ये धागा अनमोल हैं भाभी

ये धागा अनमोल हैं भाभी

बहन भाई के अटूट रिश्ते का प्रतीक हैं रक्षा बंधन।। सबसे अनोखा भावनाओं की चाशनी में पगा सा ये प्यारा सा त्यौहार जो रह रहकर विभा की यादों को ताजा कर रहा था।।
विभा इस त्यौहार की यादों में खोकर अपने बचपन मे खो गयी।

 
छोटी थी तब वो अपने भाई के लिए मोली के धागे को गूंथ कर उसे ही तो अपने भाई की कलाई पर सजाती थी।। क्योंकि माँ भी हमेशा मामा को ये मोली का धागा ही बांधती थी।।
एक दिन दोनो बहन भाई ने माँ से पूछ ही लिया कि माँ ये धागा क्यों बांधते है। और बाजार से क्यों नही लाती हैं राखियां।।
माँ दोनो की बात पर जोर से हँसी ओर 
माँ ने बताया - 
मोली का महत्व यह सबसे पवित्र धागा होता हैं,। ये साधारण सा दिखने वाले धागे में बहुत शक्ति होती हैं बहन का प्यार और आशीर्वाद से जो गूँथा होता हैं।
बेटा कलाई पर ये सुंदर भी दिखता हैं और सबसे बड़ी बात ये हैं कि इसे अनन्त दिनों तक कलाई पर सजाकर रख भी सकते हैं।। बाजार में मिलने वाली राखी के केवल दिखने में ही सुंदर लगती हैं लेकिन उससे ज्यादा दिन तक कलाई पर रखा नही जा सकता। बस एक दिन में ही बोझ सी लगने लगती हैं बाजार की राखी।।


विभा और उसके भाई रोहित को माँ की बात अच्छी लगी तभी रोहित बोला मैं तो हमेशा ही दीदी के हाथ से गुंथी मोली की राखी ही बंधवाया करूंगा।।
माँ भी रोहित के मुँह से ये बात सुनकर खुश थी।।  

समय बीतता गया

दोनो बहन भाई समय के साथ साथ बड़े हो गए थे और दोनो की शादी करने के कुछ सालों बाद ही उनकी माँ का स्वर्गवास हो गया था।।
रोहित की शादी हो जाने के बाद वह  एक शहर की अच्छी कम्पनी में मैनेजर डायरेक्टर की पोस्ट पर था।। 
रोहित की पत्नी सुंदर थी 
रोहित की पत्नी शानू दिखावा बहुत करती थी।। बड़ी फेशनबल व बड़बोली थी।।
अब शहर में रहती हैं तो उसी हिसाब से दिखावा भी करना पड़ता था।। जब भी विभा के साथ फोन पर बात करती तो बस हमेसा ये ही कहती थी क्या दीदी आप भी पुराने जमाने मे हो अभी तक अब तो नए युग मे जीना सीखो।
लेकिन विभा उसकी बातों का बुरा नही मानती थी।।

विभा भी खुश थी अपने ससुराल में।। 
बहुत अमीर परिवार में शादी होने के बाद भी वह दिखावा बिल्कुल भी नही करती थी बिल्कुल साधारण सी रहती थी।।

विभा को याद था कि कुछ दिन बाद रक्षाबंधन आने वाला है क्यों ना अपने भैया भाभी को फोन करके यहाँ बुला ले क्योंकि उनकी पहली राखी थी।।
विभा ने रोहित को फोन किया औऱ बोली-सुनो रोहित शादी के बाद ये तुम्हारी पहली राखी हैं तो तुम हो भाभी को इस रक्षाबंधन पर मेरे घर आना है।। ये पर्व हम यही बनाएंगे भाभी ने कभी मेरा घर देखा भी नही इसी बहाने घर भी देख लेगी।।

