शकुन्तला देवी कहानी है प्यार के तलाश की एक औरत के संघर्ष की

शकुन्तला देवी कहानी है प्यार के तलाश की एक औरत के संघर्ष की

शकुंतला को बचपन से सुपरमैन नहीं, बल्कि सुपरवूमेन बनना है। वे सामान्य जीवन नहीं जीना चाहती। 
इसके लिए वह लदंन चली जाती हैं। कहानी में असली मोड़ तब आता है, जब शकुंतला खु़द माँ बनती हैं। फिर शुरू होतीहै  शकुंतला के लाइफ की दूसरी जंग। 
स्वतंत्र जीवन और परिवार के बीच शकुंतला लगातार पिसती नज़र आती हैं। यह जंग शकुंतला अपने जीवन के आखिरी  तक लड़ती हैं। 
फ़िल्म की कहानी में शकुंतला देवी के बहाने स्वतंत्र  महिला और उनकी जीवन की भावनाओं को व्यक्त किया गया है।
शकुन्तला देवी असाधारण प्रतिभा की धनी औरत की कहानी है जिसे प्यार की तलाश रही. उसे लगता रहा कि वह अपने तरीके से क्यों नहीं जी सकती? 
कहा जाता है कि जैसा हम करते हैं वो हमारे आगे आता है. माँ से नफरत कितना बड़ा गुनाह है वह तब समझ में आता है जब खुद की बेटी शकुंतला देवी से कोई रिश्ता नहीं रखना चाहती शकुंतला की जिंदगी में समस्या बराबर बनी रहती है।
 प्यार की, विश्वास की, अकेलेपन की. जिद और अहंकार बार-बार मुश्किलें खड़ी करते रहते हैं।
शकुंतला देवी ' की कहानी उस  शकुंतला की है जो बचपन से मैथ की जीनियस है, लेकिन अपनी शर्तों पर जीती है. चाहे वह उसका बचपन हो, जवानी या फिर बुढ़ापा. उसे आजादी के साथ जीना है. तभी तो यह शकुंतला बचपन में यह कहने से नहीं झिझकती की वह घर की अप्पा है क्योंकि सभी घरों के अप्पा कमाकर लाते हैं, और वह कमाती है तो इस तरह घर की अप्पा तो वही हुई....यह सीन वाकई हर महिला को गर्व से भर देने वाला है।
दुनियाशकुंतला को ह्यूमन कंप्यूटर के नाम से पुकारती  है। लेकिन एक महिला की जिंदगी इतनी आसान कहां।
 शकुंतला देवी की उपल्ब्धियों के साथ यहां उनकी बेटी के साथ उनके रिश्तों को भी करीब से दिखाने की कोशिश की गई है।  ‘शकुंतला’ के जीवन को मां-बेटी के रिश्ते पर फोकस भी किया गया है ।
 बाकी फिल्म में और क्या-क्या ट्विस्ट हैं ये देखने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी।
फ़िल्म के आखिर में एक गाना है, 'पास नहीं तो, फेल नहीं'। फ़िल्म इस गाने पर बिल्कुल खरी उतरती है। 

अनु गुप्ता

What's Your Reaction?

like
0
dislike
0
love
0
funny
0
angry
0
sad
0
wow
0