शुक्रिया 20220 ना मिलेंगे तुमसे दुबारा

शुक्रिया 20220 ना मिलेंगे तुमसे दुबारा

प्रिय 2020,

तुमसे रुख़सत होने के कुछ ही सप्ताह बचे है।बेहतरीन यादों के साथ तुम मेरे जेहन में ताउम्र रहोगे।बेशक अधिकांश लोगों ने तुम्हें कोसा ही है,पर मेरे लिये तुम  अब तक सर्वश्रेष्ठ वर्षो में स्थान रखते हो।

जैसा कि तुम्हें पता ही है कि कितनी व्यस्त दिनचर्या रहती थी हमारी।सुबह से शाम तक बस दौड़े ही जा रहे थे।ना ठीक से खाना खाने की फुर्सत ,ना दो पलों का आराम।सुकूँ के पल क्या होते हैं ये मैं अप्रैल 2019 से भूलने लगी थी।सुबह 4:30 बजे घर छोड़ देना। दिन भर में लगभग 230 km की थका देने वाली यात्रा।उस पर हमेशा की तरह चेहरे में मुस्कुराहट लेकर तरो ताज़ा हो अपने छात्रों के सम्मुख जाना,उन्हें गणित जैसे जटिल विषय मे रुचि दिलवाना,उन्हें हर रोज़ नयी ज़िन्दगी जीने के लिये प्रेरित करना।बहुतों के लिये मेंटर का काम करना।शारीरिक और मानसिक थकावट को कभी भी दूसरे के सामने न लाना ये मेरा सबसे बड़ा प्लस पॉइंट था।

खैर खुद स्वप्न देखती थी और दूसरों को भी प्रेरित करती थी।जाड़ो की छुट्टियां पढ़ चुकी थी और हम तुम्हारा आगाज़ कर चुके थे।जनवरी 2020 के प्रथम सप्ताह बेटा मासूमियत से बोला"मोमी आपके लिये ये दस की छुट्टियों में खूब आराम करना..आपने पूरा वर्ष सफर में ही काटा है.."वो बहुत कुछ मुझसे कहना चाहता था पर कह नहीं पाया मैं पढ़ चुकी थी उन नन्ही आँखों को।

उसके सो जाने के बाद पति महोदय से बात की पर उनका ये सप्ताह बहुत ही बिजी था।वो खुद हमें समय नहीं दे सकते थे।तो देर रात हवाई टिकट बुक करवा अगले दिन 12:30pm की हमारी फ्लाइट थी।सुबह ये सरप्राइज़ देख उंसकी आँखों की चमक ने वर्ष भर की सारी थकान मिटा दी।और इस तरह हम कुछ दिन की आउटिंग के लिये ऋषिकेश चले गए।दो दिन की छुट्टी अभी बाकी थी एक शाम मैं पति सँग इवनिंग वाक में थी,अचानक से एक छोटे से सुन्दर नए बन रहे ड्यूप्लेक्स में हमारी नज़र गयी।और शायद वो घर मेरे लिये ही बना था,तुरन्त मैंने खुद की सेविंग से उसे ले लिया।17 फरवरी को उंसकी रजिस्ट्री हुई और लॉक डाउन में ही 27 मार्च को हम उसमें शिफ्ट हो गए।

इस वर्ष जितना समय हम तीनों ने एक दूसरे के साथ बिताया है वो इन सोलह वर्षो में सबसे ज्यादा और क़्वालिटी समय रहा।बेटे का उपनयन संस्कार भी इसी वर्ष मई में हुआ।बेशक कोई शामिल नहीं हो पाया पर दिली ख्वाईश पूरी हो गयी।अनगिनत पल तुमने मेरी झोली में इस वर्ष डाल दिये।इसलिये बेशक तुम्हें सबने कोसा है, पर मेरे लिये तुम बेहतरीन थे।

कोरोना के कारण तुम पर दाग तो लग ही गया।इसमे कोई शक नहीं कि बहुत बड़ा सबक भी तुम लोगों को देकर ही जा रहे हो।जो नियम तुमने बनाये आशा करूँगी भविष्य में भी उन नियमों और स्वच्छता का हम पालन करते रहें।भविष्य के लिये प्रार्थना करूँगी कि आने वाला वर्ष कोरोना मुक्त हो और हम सब एक स्वच्छ और बीमारी रहित वर्ष में चिन्ता मुक्त होकर प्रवेश करें।अच्छा अब कलम को विश्राम देती हूँ, वैसे तो शब्द सीमा तय है पर मैने गिने भी नहीं कि कितने शब्द लिख चुकी।अच्छा चलो तुम से दुबारा फिर कभी ना मिलने का वादा करती हूँ।

bye bye2020

स्नेह
सर्वाधिकार सुरक्षित।

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