रोहित ने विभा से कहा दीदी - लेकिन शानू को तो अपने मायके जाना है वहाँ से भी फोन आया है पहली राखी हैं ना।। अब आप बताओ क्या करूँ।।
मैं आपको भी नाराज नही कर सकता।। कोई रास्ता हो तो निकालो ताकि दोनो जगह का मान रह जाए।।
रोहित ने बड़ी विनम्रता के साथ कहा।।
वो अपनी बहन विभा की कोई भी बात नही टालता था।।
विभा बोली ऐसा करना।पहले मेरे यहाँ आ जाना फिर अपने ससुराल यानी शानू के मायके चले जाना।।
और जैसा तुझे ठीक लगे वैसा कर लेना।। अगर तेरा आना नही हो तो मुझे बता देना ताकि में राखी तो भेज दूंगी।।

रोहित ने ठीक है दीदी में आपको बता दूंगा घर जाकर ।। जैसा भी होगा।।

आज दीदी का फोन आया था उन्होंने हमें रक्षाबंधन पर अपने घर बुलाया हैं,,,, रोहित ने ऑफिस से आकर अपनी पत्नी शानू से कहा।।

सानू ये सुनकर बोली क्या करेंगे दीदी के जाकर मायके भी तो जाना है हमे। मतलब तुम्हे दीदी के घर जाने का मन नही है फिर ऐसा करता हूं दीदी को यहाँ बुला लेता हूँ तुम भी अपने भाई भाभी को यहाँ बुला लो सब साथ मे यही मना लेंगे राखी।।

शानू ये सुनकर बेमन से बोली ठीक है  दीदी को फोन करके कह दो की हम लोग आ रहे है राखी पर उनके घर।।
रोहित ने खुश होकर विभा को फोन किया और बोला दीदी हम आ रहे है आपके घर ।।
ये सुनकर विभा की खुशी का ठिकाना नही रहा ।।
अगली  सुबह घर का सारा काम जल्दी से समाप्त करके वो अपने भैया,भाभी के लिए मोली के धागे को गूंथने लग गयी।। जैसे वो बचपन मे गूँथा करती थी।।


तभी विभा के पति बोले - बाजार से ही ले आती राखियां ।ये मोली को गुथने बैठी हो,,,बेवजह ही समय बर्बाद कर रही हो ।।
विभा बोली -इसमें समय बर्बाद करने वाली कोनसी बात है और जो प्यार स्वंय के हाथों से बनी हुई राखी में है वो बाजार में बिकने वाली राखियां में कहा है।। मैं तो सदा ही अपने भाई की  कलाई इसी धागे से सजाती आई हूं और इसे से ही सजाती रहूंगी।।
ये हर समय घर पर आसानी से उपलब्ध होता हैं और समान भाव मे।।
जय हो आपकी ज्ञान की देवी विभा के पति ने हाथ जोड़ते हुए कहा और ऑफिस चले गए।।

विभा मोली गूंथती रही 

मोली को गूथते गूँथते उसके दिमाग मे एक बात आई पता नही अब रोहित को ये मोली का धागा  बंधवाना पसन्द होगा या नही।। क्योंकि अब तो वो बड़े शहर में रहने लगा है और शादी भी हो गयी हैं,,,,शानु तो वैसे भी मुझे हरदम नए जमाने की ही बात करती हैं सायद उसको तो बिल्कुल ही पसन्द नही आएगी ये गुंथी हुई मोली।।
मन मे काफी सारे सवाल जन्म लेने लगे।। लेकिन मैं खुश थी कि पहली बार भैया भाभी मेरे घर आ रहे थे।।
घर मे सारी तैयारी अच्छे से कर रखी थी।। 
बस इंतजार था तो रक्षाबंधन के दिन का वो भी जल्दी ही आ गया।।
बार बार गाड़ी को हॉर्न सुनकर मैं बाहर आ जाती थी मतलब बड़ी बेसब्री से इंतजार कर रही थी भाई भाभी का।।
तभी घर के बाहर एक गाड़ी रुकी जिसमें भैया भाभी थे उन्हें देख मन खुश हो गया।।


