थोड़ा स्वार्थी बनिए

याद कीजिए ,जब बचपन में सभी कहते थे ये गोल्डेन टाइम होता है तो कितना गुस्सा आता था ....ये भी क्या 'गोल्डेन टाइम' हुआ जहाँ हर वक्त पढ़ाई और परीक्षा का खौफ मँडराता है सिर पर। फिर बड़े हुए तो पता चला बचपन ही ठीक था भाया.....अब तो

थोड़ा स्वार्थी बनिए

जीवन का हर पड़ाव अपने आप में खूबसूरत होता है। बचपन और जवानी के दिन की तो बातें ही क्या ,पर 40प्लस की उम्र भी अपने आप में खास होती है। अब आप सोचेंगी ये क्या बात हुई भला ! लेकिन मेरी बात में दम तो है ,मैं यूँहीं नहीं कह रही। उम्र तो बस एक नंबर है जिसे दिनबदिन बढ़ते जाना है लेकिन हमारे अंदर का बालमन हमारे हाथ में है हम उसे जैसा ट्रीट करेंगे वो वैसा ही व्यवहार करेगा। 

याद कीजिए ,जब बचपन में सभी कहते थे ये गोल्डेन टाइम होता है तो कितना गुस्सा आता था ....ये भी क्या 'गोल्डेन टाइम' हुआ जहाँ हर वक्त पढ़ाई और परीक्षा का खौफ मँडराता है सिर पर। फिर बड़े हुए तो पता चला बचपन ही ठीक था भाया.....अब तो जिंदगी में मसले ही मसले हैं ,कभी ऑफिस तो कभी घर , कभी माता -पिता /सास ससुर तो कभी बाल बच्चों की चिंता ,बस इसी में पूरी जवानी गुजर जाती है। 
इसके बाद आता है आपका 40प्लस वाला टाइम । इस उम्र तक आते आते हम जीवन में करीब करीब सेटल हो जाते हैं। बच्चे भी काफी हद तक समझदार हो जाते हैं या यूँ कहें अब उनके आगे पीछे दौड़ने भागने से हमें छुट्टी मिल जाती है। अपने अभिभावकों के प्रति अपनी नई जिम्मेदारियों से हम वाकिफ हो चुके रहते हैं। तो हुआ न थोड़ा व्यवस्थित समय ! लेकिन इसी समय शुरू होती है छोटी -मोटी शारीरिक व मानसिक चुनौतियां। ये वहीं परेशानियां होती हैं कि जिनका अगर हमने सही तरीके से ध्यान नहीं दिया तो आगे चलकर कष्ट का कारण बनती हैं।
 
तो, एक बार जब आप उम्र के इस पड़ाव पर पहुँचे तो चिंता फिक्र की बजाए कुछ समय अपने लिए निकालें। कहना आसान है पर हम महिलाओं के लिए अपने लिए समय निकालना बहुत मुश्किल हो जाता है चाहे घरेलू हों या कामकाजी। पर थोड़ा स्वार्थी बनिए। अब तक आपने पूरे परिवार के लिए अपना समय दिया है तो क्यों न कुछ अपने ऊपर भी दिया जाए और वो भी बिल्कुल गिल्ट फ्री होकर । सुबह का एक घंटा तो जरूर आपका अपना होना चाहिए। अगर इस समय आपने योग , वॉकिंग, प्राणायाम, ध्यान अथवा व्यायाम कर लिया तो निःसंदेह पूरा दिन तरोताज़ा महसूस करेंगी। खान-पान की शैली में भी छोटे छोटे हेल्दी बदलाव लाइए। ये सब एक दिन, एक सप्ताह या एक महीनों में संभव नहीं है पर धीरे-धीरे सकारात्मक परिवर्तन दिखने लगेंगे। 
ये सब तो रटी रटाई बातें हो गई ऐसा कीजिए ,वैसा कीजिए.... लेकिन सबसे खास बात यह कहना चाहूँगी कि अगर किसी भी तरह की स्वास्थ्य संबंधी परेशानी लगे तो डाक्टर की सलाह लेने में देर न करें।
 घर के कामों में बच्चों और पति की हेल्प जरूर लें। इससे हमें तो राहत मिलती ही है बच्चे भी खेल खेल में बहुत कुछ सीख लेते हैं।  
 इस ब्लॉग के जरिए दोस्तों , मूल मंत्र मैं ये देना चाहती हूँ कि अब आप अपने लिए जीयो। घर गृहस्थी की तमाम जिम्मेदारियों के बीच 'मी टाइम' निकालें और अपना मनपसंद काम करें, अपनी पुरानी छूटी हॉबी को दुबारा उभारें। जिंदगी एक बार मिलती है ,इसके हर पल ,हर पड़ाव का लुत्फ उठाएँ। और अगर आप खुश और तरोताज़ा हैं तो यकीनन आपका पूरा परिवार खुशहाल रहेगा।
आज बस इतना ही,
धन्यवाद.....
आपकी दोस्त 
तिन्नी श्रीवास्तव।

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