राहत इंदौरी की शायरी हम सबके घरों में सांस लेती हुई मालूम पड़ती है....

राहत इंदौरी की शायरी  हम सबके घरों में सांस लेती हुई मालूम पड़ती है....

राहत इंदौरी अपने बेबाक अदांज़ और बेहतरीन शायरी के लिए जाने जाते रहे हैं.राहत इंदौरी कोशिश किया करते कि उनकी शायरी को हर कोई समझ सके, इसके लिए वो बेहद आसान लफ्ज़ों का इस्तेमाल करते थे. यही वजह है कि उनकी शायरी , गज़लें नौजवानों ही नहीं बूढ़े, बच्चों की ज़बानों पर भी  रहती हैं। 
राहत इंदौरी साहब की कुछ शायरी और ग़ज़लों के साथ हम उन्हें श्रद्धांजलि देते हैं।

बुलाती है मगर जाने का नहींये दुनिया है इधर जाने का नहीं

मेरे बेटे किसी से इश्क़ कर
मगर हद से गुज़र जाने का नहीं

ज़मीं भी सर पे रखनी हो तो रखो
चले हो तो ठहर जाने का नहीं

सितारे नोच कर ले जाऊंगा
मैं खाली हाथ घर जाने का नहीं

वबा फैली हुई है हर तरफ
अभी माहौल मर जाने का नहीं

वो गर्दन नापता है नाप ले
मगर जालिम से डर जाने का नहीं

ये राहत इंदौरी की एक ऐसी गज़ल जो हर बच्चे की ज़बान पर है

राहत इंदौरी साहब के कुछ चुनिंदा शेरों का आनंद लीजिए:-.

1 -ज़ुबाँ तो खोल नज़र तो मिला जवाब तो दे मैं कितनी बार लूटा हूँ मुझे हिसाब तो दे। 
2. लोग हर मोड़ पे रूक रूक के संभलते क्यूँ है इतना डरते है तो घर से निकलते क्यूँ है। 
3. शाखों से टूट जाए वो पत्ते नहीं है हम आँधी से कोई कह दे के अपनी औकात में रहे 
4-तूफ़ानों से आँख मिलाओ, सैलाबों पे वार करो मल्लाहों का चक्कर छोड़ो, तैर के दरिया पार करो 
फूलों की दुकानें खोलो, ख़ुशबू का व्यापार करो इश्क़ ख़ता है तो ये ख़ता एक बार नहीं सौ बार करो।

बहुत गुरूर है दरिया को अपने होने पर जो मेरी प्यास से उलझे तो धज्जियाँ उड़ जाय 

 लाख कह दूं कि आकाश हूं ज़मीं हूं मैं 
मगर उसे तो ख़बर है कि कुछ नहीं हूं मैं 

अजीब लोग हैं मेरी तलाश में मुझ को 
वहां पे ढूंढ रहे हैं जहां नहीं हूं मैं

उनका ही एक शेर, जो आज के युवाओं को भी आगे बढऩे के लिए प्रेरित करता है...रिवायतों की सफें तोड़ कर बढ़ो वरना
जो तुम से आगे हैं, वह रास्ता नहीं देंगे।

राहत इंदौरी ने बॉलीवुड की फिल्मों के लिए भी कुछ चर्चित गीत लिखे थे।
 इसमें घातक फिल्म की कोई जाए तो ले आए, इश्क फिल्म की नींद चुराई मेरी तुमने वो सनम और मुन्नाभाई एमबीबीएस के एम बोले तो मुन्ना भाई एमबीबीएस जैसे लोकप्रिय गीत शामिल हैं।

वह उन शायरों में रहे जिनकी शायरी सिर्फ मुशायरों तक सीमित नहीं रही बल्कि मेरे आपके हम सबके घरों में सांस लेती हुई मालूम पड़ती है।


अनु गुप्ता

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