सीमा ढाका आजकल क्यों चर्चा में है ?

 सीमा ढाका आजकल क्यों चर्चा में है ?

सीमा ढाका इन दिनों सुर्खियों में हैं उनके जस्बे और हिम्मत से हम सब वाकिफ हैं दिल्ली पुलिस की महिला हेेड कांस्टेबल सीमा ढाका ने 76 बच्चों को ढ़ाई महींने में ढूंढ निकाला है और कितने मासूमोंं के चेहरे पर फिर से मुस्कान वापस ले आई हैं | हेड कांस्टेेेेबल सीमा ढाका आउट-ऑफ-टर्न प्रमोशन से अब ASI बन गई हैं आउट-ऑफ-टर्न प्रमोशन पाने वाली वह पहली महिला पुलिसकर्मी बन गई हैं | 

पुलिस कमिश्नर एस. एन. श्रीवास्तव ने दिल्ली पुलिस मुख्यालय में सीमा की वर्दी पर सितारे लगाकर प्रमोशन के लिये उन्हें बधाई दी है | पुलिस आयुक्त एस. एन. श्रीवास्तव ने इस साल 5अगस्त को गुमशुदा बच्चों को खोजने के काम को प्रोत्साहित करने के लिये यह घोषणा की थी इसके तहत कोई भी हेड कांस्टेबल या कांस्टेबल अगर एक साल में 14 वर्ष से कम उम्र के न्यूनतम 50  गुमशुदा बच्चों की तलाश करेगा तो उसे आउट-ऑफ-टर्न प्रमोशन दिया जायेगा | जानकारी के अनुसार सीमा ढाका ने जिन  76 गुमशुदा बच्चों को ढूंढा है उनमें से 56 बच्चों की उम्र 14 वर्ष से भी कम है | 

 सीमा ढ़ाका ने दिल्ली , पश्चिम बंगाल , उत्तर प्रदेश , पंजाब , बिहार और हरियाणा के बच्चों को बचाया है सीमा के अनुसार उनके लिये यह सबसे चुनौतीपूर्ण कार्य में इस साल अक्टूबर के महींने में पश्चिम बंगाल से एक नाबालिग को छुड़ाना था | पुलिस दल ने नावों के जरिये खोजबीन की और बाढ़ के दौरान दो नदियों को पार करना था आखिर हम बच्चे तलाशने में कामयाब हो गये | सीमा ने यह भी बताया कि उनके सीनियर्स और टीम के सदस्यों ने उन्हें इस प्रमोशन को दिलाने में मदद की है साथ ही उन्होंने कहा कि " मैं भी एक मां हूं और कभी नहीं चाहती कि कोई अपना बच्चा खोए | मैं उन्हें बचाने के लिये भरसक प्रयास करती हूँ "                                 सीमा ढाका ने अपने अदम्य साहस के के दम पर ही तीन महींने में 76 बच्चों को तलाशने में कामयाबी हासिल कर ली है और उन्हें नई इसेंटिव स्कीम के तहत प्रमोशन दिया गया है सीमा ने कहा कि इतने दिनों तक बिना छुट्टी के काम करने का आज मुझे परिणाम मिल गया है मैं इससे बेहद खुश हूं | गुमशुदा बच्चों को उनके माता पिता के साथ फिर से मिलाना मुझे बहुत खुशी देता है मुझे खुशी है कि पुलिस कमिश्नर ने मेरे काम को सराहा और पुरस्कृत किया है इससे दूसरों को भी प्रोत्साहन मिलेगा |

सीमा शिक्षक वाले परिवार से हैं उनके घर में ज्यादातर लोग टीचिंग से जुड़े हुए हैं सीमा ढाका 2006 से दिल्ली पुलिस में सेवा दे रहीं हैं उनकेे काम करने का अंदाज ,ईमानदारी और निष्ठा तारीफ के काबिल है सीमा ढाका उत्तरी दिल्ली में समयपुर बदली थाने में तैनात हैं | सीमा ढाका के इस साहसिक कार्य से कितने दुखी परिवारों की खुशियां फिर से वापस लौट आई हैं उन्होंने छोटे बच्चों को उनके गलत इस्तेमाल और शोषण से बचाया है सीमा ढाका की हिम्मत की जितनी तारीफ की जाये वह कम है और सीमा ढाका बधाई की पात्र भी हैं |                                                                                                                              रिंकी पांडेय 

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