कौन हैं यह शकुंतला देवी जिनका ट्रेलर मचा रहा है धूम

कौन हैं यह शकुंतला देवी जिनका ट्रेलर  मचा रहा है धूम

विद्या बालन की फिल्म 'शकुंतला देवी'  जल्द ही आप इसे अमेज़न प्राइम पर देख सकते हैं । चलिए जानते हैं कि कौन थी शकुंतला देवी …… मैथ रिजॉर्ट्स 'शकुंतला देवी' जो जीते जी एक किवंदती बन गई । वह इतनी तेजी से कठिन से कठिन कैलकुलेशन को भी सेकंड में करती थी कि लोग चकित रह जाते थे ।

विद्या बालन अभिनीत फिल्म शकुंतला देवी का ट्रेलर यूट्यूब पर रिलीज़ किया गया। इसके बाद वो वहाँ ट्रेंड करने लगा। जिसने भी यह ट्रेलर देखा होगा निश्चित तौर पर वह शकुंतला देवी को जानने के लिए उत्सुक है कि वह कौन थी ….आखिर उन्होंने ऐसा क्या कर दिया कि उन पर फिल्म बन गई । मोटे तौर पर यह कहा जा सकता है कि शकुंतला देवी जो शख्सियत थी उन्होंने गणित की गणना में कंप्यूटर होने की प्रसिद्धि हासिल कर ली थी। पूरी दुनिया उनकी खास प्रतिभा की कायल हो गई थी । हालांकि उनका जीवन तमाम उतार-चढ़ाव से भरा हुआ था ।

शकुंतला देवी को कितना भी बड़ा कैलकुलेशन दिया जाता था, वह उसे ऐसे हल कर देती थी कि लोग दंग रह जाते थे । शकुंतला देवी ने उस जमाने में मैथ वंडर गर्ल के तौर पर तहलका मचाना शुरू कर दिया जब दुनिया में कंप्यूटर के बारे में कोई नहीं जानता था । ऐसे केलकुलेटर भी तैयार नहीं हुए थे जो बड़ी से बड़ी संख्या का गुणा-भाग-घटा और जोड़ कर दें । शकुंतला देवी जब यह काम तुरंत जुबानी कर दिखाती थी तो लोग चकित रह जाते थे। 

किसी भी यांत्रिक सहायता के बिना जटिल गणितीय समस्याओं को सुलझाने वाली उनकी असाधारण प्रतिभा बचपन से ही सामने आने लगी थी । उन्हें यह प्रतिभा स्वाभाविक तौर पर मिली थी । इसलिए जब कंप्यूटर काप्रचलन शुरू हुआ तो उन्हें मानव कंप्यूटर का नाम दे दिया गया ।

शकुंतला देवी का जन्म 4 नवंबर 1939 को बेंगलुरु में हुआ था। पिता सर्कस कलाकार थे। उन्होंने बेटी को ताश के पत्तों के जरिए गणित की दुनिया से रूबरू कराया । शकुंतला में बचपन से ही गजब की स्मरण शक्ति थी। तीन साल की उम्र से ही वह गणनाओं का प्रदर्शन करने लगी थी। 

शकुंतला देवी को बचपन में कोई औपचारिक शिक्षा नहीं मिली थी । ताश खेलते हुए उन्होंने कईं बार अपने पिता को हराया । तब पिता को बेटी की खास क्षमता के बारे में पता चला । फिर पिता ने सर्कस छोड़ शकुंतला देवी पर सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित करना शुरू कर दिया । शकुंतला को लोकप्रियता मिलने शुरू हुई। शकुंतला देवी उस समय पहली बार खबरों की सुर्खियों में आई ,जब बीबीसी रेडियो के कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अंक गणित का एक जटिल सवाल पल में हल कर दिया । धीरे-धीरे कुछ वर्षों में शकुंतला की स्मरण शक्ति और कैलकुलेटिंग स्किल मजबूत होने लगी । उनकी असाधारण क्षमता और प्रतिभा का सार्वजनिक प्रदर्शन मैसूर विश्वविद्यालय और अन्नामलाई विश्वविद्यालय से शुरू हुआ । फिर दुनिया भर के संस्थानों में फैल गया । 

एक कुशल गणितज्ञ होने के साथ साथ-साथ वह एक ज्योतिष की भी अच्छी जानकारी रखती थी , सामाजिक कार्यकर्ता और लेखक भी थी । उन्होंने कुछ किताबें भी लिखी - द ज्वाय ऑफ नंबरस ,  एस्ट्रोलॉजी फॉर यू  , परफेक्ट मर्डर  और द वर्ल्ड ऑफ होमोसेक्सुअलस। 

शकुंतला देवी कैसी भी जटिल गणितीय समस्याओं को सुलझाने में निपुण थी। उनकी प्रतिभाओं में जटिल-लॉजिक और वैदिक गणित के साथ जोड़-गुणा-भाग-वर्गमूल- घनमूल की घटनाएँ शामिल थी । 

वह पिछली सदी के दिन-सप्ताह-तारीख को बताने के लिए भी एक पल नहीं लेती थी । शकुंतला देवी का लंबी बीमारी के बाद हृदय गति रूक जाने और गुर्दे की समस्या के कारण 21अप्रैल 2013 को बैंगलुरू में 83 वर्ष की आयु में निधन हो गया।

द पिंक कॉमरेड ऐसी प्रतिभा को सलाम करता है।

मधु धीमान

पिंक कॉलमनिस्ट-हरियाणा

Image credit:- News 18

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