रामायण की कुछ झांकियां दादा जी के संग ( कहानी - 5 )

 रामायण की कुछ झांकियां दादा जी के संग ( कहानी - 5 )

राघव रात को दादा जी के पास ही सोता है और हर रोज सोने से पहले एक कहानी जरूर सुनता है। 

आज भी उसने दादा जी से पूछा - दादा जी , आज आप मुझे कौन सी कहानी सुनाएंगे?

दादाजी - राघव बेटा , तुम बताओ तुम क्या सुनना चाहते हो ? क्या आज भी मैं तुम्हें रामायण से ही कोई कहानी सुनाऊं?

राघव: हां जी ! दादा जी, मुझे रामायण बहुत अच्छी लगती है आप वहीं से कुछ सुनाइए।

दादाजी: ठीक है बेटा, मैं तुम्हें आज भाइयों का एक दूसरे से प्यार कैसा होना चाहिए, यही बताऊंगा।

बेटा तुमने देखा होगा कि जब राम जी के राज्य अभिषेक की घोषणा हुई तो केकई माता ने कहा कि वो अपने बेटे भरत को ही राजा बनाना चाहती है। 

रामजी को जैसे ही अपनी माता की इच्छा का पता चला तो उन्होंने तुरंत हां कर दी और अपने भाई के लिए राज्य छोड़कर मां के आदेश पर वन को प्रस्थान कर लिया।

लेकिन जब भरत को इस बात का पता चला कि उनकी माता ने ऐसे किया है तो वह बहुत विचलित हो गए और उन्होंने भी राज्य अभिषेक करवाने से इंकार कर दिया ।

ना सिर्फ इतना ही बल्कि वो अपनी सेना के साथ वन की तरफ चल दिए, ताकि वह जाकर राम जी से मिलें और उनका राज्य अभिषेक करके उन्हें वापस ले आएं। 

बेटा , भाई के लिए भाई के प्रेम का इससे बड़ा उदाहरण कहां मिलेगा। तुमने देखा होगा कि जब राम जी ने उनके साथ आने से मना कर दिया तो वह उनकी चरण पादुका ले आए जिसे कि तुम उनके जूते भी कह सकते हो, और जब तक राम वनवास में रहे भरत ने उनकी पादुका को ही सिहासन पर स्थापित करके रखा और स्वयं कभी भी राज सिंहासन पर नहीं बैठे।

बेटा , भाइयों में प्रेम ऐसा ही होना चाहिए कि किसी भी लोभ या लालच में आकर एक दूसरे से दूर ना हो, विमुख ना हो और एक दूसरे के लिए त्याग की भावना हमेशा मन में बनाए रखें।

अब बताओ राघव , तुम्हें यह कहानी कैसी लगी?
राघव: दादा जी , बहुत अच्छी लगी। आज से मैं गुड़िया के साथ लड़ाई नहीं किया करूंगा और उसे अपने हिस्से की चॉकलेट भी दे दिया करूंगा।
दादा जी: बहुत अच्छी बात है, बेटा ‌।
हां बच्चे , जीवन में धन - दौलत नहीं , रिश्ते महत्त्वपूर्ण होने चाहिएं।

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