एक शाम ताज महोत्सव के नाम

एक शाम ताज महोत्सव के नाम

"ताज महोत्सव" अपने आप में आगरा की अद्भुत व रोचक पहचान बन चुका है। जिस प्रकार से ताजमहल खूबसूरती के लिए विश्वव्यापी प्रसिद्ध अद्भुत इमारत है उसी तरह ताज महोत्सव भी  सांस्कृति की कई विधाओं के संगम के लिए विश्वव्यापी प्रसिद्धि प्राप्त कर रहा है। इस महोत्सव में भारतीय संस्कृति, कला, साहित्य, शिल्प, भारतीय व्यंजनों का एक ही मंच में  आनंद लिया जा सकता है।

ताज महोत्सव की आधारभूत प्रेरणा मुगलकालीन काल में लगने वाली बाज़ार ए ख़ास से लिया गया है, जहां बादशाहा तथा उनकी बेगम वर्ष में एक बार ऐसी बाज़ार का आयोजन करते थे, जहां भारत की हर प्रसिद्ध वस्तु, कला ,व्यंजन एक ही स्थान पर एकत्रित कर ,उनकी प्रदर्शनी की जा सके। और आम और ख़ास लोगों तक आसानी से पहुंची जा सके।

इसी उपरोक्त विचारधारा को स्थानीय प्रशासन ने योजनाबद्ध तरीके से ताज महोत्सव का नाम दिया, यह वार्षिक 10 दिवसीय उत्सव है जिसमें भारत भर के राज्यों से आने वाले लगभग 350 शिल्पी अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं, सरकारी प्रशासन द्वारा आवंटित शिल्पग्राम में स्टॉल दी जाती है, यहां भारत के जम्मू कश्मीर से लेकर दक्षिण भारत की कलाओं, शिल्प कारीगरी, लकड़ी के सामान, मिट्टी के बर्तन, सुंदर सुंदर वस्त्र, आकर्षित आभूषण की प्रदर्शनी के साथ प्रादेशिक व्यंजनों का भी आनंद लिया जाता है।

ताज महोत्सव के रूप में मिले इस तोहफे  की शुरुआत  1992 में ताजनगरी के पूर्वी गेट पर स्थित शिल्पग्राम में हुई। जैसे कि नाम से ही विदित है शल्पियों का गांव 10 दिन के लिए यह स्थल शिल्पियों के गांव की तरह लगने लगता है। शुरुआती दिनों में इसका प्रारूप गांव में लगने वाले मेले की ही तरह था, इस महोत्सव को प्रसिद्ध व विश्वव्यापी बनाने के लिए कई दशकों से कई परिवर्तन किए गए और इसका ग्लैमराइजेशन किया गया।

हर वर्ष एक थीम के अंतर्गत ताज महोत्सव का आयोजन किया जाता है, शिल्पियों के साथ-साथ, भारत के प्रसिद्ध कलाकारों, बॉलीवुड सिंगर, अभिनेता -अभिनेत्रियों, के साथ हास्य कलाकारों, साहित्य कलाकारों को भी आमंत्रित किया जाता है ताकि वह इस मंच के द्वारा  अपनी प्रस्तुतियों को प्रस्तुत कर सके। जिन्हें देखने व सुनने के लिए आगरा की आम जनता के साथ साथ आगरा आए सेनानी भी उत्सुक रहते हैं।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन शाम के समय शिल्पग्राम में विशेष रूप से बनाए हुए मंच के द्वारा होता है साथ ही नूरजहां प्रेक्षागृह घर में स्थानी कलाकारों के कार्यक्रम पूरे दिन चलते हैं, सूर सदन में नाटक, कवि सम्मेलन तथा मुशायरे का आयोजन होता है,सदर बाजार के मंच पर भी सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन ताज महोत्सव में चार चांद लगा देते हैं।

एक आम मेले से खास महोत्सव में परिवर्तित हुआ यह हर बच्चे से लेकर बूढ़े व्यक्ति के दिल में अपनी अटूट छाप छोड़ता है।ताज महोत्सव एक ऐसा मंच है जहां संस्कृति, कला, साहित्य ,व्यंजन का अनूठा संगम देखने को मिलता है।लखनऊ की चिकन कारीगरी से लेकर, राजस्थान,गुजरात की कला, कश्मीरी समान इस महोत्सव की सुंदरता और बढ़ा देते हैं।

