प्रेम रोग

प्रेम रोग

#बॉलीवुड_तड़का

#प्रेम_रोग

ये कहानी है एक सरल और उन्मुक्त युवती मनोरमा (पद्मिनी कोल्हापुरे)की जो ठाकुरों के परिवार की इकलौती लाड़ली है।उसके ताऊजी (शम्मी कपूर)नये विचार और बदलावों के पक्षधर होते हैं और गाँव मे विधवा विवाह की नींव धरते हैं।

लेकिन उन्हें एक प्रश्न का सामना करना पड़ता है कि दूसरे के मामले में निर्णय देना सरल है पर कभी आपके परिवार में यह स्थिति आई तो और नियति यह दिन जल्दी ही हवेली में भी ले आती है।

मनोरमा जिसे प्यार से मनो कहा जाता है अपने गाँव के पुजारी के भांजे देवधर(ऋषि कपूर) से काफी सहज होती है वो उसकी सखी का भाई होता है।जिसे बहुत स्नेह मिलता है हवेली में उसे  मनोरमा से प्रेम होता है लेकिन वह उसे जाहिर नहीँ करता।

मनोरमा की शादी हो तय हो जाती है बड़े ऊँचे खानदान में।उसके बड़े खानदान और रसूख़दार परिवार से सम्बंध जोड़ने के लिये मनोरमा के पिता कुंडली बदलकर भी रिश्ता तय कर देते हैं।

मनोरमा की शादी कर दी जाती है और कुछ दिनों  बाद ही उसके पति की मृत्यु भी हो जाती है।उसे मायके में विधवा जीवन की दुश्वारियों को सहना पड़ता है।

ऐसे में उसे उसकी जेठानी अपने घर ले जाती है,लेकिन उसके जेठ(रज़ा मुराद)के उस पर बुरी नज़र और दुर्व्यवहार के चलते वापस वहीँ लौटना पड़ता।

देवधर उसकी ज़िन्दगी में खुशियां भरना चाहता है,लेकिन मनोरमा का जेठ अपनी कुदृष्टि के चलते उसका दुश्मन बन जाता है।

एक बड़े खूनी सँघर्ष के बाद ताऊजी मनोरमा के जेठ को उसकी करतूतों का दंड देते हैं।देवधर को गाँव वालों का साथ भी मिलता है।

वो अपनी हवेली के नियमों को बदल कर मनोरमा का भी देवधर से पुनर्विवाह करवाते हैं और समाज को यह संदेश देते हैं कि उनके नियम अपनी बेटी के लिये भी वही हैं।

यह मूवी यह मानदण्ड भी स्थापित करती है कि दुर्घटना किसी की खुशियों पर विराम नहीं लगा सकती।विधवा विवाह एक सकारात्मक प्रयास है।

स्त्री जीवन के हर पहलू को दिखाती बेहतरीन फ़िल्म राजकपूर जी की

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