भाभी तो मेरे मकान को देखते ही रह गयी औऱ बोली वाह! दीदी इतना सुंदर घर है आपका तो बिल्कुल जैसा शहरों में होता हैं,,,, 
आपके पहनावे और रहन सहन से तो लगता नही था कि आप इतनी अमीर हो भाभी और कुछ कहती इससे पहले ही रोहित ने उसकी तरफ आँख निकालकर चुप कर दिया।। और बात को पलटने के लिए बोला और केसी हो दीदी।ओर सब कहा गए।। 

विभा बोली मैं ठीक हूँ तुम दोनों बताओ कैसे हो । हम भी ठीक है दीदी।।
सभी ने बैठकर चाय नाश्ता किया और बात करते रहे।। तभी शानू बोली दीदी थोड़ा जल्दी फ्री कर दो हमे अभी मायके भी तो जाना है ।।
विभा बोली ठीक है विभा एक प्लेट को 
रोली चावल मिठाई और मोली से बनाई हुई राखी से सजा कर लाई।।

रोहित ने जैसे ही अपनी कलाई आगे की राखी बंधवाने के लिए तुंरत शानु जोर से हँसी बोल पड़ी ये क्या दीदी।।
इतना सिम्पल सा धागा।


ये कोई राखी हैं क्या,,, बाजार में इतनी सुंदर सुंदर राखी हैं और आपको ये ही मिला क्या आज के दिन भी मोली का धागा।। घर तो आपका इतना बड़ा है लेकिन इतनी कंजूसी भी किस काम की दीदी आप जमाने को देखते हुए क्यों नही बदलती हो।।
ये देखो मेरी राखी अपने भैया भाभी के लिए लायी हूँ एक से बढ़कर एक राखी।। शानू ने बेग में से राखी निकालते हुए कहा।।

रोहित ने ये सुनकर शानू को जोर से फटकार लगाई और कहा।।
तुम जानती क्या हो इस पवित्र धागे के बारे में ।।
ये धागा प्रेम का धागा हैं ये अनमोल हैं ।ये बाजार में बिकने वाली दिखावटी राखियां की तरह नही होता जो कुछ देर बाद ही बोझ सी लगने लगती है।।
ये मोली सहज भी हैं,मोली सरल भी हैं
मोली सुंदर भी हैं और मोली सह्य भी हैं। ये मोली बिल्कुल मेरी दीदी की तरह है।। 
रोहित की फटकार से शानू का मुंह उतर गया।।
तभी विभा बोली भाभी में आपके लिए बाजार वाली राखी भी लायी हूँ ।।
अगर आपको ये मोली का धागा पसन्द नही है तो।। 
भाभी मुझे बचपन से ही माँ ने जैसा इस धागे के बारे में बताया उसी तरह से मे इस धागे को अपने भाई की कलाई पर प्यार से बांधती हूं क्योंकी भाई बहन का प्यार तो अटूट होता हैं।। अनमोल होता हैं फिर चाहे ये धागा बांधो या बाजार से लाई हुई राखी।। 

शानू को समझ आ गया था कि उसने ऐसा कहकर दीदी की भावनाओं को ठेस पहुँचाया हैं।। उसे मन ही मन दुःख हुआ की ऐसा नही बोलना चाहिए।।अपनी गलती को सुधारने के लिए 
उसने झट से हाथ आगे करके कहा दीदी मुझे भी आपके हाथ की गूँथी हुई राखी ही बांधो।। आज मुझे समझ आ गया इस अनमोल धागे का महत्व।।

रोहित ओर विभा शानू की बात सुनकर हँसने लगे।।

मेरी इस रचना का मकसद एक संदेश देना है इस साल रक्षाबंधन पर कोविड-19 की वजह से बाजार राखी खरीदकर भेजने की बजाय मोली को ही हाथो में बांधा जाए ।। बाजार की राखी ना जाने कितने हाथो से गुजरकर आएगी,इसलिए कोरोना के इस दौर में यह एक रिस्क साबित हो सकती हैं।।
ऐसा रिस्क उठाना ही क्यों जो अपनो को दुविधा में डाले।।
इसलिए आप सभी से निवेदन हैं कि घर पर ही मोली के पवित्र धागे से अपनी और अपने भैया की कलाई सजाए????????????

ममता गुप्ता
स्वरचित व मौलिक

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