बच्चों के लिए भी ताज महोत्सव में अलग से झूलों का आयोजन किया जाता है। प्रशासनिक शासन लोगों की सुरक्षा व सुविधा के लिए तत्पर कार्यरत रहते है। वाहनों की पार्किंग की भी यहां पर सुविधा उपलब्ध है।ताज महोत्सव का बेसब्री से इंतजार यहां के वासियों के साथ- साथ सेनानियों को भी रहता है जो इस विशेष समय अवधि में आगरा आने का प्रोग्राम बनाते हैं और ताज महोत्सव से कई अद्भुत कलाकृति को अपने साथ ले जाते हैं, साहित्य प्रेमियों के लिए भी यहां पर कई साहित्यकारों की पुस्तकों के स्टॉल देखने को मिलते हैं।

अद्भुत आभूषण   भी किसी  महिलाओं को अपनी और आकर्षित  किए  बिना नहीं मानते। सुंदर-सुंदर पोशाकों के स्टॉल पर महिलाओं का जमावड़ा देखने को मिलता है भारतीय, इंडो वेस्टर्न, वेस्टर्न पोशाकों की कई स्टॉल देखने को इस महोत्सव में मिलती हैं। रंग बिरंगी राजस्थानी, गुजराती बेडशीट ,पिलो कवर , रंग बिरंगी हाथों में पकड़ने वाले पोटली पर्स, कपड़े के पर्स, लेदर बैग, रंगीन चूड़ियों से सजा हुआ यह महोत्सव दिल को मोह लेता है।

इलेक्ट्रॉनिक खिलौनों के साथ साथ अद्भुत लकड़ियों के खिलौने ताज महोत्सव की शान को और बढ़ाते हैं, खानों के स्टॉलों से आने वाली खुशबू भूख को और बढ़ा देती है। लखनऊ के लाजवाब पकवान, दक्षिण भारत के इडली ,डोसा ,सांभर,तथा छोले भटूरे, पाव भाजी, गुजराती राजस्थानी थालियां आपको अनायास ही इन स्टॉलों की तरफ मोड़ लेती है।

शिल्पग्राम में स्थित एक मज़ार आपकी आस्था को और बढ़ा देती है जब भी आप ताज महोत्सव जाएं यहां पर माथा टेकना ना भूलें।
 पिछले कुछ वर्षों से यहां आ रहे शिल्पयों  की संख्या में कमी आ रही है, कुछ शिल्पियों का कहना है कि प्रशासन द्वारा आवंटित की गई स्टॉल की कीमत हर वर्ष बढ़ती जा रही है तथा बढ़ती हुई महंगाई के कारण उन्हें लागत तक नहीं मिल पा रही है, इस वर्ष कोविड-19 का प्रभाव भी इस मेले में अवश्य पड़ेगा। आगरा की शान कहीं जाने वाले ताज महोत्सव को आर्थिक संरक्षण की अति आवश्यकता है। अतः प्रशासन को इस खूबसूरत उत्सव को बचाने के लिए अपनी नियमावली में कुल परिवर्तन करने की आवश्यकता है।

ताज महोत्सव की दीवानगी विदेशी सैलानियों में  देखते ही बनती है वह बहुत ही करीब से भारतीय संस्कृति को जानने के लिए इस ताज महोत्सव का रुख किए बिना  नहीं मानते, इस ताज महोत्सव में एक मिनी भारत देखने को मिलता है। देसी -विदेशी सेनानी आगरा आने का प्रोग्राम ताज महोत्सव के आसपास बनाते हैं ताकि  ताजमहल के साथ साथ ताज महोत्सव का  लुफ़्त भी उठा सकें। उत्सवों में उत्सव को ही महा उत्सव कहां जाए तो ताज महोत्सव इस परिपाटी में पूरा उतरता है। ताज महोत्सव के दौरान पूरा आगरा दुल्हन की तरह लगता है और हर एक आगरा वासी 10 दिन तक ताज महोत्सव का आनंद अवश्य लेता है।
 

आप अपने जीवन की एक शाम, अवश्य ताज महोत्सव के नाम करें।
 

#मेरा शहर, मेरी पहचान

What's Your Reaction?

like
0
dislike
0
love
0
funny
0
angry
0
sad
0
wow
0