वो किताब जो ज़िंदगी बना गईं /जीत आपकी .... बस नाम ही काफ़ी हैं !!!!!!

वो किताब जो ज़िंदगी बना गईं /जीत आपकी .... बस नाम ही काफ़ी हैं !!!!!!

ज़िंदगी कई बार रुक सी जाती हैं यूँ लगता हैं अब आगे क्या ?? 

क्या मैं कुछ नही कर सकती ?? मेरी पढ़ाई लिखाई सब व्यर्थ हो गईं । ये सब कई बार मुझे लगता था । शादी के चार पाँच साल बाद यूँ लग रहा था , कैसी हो गई हूँ मैं सिर्फ़ खाना बनाओ और घर सम्भालो । 
बहुत दुखी थी ।ज़िंदगी से ये नही चाहा था मैने ।  ससुराल में हर वक्त सब कहते तुम्हें तो कुछ आता ही नही हैं ... मन दुखता पर चुप रहती थी । कभी कुछ पढ़ने लगती तो पतिदेव कहते .. चलो बहुत पढ़ ली अब थोड़ा घर का काम करो । देखो !माँ और भाभी काम कर रही हैं । 

यूँ लगता था  कुछ ग़लत हो रहा हैं मैं ये नही हूँ  आत्मविश्वास खोने लगा 

इसी परेशानी में मायके गई थी । बड़े भैया ने पूछा इतनी चिड़चिड़ी क्यूँ हो गई हैं ।
हर बात पर ग़ुस्सा हो रही हो ?क्या हुआ जो  शादी के बाद ज़िंदगी थोड़ी रुक गई ?? 
पर जब भी थोड़ा समय मिले कुछ अच्छा पढ़ो  
कुछ लिखो कुछ अच्छा सोचो अपने आप को थोड़ा सकारात्मक बनाओ । 
लो ये पढ़ो  ये "शिव खेड़ा  की किताब "जीत आपकी " पढ़ो बहुत अच्छी किताब हैं मोटिवेशनल हैं ... 

हाथों में वो किताब आई सच कहूँ जैसे पहले मुझे पढ़ने का नशा सा था उस किताब के दो चार पन्ने पढ़ने के बाद फ़िर वही मन हुआ की इसे ख़त्म करके ही कुछ काम करूँ ... 

इस किताब में शिव खेड़ा ने अपने जीवन के अनुभव से ही कहानियाँ लिख कर और दूसरे तरीक़ों से अपने पाठकों के सामने रखा हैं । 

"जीतआपकी"
मोटिवेशनल ख़ज़ाना  हैं ।अगर इसे आप ध्यान से पढ़े  तो ज़िंदगी में सकरात्मकता ज़रूर आयेगी । हर तरफ़ से निराश हो चुके हो उनके भी मन में कुछ करने की ललक उठेगी ।
एक ये लाइन हैं -
अपने को बेहतर बनाने में इतना वक्त लगा दो की दूसरों की आलोचना करने के लिए वक्त ही ना बचे ...

 "जीतने वाले कुछ अलग नही होते ,बस चीज़ों को अलग तरीक़े से करते हैं "

खुद को आत्म सुझाव देने की आदत डाले अवचेतन मन आत्मसुझाव प्रभावित करता हैं  फ़िर अवचेचेतन मन इस आत्मसुझाव पर अमल करता हैं फ़िर ये हमारे आत्मविश्वास को जगाता हैं को जिस व्यक्ति में आत्मविश्वास जग जाये वो सब कर सकता हैं 

मैं ये कर सकती हूँ 
मैं कुछ नही भूलूँगी  , 
मुझमें क्षमता हैं । 


एक  बात मैं इस किताब की यँहा लिखना चाहूँगी ... 
तीन मज़दूर एक पुल बन रहा था उसके लिए ईंट उठा रहे थे । 
एक से पूछा की भाई तुम क्या कर रहे हो ?- तब उसने कहा ईंट ढो रहा हूँ 
दूसरे से पूछा तो  आप क्या कर रहे हो ? .. 
तो उसने कहा ..  देख तो रहे हो ईंट उठा रहा हूँ जब तीसरे मज़दूर से पूछा तो उसने क्या जवाब दिया .. उसने कहा मैं दुनिया की सबसे बेहतरीन पुल के निर्माण में अपना योगदान दे रहा हूँ । 
ये तो एक नज़रिया हैं , लेखक ये कहना चाह रहे हैं की खुद को कभी कम ना समझो खुद को और अपने काम की इज़्ज़त करना सीखो जब खुद की इज़्ज़त करोगे तभी दूसरे भी तुम्हारी इज़्ज़त करेंगे ।

ठीक इसी प्रकार से जीवन में यदि सफल होना है तो हमें नए नजरिए और दृष्टिकोण को महत्त्व देना चाहिए। जब हम अपनी हदों और सीमाओं को नहीं जानते, तो हम बड़े और ऊंचे काम करके खुद को आश्चर्य में डाल लेते थे। 
जब पीछे मुड़कर देखते है तो हैरानी होती है, कि मेरी  कोई सीमा नहीं थी। 
इसलिए खुद को कभी किसी बंधन में नहीं बांधना चाहिए खुद को कभी कम नही आँकना चाहिये । 
वैसे तो ये किताब पहले अंग्रेज़ी में लिखी गईं थी ..  you can win 
पर मैने हिंदी वाली पढ़ी हैं इसको पढ़ते पढ़ते मन एक आत्मविश्वास जागा ।इतने दिनो से पेंटिंग और सितार से दुर हो गईं ।उन्हें फ़िर से शुरू किया । घर और बच्चों के अलावा  अपने लिए समय निकालने लगी । फ़िर से ज़िंदगी अच्छी लगने लगी । 

खुद को मोटिवेट किया ।  बाद में दूसरों को भी मोटिवेट करने लगी ।

मेरी ज़िंदगी में इस किताब का बहुत महत्व हैं ।  सच ! इसे एक बार तो सबको पढ़ना चाहिये ।

जब कुछ मुश्किल घड़ी आये 
तो बस अंतरमन  के अवचेतन में धीरे से कह डालो  आत्मविश्वास से भरी हूँ  ... मुश्किल को भी झेल सकती हूँ .. .. मुझमें में हैं वो बात कुछ भी कर सकती हूँ !!!!!!!!!

ये मेरे विचार हैं ....
आपकी ...
अल्पना !!!!!!'

What's Your Reaction?

like
1
dislike
0
love
1
funny
0
angry
0
sad
0
wow
0