आख़िर क्यूँ बदल जाते है बेटे शादी के बाद?

आख़िर क्यूँ बदल जाते है बेटे शादी के बाद?

आजकल बहुत से माँ-बाप की ये शिकायत रहती है की शादी के बाद बेटा बदल गया, अब हमारा नहीं रहा, बहू ने हमसे हमारा बेटा छीन लिया। ये विषय कोई आम नहीं, सोचनीय है। पहले माँ-बाप की मानसिकता की बात करते है, खास कर बेटा माँ के ज़्यादा करीब होता है। इंसान की फ़ितरत है अपनी सबसे अज़िज व्यक्ति या चीज़ पर किसी ओर का अधिकार बरदाश्त नहीं होता इसलिए बेटे की शादी के बाद बेटा उसकी पत्नी को ज़रा भी तवज्जों देता है तो माँ के मन में खटकता है जोकि बहुत गलत है।


पर सोचिए बहू को आप खुशी-खुशी अपने बेटे के लिए चुनकर लाए है, वो भी किसीके जिगर का टुकड़ा है, अपना सबकुछ छोड़ कर आपके बेटे के सहारे ज़िंदगी जीने का फैसला करके आई है। आपके बेटे पर उसका भी उतना ही हक है जितना आपका, और जितना आपके प्रति फ़र्ज़ है उतना ही अपनी पत्नी के प्रति भी है। वो उसकी जीवन संगिनी है, हमसफ़र है अगर उसकी परवाह करता है, सर आँखों पर रखता है और ज़रा सी मदद कर देता है तो क्या गलत है। आपको खुश होना चाहिए की आपके बेटे को आपने इतने अच्छे संस्कार दिए कि अपनी पत्नी का सम्मान करता है उसको प्यार से रखता है, ये कोई जलने वाली या नाराज़ होने वाली बात नहीं। खुशी खुशी सौंप दीजिए अपना बेटा बहू को। आपके व्यवहार पर घर का वातावरण टिका है। बहू को घर का ही सदस्य समझिए तभी बेटा भी खुश रहेगा।


अब देखते है बेटे का माँ बाप के प्रति फ़र्ज़। कभी-कभी माँ-बाप ये कहते है की शादी के बाद बेटा बदल गया तो उसमें ज़रा भी अतिशयोक्ति नहीं होती। बहुत से लड़के शादी के बाद पत्नियों के गुलाम बन जाते है। माँ-बाप और पत्नी के बीच बेलेंस नहीं रख पाते, पत्नी के गलत व्यवहार पर उसे टोक नहीं पाते। उस पर भी अगर पत्नी पाँच-पच्चीस हज़ार कमाने वाली हो तब तो सर पर चढ़ कर नाचती है। न घरवालों के साथ अच्छा व्यवहार होता है, न रिश्तेदारों के साथ संबंध रखने की जरूरत समझती है। सास-ससुर बोझ लगते है और न घर के कामों पर ध्यान देती है। ससुराल से चार दिन आई ननद एक आँख नहीं भाती और अपने पति पर अपना एकाधिकार समझती है, पर मजाल है लड़का पत्नी को दो शब्द भी बोल सकें। बीवी से इतना भी क्या डरना?


पत्नी को पूरे सम्मान से सर आँखों पर बिठाकर रखिए पर सर पर चढ़ कर नाचने की इजाज़त मत दीजिए। आपके माँ-बाप के प्रति फ़र्ज़ को मत भूलिए जो आपके अस्तित्व की वजह है। अपना वजूद भी टिकाकर रखिए पत्नी की नज़र में आपका इतना तो सम्मान होना चाहिए और पत्नी के मनमें आपका इतना तो डर होना चाहिए की मेरी ऐसी हरकत मेरे पति को पसंद नहीं आएगी।


बहू को भी कुछ बातों को मानकर चलना चाहिए। पति के घरवाले और रिश्तेदारों का सम्मान करना चाहिए। अगर पति आपकी हर बात की चिंता करता है परवाह करता है और आपके माँ-बाप और रिश्तेदारों के साथ अच्छा व्यवहार करता है तो आपका भी फ़र्ज़ बनता है ससुराल में घुल-मिल कर रहे। आपके पति के उपर उनके माँ-बाप और भाई-बहन का भी उतना ही हक है, उनके प्रति भी फ़र्ज़ है तो परिवार को अपना समझकर सबको अपना लें तभी घर की गरिमा बनी रहेगी।


दरअसल बेटा बदलता नहीं, सैंडविच होता है। माँ-बाप का पक्ष ले तो पत्नी नाराज़ होती है, पत्नी की परवाह करे तो माँ-बाप को लगता है बेटा


अब हमारा नहीं रहा। संयुक्त परिवार में रहना है तो एक दूसरे की भावना का सम्मान करते एक दूसरे को समझना चाहिए। परिवार है तो सबकुछ है, सबको एक दूसरे की जरूरत है। बेटे अगर पत्नी के साथ-साथ माँ बाप की भावनाओं का भी ख़याल रखेंगे तो ये सुनने की नोबत नहीं आएगी की शादी के बाद बेटा बदल गया।


भावना ठाकर \"भावु\" (बेंगुलूरु, कर्नाटक)

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