोनो का दिल करता है एक दूसरे को फोन मिलाते हैं ....|      

Archana  Saxena- 

मेरी स्कूल में सबसे पक्की सहेली का नाम पूनम तोमर था। हमारी दोस्ती बहुत गहरी थी और हमने खूब मस्ती भी की साथ में। पर कभी कभी लड़ाई भी हो जाती थी और लम्बी चलती थी । तब भी हमें चैन नहीं था और हम बिना बोले चिठ्ठी लिख कर एक दूसरे से बात कर लेते थे। यहाँ तक कि कौन कौन हमारी लड़ाई से कितना खुश है और जब हम लड़ाई खत्म करेंगे तो कौन कितना मायूस होगा। 
एक बार लड़ाई के दौरान ही मैं अपने घर पर बैठ कर सितार बजा रही थी अचानक सीढ़ियों से आवाज़ आई "अर्चू"
एक बार तो लगा तारों की झनझनाहट में वहम हुआ है। फिर जब दोबारा फिर सुना तो सितार रख कर देखने गई। पूनम सच में आई थी। उस दिन की खुशी बयान नहीं की जा सकती। दूरी की वजह से अब उतनी बात नहीं हो पाती परन्तु दोस्ती आज तक कायम है। और वह लिखती तो नहीं पर इस मंच की एक पाठक है। उसे टैग कर रही हूँ। कॉलेज में मेरी भारती गुप्ता से गहरी दोस्ती थी। और लोग हमें गुड़ चीटा बुलाते थे। हम तीनों ही अब भी एक दूसरे के सम्पर्क में हैं ।


Smita Chauhan-

हम स्कूल की तरफ से पिकनिक जा रहे थे ।एक बस लड़कियों के लिए  थी और हमारे प्रिन्सिपल सर भी हमारी बस में आकर ड्राईवर वाले केबिन में बैठ गये जहाँ बाकी मेडम भी थी।हम सब के साथ एक मेडम की बेटी भी थी वो बोली देखो सर कैसे हम लोगों की बस में बैठ गये हैं कुछ करते हैं की सर बस से उतर जायें ।तब हम दोस्तों ने प्लान बनाया और अतांक्षारी खेलने लगे फिर हम लोगों ने खूब तेज गाना शुरू किया, रब्बा ओ रब्बा यह डिब्बा है जनाना आया कहां से यह मुआ मर्दना ।
सर की शक्ल देखने वाली थी आगे पैट्रोल पंप पर बस रुकी तो सर तुरंत उतर कर लड़कों की बस में चढ़ गये। हम आज भी यह किस्सा याद करके बहुत हंसते हैं।


Sunita Tiwari-

स्कूल के दिनों में हमारे स्कूल के बाहर चूरन मिलता था,जो बहुत तीखा,खट्टा होता था,हम सहेलियां इमली के साथ खाते थे।  चूरन खाने की मनाही थी घर से। एक बार मेरी सहेली अनुराधा ने चूरन मेरे बैग में रखवा दिया क्योंकि उसे भी डांट पड़ती थी,वो चूर्ण एक कॉपी में फैल गया,और मेरा सारा होम वर्क उसी में डूब गया। घर पर खूब डांट पड़ी ही,स्कूल में टीचर से भी। लेकिन फिर भी हमारा चूरन इमली खाना नहीं छूटा। अब बात कभी कभी ही हो पाती है,अनुराधा से,लेकिन हम पुराने दिन जरूर याद करते है।


Alpna Shrivastava-

दसवी में थी मैं तब दो सहेलियाँ पक्की दोस्त थी ।
उस दिन  प्री बोर्ड खतम हुए थे अब हम थोड़े दिन बाद  बोर्ड परीक्षा में मिलने वाले थे । इसलिए  मैं सिन्नी और बबिता तीनो एक दूसरे के कंधे पर हाथ रख कर गाना गाते हुए पानी पीने जा रहे थे । गाना क्या था " अनहोनी को होनी कर दे होनी को अनहोनी एक जगह जब जमा हो तीनो अल्पना बबिता और सिन्नी ...
बस फ़िर क्या प्रिंसिपल ने देख लिया ,।
डायरी में पचास रुपए का फ़ाइन लिखा गया 
फ़िर तो बोर्ड रिज़ल्ट के बाद ही प्रिंसिपल से मिलना हुआ 
वो दिन वो मस्ती कभी ना भूली !!!!


Jayshree Birmi-

कॉलेज में हम तीन दोस्त थी,पढ़ाई के साथ रेसेस में नाश्ता करने के लिए बेताब रहते थे।रिसेस दो बजे रेसेज टाइम होता था ,तो पौने दो बजे ही इशारों में मेनू तय हो जाता था।
दालवाड़े खायेंगे या समोसे या भेल या कुछ और ही।आज 50 सालों के बाद भी हम तीनों फ्रेंड्स एक दूसरे से मिलते हैं पुरानी यादें की छांव में।


यह थे हमारी पिंक कॉमरेड के अपने दोस्तों के साथ बिताए खुशनुमा, यादगार पल 

अगली गुलाबी चर्चा में आपके साथ फिर जुड़ेंगे हमारे साथ बने रहिए!

 धन्यवाद

द पिंक कॉमरेड टीम

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