वो दहशत भरा सफर

अपने एक मित्र को एयरपोर्ट छोड़ पंकज जैसे ही बाहर निकला तो धुंध काफी बढ़ गई थी। इसलिए उसने अपनी कार की स्पीड कम ही रखी । अभी वह कुछ ही आगे बढ़ा था कि उसने देखा एक

वो दहशत भरा सफर

दहशत भरी रात
अपने एक मित्र को एयरपोर्ट छोड़ पंकज जैसे ही बाहर निकला तो धुंध काफी बढ़ गई थी। इसलिए उसने अपनी कार की स्पीड कम ही रखी । अभी वह कुछ ही आगे बढ़ा था कि उसने देखा एक महिला सड़क पर खड़ी है। जैसे ही उसकी कार उसके पास से गुजरी, उसने कार रोकने के लिए इशारा किया । पंकज उसे अनदेखा कर आगे निकल गया ,लेकिन कुछ सोच उसने अपनी कार रोक दी। कार रूकते ही वह महिला दौड़कर पास आई। पंकज ने जैसे ही शीशा नीचे किया वह बोली" प्लीज मुझे लिफ्ट दे दो , आज ऑफिस में काम की वजह से लेट हो गई थी। मेरी आखिरी बस भी निकल गई। इतनी देर से ऑटो, टैक्सी का इंतजार कर रही हूं, लेकिन कुछ नहीं मिला। मेरी मजबूरी समझिए ।"
पंकज को उसे यूं इस रात में अकेला छोड़ना सही नहीं लगा। उसने, उसे अंदर बिठा लिया। महिला के चेहरे पर अब तक घबराहट थी। वैसे भी आजकल रात को महिलाओं के साथ घटने वाली आमानवीय घटनाओं ने यह माहौल पैदा कर दिया था। थोड़ी ही देर में उस महिला का बताया हुआ गंतव्य स्थान आ गया। पंकज ने उसे उतरने के लिए कहा तो वह बोली मुझे यहां नहीं उतारना मुझे यमुनापार जाना है। यह सुन पंकज का सिर चकरा गया ।वह बोला "आपने तो कहा था कि आपको यही उतरना है फिर अब ?"
"अगर मैं तुम्हें पहले बता देती कि मुझे वहां जाना है तो क्या तुम मुझे बिठाते ?"
"देखिए मैडम आप भी जानती है कि यमुनापार यहां से काफी दूर है और मुझे देर हो रही है आप कहे तो मैं आपके लिए टैक्सी या ऑटो करवा देता हूं ।" वह महिला थोड़े गुस्से से बोली " जाऊंगी तो मैं तुम्हारे साथ ही और तुमने ज्यादा आनाकानी की तो मैं शोर मचा दूंगी फिर तो तुम जानते ही हो ना !"
उसकी यह बात सुन पंकज का हलक ही सूख गया वह घबराते हुए बोला " यह क्या कह रही हो ,आप ऐसा कैसे कर सकती हो ।"
"मैं यह कर सकती हूं, बोलो चलते हो या !" पंकज ने गाड़ी मोड़ ली। अब दहशत में आने की बारी पंकज की थी। उसका मन आशंकाओं से घिरा जा रहा था । उसे रह-रहकर लग रहा था कि वह किसी साजिश में फंसने वाला है। उसे अपने पर गुस्सा भी आ रहा था कि उसने गाड़ी क्यों रोकी । इसी सोच में वह उस महिला के घर तक पहुंच गया ‌महिला ने उतरते हुए उसे धन्यवाद कहां और पैसे देने चाहे।
तब पंकज ने हैरानी से उसकी ओर देखते हुए पूछा "यह सब क्या है ,और जो कार में तुमने किया वह सब क्या था?" उस महिला ने कहा इतनी रात अकेले कुछ ना मिलने से मैं काफी घबरा गई थी। तुम मुझे एक अच्छे इंसान लगे। लेकिन जब तुमने मुझे बीच रास्ते में छोड़ने के लिए कहा तो मैं फिर से दहशत में आ गई थी और मुझे यह सब करना पड़ा ।" 
"तुम्हारे लिए यह सही हो सकता है, किंतु मेरे लिए यह समय कितना दहशत भरा रहा तुम नहीं समझ सकती और इस सबसे बढ़कर आज इंसानियत से मेरा विश्वास उठ गया है  । अब मैं चाह कर भी शायद ही किसी की मदद कर पाऊं । " यह कह पंकज ने कार आगे बढ़ा दी और वह महिला आंसू भरी नजरों से उसे जाते हुए देखती रही।
सरोज
मौलिक व स्वरचित

#मेरी पहली रोमांचक यात्रा

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