मेरी आवाज ही है एक जीने का सहारा  उसके साथ कुछ पल जीना चाहती हूँ

उकेर सकूँ अपनों शब्दों को कागज़ पर बयाँ कर दूँ अपने जज्बातों को  बस एक ऐसा छोटा सा कोना चाहती हूँ ।

मेरी आवाज ही है एक जीने का सहारा  उसके साथ कुछ पल जीना चाहती हूँ

#Thursday Poetry
"तुम्हारे घर में एक छोटा सा कोना चाहती हूं"

उकेर सकूँ अपनों शब्दों को कागज़ पर
बयाँ कर दूँ अपने जज्बातों को 
बस एक ऐसा छोटा सा कोना चाहती हूँ ।

मेरी आवाज ही है एक जीने का सहारा 
उसके साथ कुछ पल जीना चाहती हूँ 
बस एक ऐसा छोटा सा कोना चाहती हूँ ।

तुम रख लो मेरी जिन्दगी की सारी मिठास 
बदलें में दे दो अपनी सारी कड़वाहट 
बस एक ऐसा छोटा सा कोना चाहती हूँ ।

थम जायेगा जिंदगी का सफर,न जाने किस मोड़ पर 
जी लूँ अपनी चाहतों को हमसफर बना कर
बस एक ऐसा छोटा सा कोना चाहती हूँ ।

कुछ तो है मेरे अन्दर टूटा हुआ, शायद कोई ख्वाब 
कोई अधूरी ख्वाइशों का जजीरा सिमटा हुआ 
बस एक ऐसा छोटा सा कोना चाहती हूँ ।

अपनों की तलाश में खुद को ही खो बैठे है हम
एक सपना-एक चाहत है यही ,ज्यादा नहीं
बस,तुम्हारें घर में एक छोटा सा कोना चाहती हूँ ।


अर्पणा जायसवाल ????
(मौलिक,स्वरचित)

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