"द गर्ल ऑन द ट्रेन में परिणीति की अदाकारी"

"द गर्ल ऑन द ट्रेन में परिणीति की अदाकारी"

"द  गर्ल ऑन द  ट्रेन में लाजवाब परिणीति"
कोरोना की महामारी ने हमारे दिल  दिमाग को आहत करके रख दिया है। पिछले एक साल से ना कहीं आते-जाते है, ना कोई मनोरंजन का माध्यम खुला था। ऐसे में कुछ वेब सिरीज और फिल्मों से दिल बहलाना अच्छा लगा। हाल ही में प्रदर्शित हुई परिणीति चोपडा की फ़िल्म र्ल  ऑन ट्रेद न चर्चा में है।


ये फ़िल्म 2015 में ब्रिटेन-अमेरिका में प्रकाशित हुए एक उपन्यास से प्रेरित है। जिम्बाब्वे में जन्मी ब्रिटिश लेखिका पॉला हॉकिन्स का यह उपन्यास घरेलू हिंसा, शराब और ड्रग्स के बीच तीन महिलाओं के जीवन पर आधारित था। 2016 में इस पर अमेरिका में साइकोलॉजिकल थ्रिलर फिल्म बनी और बॉक्स ऑफिस पर सफल रही। अब लेखक-निर्देशक रिभु दासगुप्ता ने इसे हिंदी में बॉलीवुड अंदाज में बनाया है।

ये कहानी सिर्फ़ और सिर्फ़ मीरा देव "परिणीति चोपड़ा" के बारे में है जो पेशे से वकील है। लेकिन पिछले एक साल से बहरूपिया की तरह इधर-उधर भटक रही है। शादी जरूर हुई है लेकिन वहां भी बवाल हैं। एक एक्सीडेंट की वजह से मीरा का मिसकैरेज हो जाता है, वो मिसकैरेज उसे भूलने की बीमारी देता है और हर कोई उसका फायदा उठाने लगता है।
इन मुद्दों टिकी परिणीति की फिल्म द गर्ल ऑन ध ट्रेन बनी है
अब यहां देखने को मिलता है कहानी का दूसरा सेगमेंट जहां पर एंट्री होती है नुसरत (अदिति राव हैदरी) की जिसका बीच जंगल में मर्डर हो जाता है। उसके मर्डर के तार कहने को कई लोगों से जुड़ते हैं, लेकिन एक तार मीरा से भी जुड़ जाता है। क्योंकि मीरा को भूलने की बीमारी है, ऐसे में उसे इस मर्डर या फिर उस घटना से जुड़ा कुछ याद नहीं है। 
अब कहानी के इन दो भाग से ही कई सारे सवाल उठते हैं। पहला, मीरा का एक्सीडेंट किसने करवाया था? दूसरा- मीरा का नुसरत के मर्डर से क्या कनेक्शन? तीसरा मीरा गुनहगार या फिर उसकी भूलने की बीमारी का फ़ायदा उठाया जा रहा है ? रिभु दासगुप्ता निर्देशित फ़िल्म में परिणीति ने अदाकारी में जान ड़ाल दी है यही फिल्म का सबसे बड़ा प्लस प्वाइंट है।
कई फिल्में ऐसी देखने को मिलती हैं जहां पर हो सकता है कि कहानी में कमी रह गई हो, डायरेक्शन में भी कमी होगी, लेकिन फिर भी क्योंकि एक्टिंग डिपार्टमेंट बढ़िया रहता है, इसलिए वो फिल्म पसंद आ जाती है. रिभू दासगुप्ता ने हमेंं जो The Girl On the Train का देसी वर्जन परोसा है, यहां भी यही देखने को मिला है। परिणीति चोपड़ा ने इस फिल्म के लिए अलग ही लेवल पर मेहनत की है, वह अपने कंफर्ट जोन से बाहर आईं, इसलिए तारिफ़ तो बनती है। परिणीति ने अपने दम पर ही इस ट्रेन को सही मुकाम तक पहुंचा दिया है। इस फ़िल्म का सफ़र पूरा करने में दर्शकों को बांधकर रखने के पूरे इन्तजाम है। कहानी बीच में स्लो हो जाती है, लेकिन दर्शकों का कनेक्शन टूटने नहीं देती ये फिल्म का एक मजबूत पहलू है।
परिणीति के अलावा पुलिस ऑफिसर के रोल में कीर्ति कुल्हारी का काम भी सराहनीय है। हमेशा की तरह उनकी एक्टिंग अच्छी रही। मीरा के पति के रोल में अविनाष तिवारी ने भी किरदार अनुरूप काम किया है। और एक खास फिर भी छोटा लेकिन जरूरी किरदार निभाने वालीं अदिति राव हैदरी भी अपने किरदार को न्याय देने में खरी उतरती है।
एक्टिंग के अलावा परिणीति की इस फिल्म का डायरेक्शन भी मजबूत रहा है। इस फिल्म में ड्रामा है, सस्पेंस हैं और कई इंटेंस मोमेंट भी हैं, कुल मिलाकर ये फ़िल्म देखने लायक और शानदार बनी है एक बार जरूर देखें।

(भावना ठाकर, बेंगुलूरु)#भावु

What's Your Reaction?

like
0
dislike
0
love
0
funny
0
angry
0
sad
0
wow
0