आम से खास बनाने के लिए तुम्हारा शुक्रिया

आम से खास बनाने के लिए तुम्हारा शुक्रिया
प्रिय मंच
ढेर सारा स्नेह
कुछ शब्द जो दिल में थे आज खत के माध्यम से व्यक्त करना चाहती हूँ । कहते हैं न कभी किसी से मिलकर ऐसा लगता है कि बहुत पुरानी जान पहचान है ,तुमसे मिलकर मुझे ऐसा ही लगा।हर चीज चमकने का एक वक्त होता है मेरे जीवन में वो वक्त तुम बन कर आए।मैं अक्सर तुम्हारे लिए गुनगुनाती हूँ। 
जैसे सूरज की गरमी से तपते हुए तन को मिल जाये तरूवर की छाया ऐसा ही सुख मेरे मन को मिला है मैने जबसे  है संग तेरा पाया,,,,,,,,पिंक कॉमरेडस।
एक सकुचाई सिमटी सी  स्त्री को तुमने उसके स्वरूप से मिलवाया । जो सपने उसकी आँखे देखती थीं उन छोटे छोटे सपनों को तुमने पूरा करवाया। सपने,,,,,उसके अस्तित्व की पहचान के ,उसके शौक के ।लेखन के शौक के साथ साथ व्यक्तित्व निखार में भी तुम्हारा ही हाँथ है।छोटी छोटी प्रतियोगितायें  रख विजेता के रूप में कभी परिचय की वीडियो तो कभी  वानी जी द्वारा लिया हुआ साक्षात्कार ।मन की सकुचाहट उतार कैमरा फेस करने और अपनी प्रतिभा को प्रतिबिम्बित करने के सुनहरे अवसर तुमने ही दिये।
विभिन्न प्रान्तों, शहरों की सखियों से तुमने ही मिलवाया ।कभी "इन्टरनेशनल सैफ़ डे "के बहाने हमें रसोई की नई नई टिप्स मिलीं तो कभी गीत और नृत्य आयोजन कर विभिन्न प्रान्तों की भाषा विशेष और नृत्यशैली से परिचित कराया। एक छोटा सा सुन्दर परिवार देने के लिए तुम्हारा दिल से शुक्रिया और क्या कहूँ ,,,,,तुमसे रोज सुबह शाम न मिलूँ तो एक अधूरापन सा लगता है।तुम नित सफलता के नये नये आयाम छुओ । हमारा स्नेह यूँ ही बना रहे।हम साथ साथ चलें।इन्ही शुभकामनाओं के साथ मैं अपनी कलम को विश्राम देती हूँ।
मंच को ,सभी सखियों को नव वर्ष की बहुत बहुत शुभकामनायें,,,,,,
आपकी सखी
सारिका रस्तोगी

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