सदमा

सदमा

श्रीदेवी हम लोग के बीच नहीं है, पर बचपन से ही मुझे श्रीदेवी बहुत पसंद है। उनकी मूवी "सदमा" जो मुझे बहुत अच्छी लगती थी ।मैंने कई बार देखी है।
 कमल हसन और श्रीदेवी इसमें मुख्य भूमिका में थे।  बालू महेंद्र द्वारा निर्देशित यह फिल्म 1983 मे आयी थी।

  यह फिल्म एक तमिल फिल्म का रिमेक थी। इस फिल्म को फिल्म फेयर पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था। इसके अभिनेता कमल हसन, अभिनेत्री श्रीदेवी उनको भी बेस्ट एक्टर, एक्ट्रेस का अवार्ड मिला था।

 फिल्म की कहानी

फिल्म नेहलता मल्होत्रा (श्री देवी) की कहानी बताती है जो एक युवा महिला है । कार दुर्घटना में सिर में चोट लगने से भूलने की बीमारी हो गई है, जिसके कारण वह बचपन में वापस चली जाती हैं। अब वह अपने माता पिता को नहीं पहचान पाती । मानसिक रूप में एक बच्चे की अवस्था में आ जाती है। उनका जब इलाज चल रहा था, तो उनका अपहरण हो जाता है, और  उसको कोठे पर बेच दिया जाता है। वहां पर सोम प्रकाश उर्फ सोमू( कमल हासन) अपने दोस्त के साथ पहुंचता है, और वह रेशमी जोकि कोठे की मैडम ने स्नेह लता का नाम रखा था,से मिलता है। उसने देखा कि वह मानसिक रूप से कमजोर है तो उसे समझ में आ जाता है। यह इनको जबरदस्ती यहां ले आये हैं।

 वह मैडम को पैसे देकर  रेशमी को अपने साथ ऊटी ले जाता है ऊटी मे एक स्कूल में  टीचर है वह। अपने घर में रेशमी को अपने साथ ही रखता है और उसे खुश रखता है तथा देखभाल करता है। धीरे धीरे उसको प्यार करने लगता है।

 नेहलता के पिता  पुलिस के माध्यम से अपनी बेटी को खोज रहे थे। अपनी खोई हुई बेटी के बारे में अखबार में विज्ञापन निकालते हैं। उधर दूसरी तरफ सोमू रश्मि को एक डॉक्टर के पास ले जाता है।और इलाज के बाद रेशमी ठीक हो जाती है।
 सोमू के ना रहने पर पुलिस घर पहुंचती है पुलिस को पता चला कि डॉक्टर की पास इलाज के लिए गई है तो पुलिस वहां पहुंचती है पुलिस के डर से सोमू सामने नहीं आता। रेशमी अपनी याददाश्त वापस पा लेती है। पूरी तरह से अपनी बीमारी से रिकवरी के बाद बीच की अवधि को भूल जाती है। अब ठीक होने के बाद  नेहलता, पिता और उसकी पत्नी खुश है। डॉक्टर से नेह लता के पिता को पता चलता है कि जो व्यक्ति इसे यहां आया था उनकी बेटी का अच्छे से देखभाल कर रहा था।

 वह अपने पुलिस शिकायत वापस ले लेते है । रेशमी को अपने साथ घर ले जाते है।  सोमू को जब पता चला तो उसके पीछे दौड़ता हुआ जाता है रेशमी ट्रेन से यात्रा कर रही है। ध्यान आकर्षित करने के लिए बंदर की तरह डांस करके दिखाता है। रेशमी उसको पागल समझ के खाने के लिए कुछ सामान दे देती है, और अंत में बहुत ठोकर खाकर गिर जाता है। सोमू अकेला रह जाता है। उसका दिल टूट जाता है। एक गहरा सदमा सोमू को लगता है। कहानी का यही अंत हो जाता है। बहुत ही दर्दनाक और हृदयस्पर्शी कहानी है। मूवी का अंत देख कर बहुत रोना आता है।

आज श्रीदेवी हमारे बीच नहीं है लेकिन उनकी उम्दा अभिनय की वजह से वह हमेशा हमारे दिलों में जिंदा रहेंगी। एक बार जरूर आप उनकी यह मूवी देखिएगा। उनकी बड़ी-बड़ी बोलती हुई आंखें व मोहक मुस्कान को कभी भी  भुलाया नहीं जा सकता।

 धन्यवाद

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