वाग्देवी सरस्वती अवतरण उत्सव

वाग्देवी सरस्वती अवतरण उत्सव

बसंत पंचमी  शुभ दिन मां सरस्वती के अवतरण का,शास्त्रों में आज का दिन पीले वस्त्र पहन कर मां सरस्वती पूजन को समर्पित है।
 आइए इस वसंतोत्सव आपको परिचित कराएं ऐतिहासिक ओर विश्व प्रसिद्ध धार स्थित भोजशाला की वाग्देवी सरस्वती के।जिसका निर्माण राजा भोज द्वारा 1034में करवाया गया था एक महाविद्यालय के रूप में।पूर्वमुखी यह आयताकार भवन अपनी वास्तु शिल्प कला के लिए विश्व प्रसिद्ध है।
 शिक्षा का यह केंद्र कालिदास, बाणभट्ट,मानतुंग,माघ, धनपाल आदि आचार्यों की तपोभूमि है।
 1300से1400के बीच कई मुस्लिम शासकों ने यह राज किया।जिस दौरान  भोजशाला को ध्वस्त कर यहां मकबरा ओर मजार बना दी गई।1875की खुदाई में फिर यह मूर्ति भोजशाला के पास ही मिली जिसे मेजर किन केड लंदन ले गया।आज भी यह वही रखी है।
लेकिन  तब से स्थान को लेकर काफी विवाद रहा।शांति स्थापना के लिए प्रशासन ने दोनो पक्षों को सुरक्षा मुहैया कराते हुए एक साथ नमाज़ ओर पूजा की मंजूरी दी।
आज यह धार्मिक आयोजन सौहार्द और धर्मनिरपेक्षता का प्रतीक है। जहां दोनो वर्गो के लोग प्रेम से पूजा करते ओर नमाज़ अदा करते हैं।
  दूसरी ओर यह एक शिशु के विद्या आरंभ करने का दिन  भी है। इस दिन विद्या आरंभ करने से शिशु ज्ञानवान  बनता हे।
ऋतुराज बसंत के आगमन से प्रकृति एक नव योवना सी संवर जाती है।चारो ओर पीले रंग से सराबोर खेत खलिहान ,फूलों की महक,कोयल की कुक,भंवरे का गुनगुनाना, रंग बिरंगी तितलियों का उड़ना बरबस ही मन को बहकाता है, महकाता है।पीले फूलों में मधुमक्खियां मधु को भंडारण शुरू कर देती हैं।
लेकिन क्या ये सब यूं ही है!सामान्य रूप से तो हां! लेकिन यदि हम गहराई से सोचें और  देखें तो इसमें प्रकृति और मनुष्य के बीच एक गहरा संबंध समझ आता है।
पीले रंग को  ऊर्जा का प्रतीक माना गया।हम शरद से बसंती ओर अपने में शरद ऋतु में संचित की गई ऊर्जा को  लेकर बढ़े, जिससे हमारी अंदर बाहर चारों ओर की नकारात्मकता , और क्रोध  जैसे बुरे  विचार क्षीण हो ओर हम आने वाले वर्षा और ग्रीष्म ऋतु के ताप को अपने श्वेत वस्त्रों मेंg समावेशित कर शांत कर सकें।
मधुमक्खी का शहद संग्रहण हमें संकेत देता है हम भी वर्षाकाल के लिए अन्न संग्रहित करें।ओर इस समय की श्रेष्ठ ऊर्जा में पके धान ,अनाज,सब्जियों को धूप में सुखा कर उन्हें अत्यधिक सेवन करें जिससे हम  स्वास्थ लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
बिना  ज्ञान के संसार  अंधकारमय है।
चाहे वैचारिक या व्यवहारिक नकारात्मक ता हो  बसंत पंचमी  का दिन हमें उस नकारात्मक ता को सकारात्मक ऊर्जा में परिवर्तित कर प्रकाशमान, आनंदमय, आलोकित होने की ओर प्रेरित करता करता हे। यह दिन  धरती पर मनुष्य एवं प्रकृति के बीच प्रेम और  ज्ञान का उजास उत्सव
 है। 
आइए हम मां सरस्वती के  चरणों में नमन करें स्वागत करें उनका अपने नवीन विचारों से जो हमें मानव से महामानव बनने की और प्रेरित करते हो ।

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