श्रंगार...  जिसे देखने का अपना- अपना नजरिया है 

श्रंगार...  जिसे देखने का अपना- अपना नजरिया है 

श्रंगार
 जिसे देखने का अपना- अपना नजरिया है 
किसी के लिए बंदिशे तो
 किसी के लिए सारी दुनिया है 

बिंदिया
 किसी के लिए है चेहरे का नूर 
 किसी को इसके पीछे
 दाग नजर आता है हजूर 
सिंदूर
 किसी के लिए ये
 पिया जी का प्यार 
किसी के लिए
 लाल रंग ही तो है यार 
चूड़ियाँ 
किसी को प्यारी लगे
 इनकी खनक 
किसी को नजर आए 
हथकड़ी की झलक
 मेहंदी
 किसी को लगे सज गए हाथ
 किसी को लगे बेकार का है स्वांग 
 पायल
 किसी को प्यारी लगे 
 इनकी झनककार 
किसी को लगे 
ये शोर करती अपार 
बिछुये 
किसी को लगे सुहाग की निशानी
 किसी को लगे ये बातें पुराने 
गहने 
किसी के लिए ये 
शानो शौकत 
किसी के लिए हैं 
बुरे समय की जरूरत

 इसलिए अब जब जब श्रृंगार को लेकर आए विपरीत विचार तो समझ जाइए यह सोच समझ का फर्क है जनाब

आप सबके इस बारे में क्या है विचार बताईगा जरूर रहेगा आपका आभार!


अनु गुप्ता

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